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तेहरान45 मिनट पहले
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तेहरान में शनिवार को ईरान के सुप्रीम कोर्ट में एक शख्स ने गोलीबारी की। इस हमले में 2 जजों की मौत हो गई। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के प्रवक्ता असगर जहांगीर ने दावा किया है कि जजों को उनके कमरों में घुसकर मारा गया है।
दोनों जज नेशनल सिक्योरिटी, आतंकवाद, जासूसी के मामलों की सुनवाई कर रहे थे। दोनों पर गोली चलाने के बाद हमलावार ने सुसाइड कर लिया। पूरी घटना में एक और जज भी घायल हुआ है। इसके अलावा एक बॉडीगार्ड भी घायल हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक यह हमला स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजकर 45 मिनट पर हुआ। सुप्रीम कोर्ट के जिन जजों को निशाना बनाया गया, उनकी पहचान अली रजिनी और मोघीसेह के तौर पर हुई है। ये ईरानी न्यायपालिका के वरिष्ठ जजों में शामिल थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ज्यादा फांसी की सजा सुनाए जाने के चलते दोनों जजों को हैंगमैन कहा जाता था।

हमले में घायल जज का नाम जस्टिस हुसैन अली नायेरी बताया जा रहा है।
हमले के मकसद का पता नहीं, पुलिस ने जांच शुरू की रिपोर्ट्स के मुताबिक हमलावर जस्टिस डिपार्टमेंट का ही कर्मचारी था। ईरान इंटरनेशनल के मुताबिक तेहरान के कोर्ट हाउस से कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने कहा है कि हमले के पीछे के मकसद का पता लगाने के लिए जांच शुरू हो गई है।
रजिनी की 1988 में भी हत्या की कोशिश की गई थी। उस दौरान उनकी बाइक में मैग्नेटिक बम लगाया गया था। वहीं, अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट के मुताबिक दूसरे जज मोघिसेह पर अमेरिका ने 2019 में बैन लगा दिया था।
दुनियाभर में सबसे ज्यादा फांसी देने वाला देश ईरान ईरान दुनिया में सबसे ज्यादा फांसी की सजा देने वाले देशों में से एक है। ईरान में 2024 में 901 लोगों को मौत की सजा दी गई। इनमें 31 महिलाएं भी शामिल हैं। पिछले साल दिसंबर महीने के एक हफ्ते में 40 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी।
यूएन ह्यूमन राइट्स के मुताबिक पिछले साल जिन लोगों को फांसी दी गई, उनमें सबसे ज्यादा नशीली दवाओं और 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद देशभर में हुए प्रदर्शन से जुड़े थे।
ईरान में 9 साल की बच्चियों की भी दी जाती है फांसी नाबालिगों को मौत की सजा न देने के यूनाईटेड नेशन कन्वेंशन को साइन करने के बावजूद ईरान उन टॉप देशों में शामिल है, जहां सबसे ज्यादा फांसी की सजा दी जाती है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक ईरान में 9 साल की उम्र पार करने के बाद लड़कियों को मौत की सजा दी सकती है। लड़कों के लिए ये उम्र 15 है। साल 2005 से 2015 के बीच लगभग 73 बच्चों को मौत की सजा दी जा चुकी है।
फांसी के तख्त पर पहुंचने से पहले ईरान का हर युवा जिसे मौत की सजा सुनाई गई है वो औसतन सात साल जेल में गुजारता है। कई मामलों में तो यह 10 साल भी है। इंटरनेशल कानूनों के तहत 18 साल से कम उम्र के शख्स को फांसी की सजा देने पर रोक है।
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ईरान में 7 अगस्त को 29 लोगों को फांसी की सजा दी गई। तेहरान के बाहर गेजलहसर जेल में 26 लोगों को और बाकी 3 लोगों को करज शहर की जेल में फांसी दी गई। AFP के मुताबिक नॉर्वे की एक ह्यूमन राइट संस्था ने ये दावा किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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