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अहमदाबाद23 मिनट पहले
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कॉमनमैन के इर्द-गिर्द दो सवाल घूमते हैं- 1. तेजी से पैसा कैसे कमाए? 2. वजन कैसे कम करें? हम पहले प्रश्न का उत्तर अभी नहीं दे रहे लेकिन दूसरे प्रश्न का उत्तर यहां देंगे। भारत विशेषकर गुजरात में मोटे लोगों की भरमार है। पुरुष-महिलाएं दोनों में मोटापा बढ़ रहा है। एक बार जब शरीर मोटा हो जाता है तो कई अन्य बीमारियां भी घेर लेती हैं। वजन कम करने के केवल दो ही तरीके हैं। घूमना और डाइटिंग करना।
अब एक तीसरा और आसान रास्ता खुल गया है। वो तरीका है एक छोटा सा इंजेक्शन।
अमेरिकी कंपनी एली लिली के बनाए गए माउंजारो नाम के इस इंजेक्शन के इस्तेमाल को भारत में मंजूरी मिल गई है। इसमें मौजूद तत्व को तिरजेपेटाइड (Tirzepatide) के नाम से जाना जाता है।
भारतीय बाजार में बिक्री के लिए किसी भी दवा या इंजेक्शन को दो संस्थाओं की मंजूरी की जरूरत होती है। पहली मंजूरी केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की और दूसरी ड्रग कंट्रोल जनरल ऑफ इंडिया की। वजन घटाने वाले अमेरिकी इंजेक्शन को भारत में CDSCO की मंजूरी मिल गई है। जल्द ही ड्रग कंट्रोल जनरल ऑफ इंडिया से मंजूरी मिल जाएगी। अगले पांच-छह महीने में वजन घटाने वाले इंजेक्शन मेडिकल स्टोर्स में उपलब्ध होंगे। बताया जा रहा है कि यह इंजेक्शन दिसंबर-2024 से पहले भारत में उपलब्ध हो जाएगा।

इंजेक्शन पेट, जांघों, व पिछले हिस्से पर जहां अधिक चर्बी हो, वहां लगाया जा सकता है।
इस इंजेक्शन में ऐसा क्या है जो मोटे आदमी को पतला बना सकता है? वजन कैसे कम कर सकते हैं? यह इंजेक्शन कौन ले सकता है और कौन नहीं? इंजेक्शन कितने समय तक लेना है? अगर यह भारत आएगा तो इसकी कीमत क्या होगी? इंजेक्शन लेने से क्या दुष्प्रभाव होते हैं? इन सभी सवालों के लिए हमने अहमदाबाद के ओबेसिटी सर्जन डॉ. अपूर्व व्यास से बातचीत की…
स्कूल जाते-जाते बच्चे मोटे हो जाते हैं?
डॉ. व्यास कहते हैं पिछले दस सालों की बात करें तो मोटापे की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ गई है। यह अनुपात महिलाओं में तो देखा जाता है लेकिन स्कूल जाने वाले बच्चों में यह अनुपात चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है। तीन साल पहले एएमसी की स्टडी सामने आई थी। इसकी रिपोर्ट में लिखा गया कि 2020 में जितने बच्चे मोटे थे, उसकी तुलना में 2022 में 15% अधिक बच्चे मोटापे का शिकार हैं।
अहमदाबाद में हर 100 में से 20 पुरुष और 25 महिलाएं मोटापे से ग्रस्त हैं
तेज जीवनशैली और खान-पान में बदलाव के कारण पुरुषों की तुलना में महिलाओं में मोटापा तेजी से बढ़ गया है। अहमदाबाद में हर 100 में से 20 पुरुष और 100 में से 25 महिलाएं मोटापे से ग्रस्त हैं। इंडियन जर्नल ऑफ फार्मेसी प्रैक्टिस में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, अहमदाबाद में 13 से 18 वर्ष की उम्र के बीच की 14% लड़कियां PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम) से पीड़ित हैं, जो मोटापा बढ़ाता है।
देश में हर 3 में से 2 महिलाएं और 25 से 45 साल की 80 फीसदी कामकाजी महिलाएं मोटापे से ग्रस्त हैं।
हालांकि बेरियाट्रिक सर्जरी के प्रति जागरूकता बढ़ी है। बेरियाट्रिक सर्जरी कराने वाले अधिकांश मरीजों को टाइप-2 डायबिटीज होती है। बैरियाट्रिक सर्जरी पेट और/या आंतों पर की जाने वाली एक सर्जरी है जो अत्यधिक मोटापे से पीड़ित रोगियों को वजन कम करने में मदद करती है। यह सर्जरी उन लोगों के लिए एक विकल्प है जो अन्य तरीकों से वजन कम नहीं कर सकते हैं या जो मोटापे से संबंधित गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं।

क्या सिर्फ अधिक खाने से मोटे हो जाते हैं?
डॉ. अपूर्व व्यास कहते हैं, हम यह नहीं कह सकते कि ज्यादा खाने से शरीर बढ़ता है। ऐसा नहीं होता। बहुत से लोग कम खाते हैं, लेकिन शरीर बढ़ता है। मोटापे का कोई एक कारण नहीं है। इसके कई कारण हैं। इसके लिए तीन कारण जिम्मेदार हैं-
- पहला कारण अनुवांशिक है। इसलिए, यदि माता-पिता दोनों मोटे हैं, तो बच्चा मोटा होगा। यदि माता-पिता में से कोई एक मोटा है, तो 60 प्रतिशत बच्चे मोटे होंगे।
- दूसरा कारण है आहार। हमारे सादे और देसी खाने की जगह वेस्टर्न फूड चेन आ गई हैं और लोग ज्यादा खा रहे हैं। अधिक पनीर, अधिक मक्खन, तली हुई चीजों के साथ बड़ी कोल्ड ड्रिंक मुफ्त। ये सभी चीजें मोटापा बढ़ने का कारण बन रही हैं।
- तीसरा कारण यह है कि व्यायाम कम हो गया है। एक समय लोग पैदल चलते थे, एक्सरसाइज करते थे, वह बंद हो गया है। वाहनों का प्रयोग बढ़ गया है। इन सबके साथ वजन बढ़ने के मामले भी बढ़े हैं।
नया इंजेक्शन कैसे काम करता है?
डॉ. अपूर्व व्यास कहते हैं, हमारे शरीर में दो हार्मोन होते हैं। एक शुगर लेवल बढ़ाता है और इंसुलिन कम करता है। उस हार्मोन का नाम है फोरगुट(Foregut)। दूसरा हार्मोन अतिरिक्त चीनी को जलाकर वजन घटाने में मदद करता है। इस हार्मोन का नाम हिंडगट (Hindgut) है। इस हार्मोन को GLP-1 भी कहते हैं।
यदि शरीर में हिंडगट हार्मोन एक्टिव नहीं है, तो दूसरा हार्मोन तुरंत एक्टिव हो जाता है और शुगर लेवल को बढ़ा देता है। GLP-1 हार्मोन का काम यह है कि यह हमारे मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस भाग में जाकर उसे अधिक एक्टिव बनाता है। इससे निकलने वाला स्राव शरीर में भूख को कम करता है। खाने की इच्छा कम हो जाती है। इसलिए नई शुगर नहीं बन पाती और जमा चर्बी भी धीरे-धीरे कम होने लगती है। यह इंजेक्शन GLP-1 को एक्टिव करता है। इस तरह वजन घटाने में मदद करता है।

टाइप-2 डायबिटीज वाले और बिना टाइप-2 डायबिटीज वाले दोनों ही यह इंजेक्शन ले सकते हैं?
डॉ. अपूर्व व्यास कहते हैं, यह इंजेक्शन कोई भी ले सकता है। टाइप-2 डायबिटीज वाले लोग और बिना टाइप-2 डायबिटीज वाले लोग भी इसे ले सकते हैं। इसकी अलग-अलग मात्रा होती है। वजन घटाने के लिए थोड़ी मात्रा में इंजेक्शन दिया जाता है। अगर आप डायबिटीज को नियंत्रण में रखना चाहते हैं और वजन भी कम करना चाहते हैं तो आपको अधिक इंजेक्शन लेने होंगे।
यदि आपका बॉडी मॉस इंडेक्स (BMI) 38 से 40 है या आप अत्यधिक मोटे हैं और बेरियाट्रिक सर्जरी से डरते हैं तो यह विकल्प अच्छा है। लेकिन यह इंजेक्शन वैसे रिजल्ट नहीं दे सकता जो बेरियाट्रिक सर्जरी दे सकती है।
अगर BMI 32, 33 या 34 है तो वजन कम करना चाहिए। अगर आपको टाइप-2 डायबिटीज है या टाइप-2 डायबिटीज नहीं है तो भी यह इंजेक्शन लेने से आपको फायदा जरूर होगा। इंजेक्शन लेने के बाद भी आपको अपने शरीर का ख्याल रखना होगा। पैदल चलना होगा, आहार में प्रोटीन अधिक लेना होगा और कार्बोहाइड्रेट फैट कम लेना होगा। तो ये सब तो करना ही पड़ेगा। लेकिन एक अच्छी बात ये है कि इस इंजेक्शन का कोई साइड इफेक्ट नहीं है।
क्या अधिक किफायती है, सर्जरी या इंजेक्शन?
डॉ. व्यास कहते हैं- बेरियाट्रिक सर्जरी का खर्च 3-4 लाख रुपए होता है। भारत में आने वाले अमेरिकी माउंजारो इंजेक्शन की कीमत 1500 रुपए मानें। यह इंजेक्शनआपको हर पांच दिन में लेना होगा। यानी हर महीने 9 हजार रुपए खर्च आएगा। साल का 1 लाख 8 हजार रुपए। जो व्यक्ति इंजेक्शन पर हर साल एक लाख रुपए खर्च कर सकता है, वह इंजेक्शन खरीद सकता है।
हां एकबार इंजेक्शन लेना शुरू करो तो जिंदगी भर लेना पड़ेगा। अगर आप इसे एक बार बंद कर देंगे तो कुछ ही समय में आपका वजन फिर से बढ़ना शुरू हो जाएगा और आपका शरीर पहले जैसी स्थिति में आ जाएगा।
लेकिन जो लोग सर्जरी से डरते हैं और जिन्हें आर्थिक समस्या नहीं है, उनके लिए यह इंजेक्शन गेम चेंजर साबित हो सकता है।

यह इंजेक्शन सीधे GLP-1 हार्मोन पर असर करता है।
क्या इसके लिए पहले से कोई दवा या इंजेक्शन है?
डॉ. व्यास ने बताया कि यूरोप का एक इंजेक्शन और एक टैबलेट भारतीय बाजार में उपलब्ध है। इंजेक्शन का नाम है ड्यूराग्लूटाइड और एक दवा है सेमाग्लूटाइड।
दो साल से दवा आ रही है। यह इंजेक्शन सात साल के लिए उपलब्ध है। ये दोनों यूरोपीय देशों से हैं। लेकिन अमेरिका से आ रहा नया इंजेक्शन काफी असरदार है। यह इंजेक्शन डायबिटीज को कंट्रोल करता है और वजन घटाने में भी मदद करता है।
अमेरिका में इंजेक्शन के अच्छे परिणाम आए हैं। यह इंजेक्शन उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है जिन्हें बेरियाट्रिक सर्जरी की जरूरत नहीं है लेकिन वे अपना वजन कम करना चाहते हैं। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए। शर्त यह है कि अगर वजन नियंत्रण में है तो जीवनभर इंजेक्शन लेते रहना होगा।
अब बात मोटापे पर हुए कुछ शोध की…
शहरी महिलाओं में मोटापे की दर अधिक
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, देश में 15 से 49 वर्ष की महिलाओं में मोटापा बढ़ा है। 13% शहरी महिलाएं और 6% ग्रामीण महिलाएं मोटापे से ग्रस्त हैं। यानी ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी इलाकों की महिलाओं में मोटापे का प्रसार दो से ढाई गुना ज्यादा है। गांवों में 2% पुरुष मोटे हैं, जबकि शहर में 9% पुरुष मोटापे से ग्रस्त हैं।
डिलीवरी के बाद भी शरीर का विकास जारी रहता है
महिलाओं में मोटापे का एक कारण प्रसव भी है। क्योंकि, डिलीवरी के दौरान बढ़े वजन को बच्चे के जन्म के बाद कम नहीं किया जा सकता है। जैसा कि आगे चर्चा की गई है, महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) भी जिम्मेदार है। दुनिया में 8 से 13 प्रतिशत महिलाएं PCOS से पीड़ित हैं और उनमें से 70 प्रतिशत का निदान नहीं हो पाया है। भारत की बात करें तो देश की कुल महिलाओं में से 10 प्रतिशत महिलाएं इस बीमारी से पीड़ित हैं। PCOS भी मोटापे के लिए जिम्मेदार है।
महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) क्या है?
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं के अंडाशय से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है और पूरी दुनिया में इससे पीड़ित महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। PCOS महिलाओं के शरीर में हार्मोनल असंतुलन का कारण बनता है, जिससे गर्भधारण करना मुश्किल हो जाता है। इस समस्या को पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज (PCOD) के नाम से भी जाना जाता है। कुछ महिलाएं PCOS और PCOD दोनों नामों को लेकर भ्रमित रहती हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। दोनों एक जैसे हैं।
इस बीमारी में क्या होता है?
यह एक अंडाशय से जुड़ी समस्या है। इससे महिलाओं के शरीर में हार्मोनल असंतुलन हो जाता है। ऐसे में महिलाओं के शरीर में फीमेल हार्मोन की जगह मेल हार्मोन (एंड्रोजन) का स्तर बढ़ने लगता है। PCOS के कारण अंडाशय में कई सिस्ट बन जाते हैं। ये गांठें छोटी-छोटी होती हैं और तरल पदार्थ से भरी होती हैं। धीरे-धीरे यह गांठें बड़ी होने लगती है और फिर ओव्यूलेशन की प्रक्रिया में बाधा डालती है।
PCOS से पीड़ित महिलाओं में अंडाशय में रुकावट के कारण गर्भवती होने की संभावना कम होती है।
PCOS होने से महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज की आशंका भी बढ़ जाती है। टाइप-2 डायबिटीज के कारण वजन बढ़ता है। इसलिए शहरों में मोटापे से ग्रस्त महिलाओं को पैदल चलना चाहिए, व्यायाम करना चाहिए, कम कैलोरी वाला भोजन लेना चाहिए।
