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8 मिनट पहले
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बांग्लादेश में प्रधानमंत्री हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं।
बांग्लादेश में आरक्षण के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन और हिंसक हो गया है। रविवार को हजारों प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए। इस दौरान उनकी और पुलिस के बीच कई जगहों पर हिंसक झड़पें हुईं।
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक रविवार को 97 लोगों की मौत हुई है। इसके साथ ही 500 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। सरकार ने हिंसा पर काबू करने के लिए देशभर में कर्फ्यू लगा दिया है। साथ ही अगले 3 दिनों के लिए छुट्टी की घोषणा कर दी गई है। इसके साथ ही देशभर में सभी अदालतों को अनिश्चितकाल तक के लिए बंद कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि बंदी के दौरान बहुत जरूरी मामलों में ही सुनवाई की जाएगी। इसके लिए चीफ जस्टिस इमरजेंसी बेंच का गठन करेंगे। इसके साथ ही सिर्फ 3 सप्ताह में बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी प्रदर्शन में मारे गए लोगों की संख्या 300 के पार चली गई है। पिछले महीने हुए हिंसा में 200 से ज्यादा लोग मारे गए थे।
बांग्लादेश में हुई हिंसा से जुड़ी कुछ तस्वीरें…

ढाका में विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर कब्ज़ा कर लिया और आग लगा दी।

ढाका में विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक एम्बुलेंस को यह जांचने के लिए रोक दिया कि अंदर कोई मरीज है या नहीं।

ढाका में पुलिस, सरकार समर्थक समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के दौरान एक घायल पुलिस अधिकारी को ले जाती पुलिस

विरोध प्रदर्शन के दौरान ढाका में जमकर बवाल देखने को मिला।
स्टेशन में घुसकर 13 पुलिसकर्मियों को मार डाला
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक सिराजगंज शहर में प्रदर्शनकारियों ने रविवार को पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया। उन्होंने पुलिसकर्मियों को मारा और वहां आग लगा दी। इस हमले में 13 पुलिसकर्मी मारे गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने देश भर में कई पुलिस स्टेशनों पर हमला किया। इसमें 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
शेख हसीना की पार्टी के नेताओं की मॉब लिंचिंग
इसके अलावा आंदोलनकारियों ने नरसिंगडी जिले में पीएम हसीना की पार्टी अवामी लीग के 6 कार्यकर्ताओं को मॉब लिंचिंग कर मार डाला। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोपहर में प्रदर्शनकारियों ने जुलूस निकाला था जिससे अवामी लीग के कार्यकर्ता नाराज हो गए।
उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें 4 लोग घायल हो गए। इससे नाराज होकर प्रदर्शनकारियों ने पलटवार किया। अवामी लीग के कार्यकर्ता डर कर एक मस्जिद में छिप गए, जहां से निकाल कर उनकी पिटाई की गई जिसमें 6 कार्यकर्ता मारे गए।

प्रदर्शनकारियों ने रविवार को कई जगह चक्काजाम किया। उन्हें हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और स्मोक ग्रेनेड का इस्तेमाल किया।

प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पुलिस को प्रदर्शनकारियों से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए हैं।
आंदोलनकारियों ने वार्ता का प्रस्ताव ठुकराया, बोले- अब सड़कों पर ही फैसला होगा
पीएम हसीना ने रविवार को सिक्योरिटी काउंसिल की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनकारी वार्ता की टेबल पर आएं। विपक्ष आंदोलन की आड़ में हिंसा कर रहा है। इस बीच, भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के समन्वयक नाहिद इस्लाम ने ऐलान किया कि मंगलवार को प्रस्तावित ढाका मार्च अब सोमवार को होगा। उन्होंने कहा, अब सड़कों पर ही फैसला होगा।
भारतीय उच्चायोग ने चेतावनी जारी की
बांग्लादेश में रह रहे भारतीयों और छात्रों के लिए भारतीय उच्चायोग ने एडवाइजरी जारी की है। भारतीय नागरिकों से भी बांग्लादेश न जाने की अपील की गई है। विदेश मंत्रालय ने रविवार देर रात एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि बांग्लादेश में चल रही हिंसा के चलते भारतीय नागरिक यात्रा करने से बचें।
उच्चायोग की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए वहां मौजूद भारतीयों से सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। साथ ही उच्चायोग ने किसी भी प्रकार की सहायता या आपातकालीन स्थिति में मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर +88-01313076402 जारी किया है।
PM हसीना बोलीं- प्रदर्शन करने वाले छात्र नहीं आतंकवादी हैं
नेशनल कमेटी ऑन सिक्योरिटी अफेयर्स की बैठक में PM हसीना ने कहा है कि जो देश में प्रदर्शन कर रहे हैं वे छात्र नहीं बल्कि आतंकी हैं। मैं देशवासियों से अपील करती हूं कि वे इन आतंकियों को रोकने के लिए एकजुट हो जाएं। इस बैठक में हसीना के साथ बांग्लादेश की तीनों सेनाओं के चीफ, पुलिस चीफ और टॉप सिक्योरिटी अफसर शामिल हुए थे।
शेख हसीना इसी साल जनवरी में लगातार चौथी बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनी हैं। हालांकि इस चुनाव का प्रमुख दल विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बहिष्कार किया था। BNP निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे की मांग कर रही थी। चुनाव नतीजे आने के बाद देशभर में हिंसा और प्रदर्शन शुरू हो गए थे।

आरक्षण विरोधी हिंसा में 150 से ज्यादा की मौत
पिछले महीने बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण खत्म करने को लेकर हिंसक प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों में 150 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
बांग्लादेश की सरकार ने 2018 में अलग-अलग कैटेगरी को मिलने वाला 56% आरक्षण खत्म कर दिया था, लेकिन इस साल 5 जून को वहां के हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को पलटते हुए दोबारा आरक्षण लागू कर दिया था। इसके बाद पूरे देश में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए थे।

आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों में 11 हजार से अधिक छात्रों को गिरफ्तार किया गया था।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 21 जुलाई को हाईकोर्ट के फैसले में बदलाव करते हुए आरक्षण की सीमा 56% से घटाकर 7 प्रतिशत कर दी। इसमें से स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार वालों को 5% आरक्षण मिलेगा, जो पहले 30% था। बाकी 2% में एथनिक माइनॉरिटी, ट्रांसजेंडर और दिव्यांग शामिल होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 93% नौकरियां मेरिट के आधार पर मिलेंगी।
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“अगर स्वतंत्रता सेनानियों के बेटे-पोते को आरक्षण नहीं मिलेगा तो क्या रजाकारों के पोते-पोतियों को आरक्षण मिलेगा?” बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 14 जुलाई को दिए एक इंटरव्यू में ये बात कही। इसके बाद ढाका में चल रहा आरक्षण विरोधी प्रदर्शन हिंसक हो उठा। प्रदर्शनकारी छात्रों ने उस सरकारी टीवी चैनल में आग लगा दी, जिसे हसीना ने इंटरव्यू दिया था। ढाका यूनिवर्सिटी में ‘तूई के, आमी के रजाकार, रजाकार’ के नारे गूंजने लगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
शेख हसीना लगातार चौथी बार बांग्लादेश की PM बनेंगी:अवामी लीग ने 300 में से 204 सीटें जीतीं; भारत, चीन और रूस ने दी बधाई

बांग्लादेश की मौजूदा पीएम शेख हसीना (76) लगातार चौथी बार प्रधानमंत्री पद पर काबिज होने जा रही हैं। रविवार 7 जनवरी को हुए आम चुनाव में हसीना की पार्टी अवामी लीग ने संसद की 300 में से 204 सीटें जीत लीं। इस बार 299 सीटों पर वोटिंग हुई थी।
वहीं, हसीना ने लगातार आठवीं बार चुनाव जीता। गोपालगंज-3 सीट से उन्होंने बांग्लादेश सुप्रीम पार्टी के कैंडिडेट एम निजामुद्दीन लश्कर को 2.49 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया। हसीना को 2 लाख 49 हजार 965 तो निजामुद्दीन को महज 469 वोट मिले। हसीना पहली बार 1986 में चुनाव जीती थीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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