GN Saibaba said Cannot live without teaching, want my job back | जीएन साईबाबा बोले- पढ़ाए बिना नहीं रह सकता: मुझे मेरी नौकरी वापस चाहिए; नक्सलियों से संबंध मामले में 7 साल जेल में रहे

नागपुर1 घंटे पहले

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दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा ने यूनिवर्सिटी से मांग की है कि उन्हें नौकरी वापस दी जाए और इतने साल जो वे नौकरी से दूर रहे, उसका मुआवजा दिया जाए। साईबाबा को नक्सलियों से कथित संबंध रखने के शक में 2014 में गिरफ्तार किया गया था।

5 मार्च को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने साईबाबा और 5 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने उनकी उम्रकैद की सजा रद्द कर दी है। उन्हें दोषसिद्धि के खिलाफ अपील करने की इजाजत भी दी गई है।

2021 में कॉलेज ने प्रोफेसर पद से हटा दिया था
रिहाई के बाद नागपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साईबाबा ने कहा कि वे पढ़ाए बिना नहीं रह सकते हैं और प्रोफेसर के तौर पर अपनी नौकरी फिर से जॉइन करना चाहते हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के राम लाल आनंद कॉलेज ने साईबाबा को 2021 में प्रोफेसर के पद से हटा दिया था।

मां के अंतिम संस्कार में शामिल न हो पाने का अफसोस
साईबाबा ने कहा कि मेरा परिवार सिर्फ उम्मीद पर जिंदा था। मुझे इस बात का अफसोस है कि मैं अपनी मां से उनके आखिरी समय में नहीं मिल पाया। मुझे उनकी अंतिम संस्कार की रस्में भी पूरी करने की इजाजत नहीं दी गई। मुझे आतंकवादी कहा गया, मेरे परिवार पर लांछन लगाया गया।

साईबाबा ने कहा कि जेल में उन्हें बहुत छोटी सी जगह में रहने को मजबूर होना पड़ा। जेल में 1500 लोगों की जगह में 3000 लोगों को रखा गया था। वहां सोने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं थी। बिना व्हीलचेयर के मुझे टॉयलेट जाने, नहाने यहां तक कि अपने लिए पानी का एक गिलास भी लाने में परेशानी होती थी। जेल में मेरे जैसे लोगों के लिए एक भी रैंप नहीं था, ताकि हम व्हीलचेयर का इस्तेमाल कर सकें।

जेल में दवाएं और मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं दिया गया
मेरी खराब तबीयत के लिए डॉक्टर जो दवाएं और उपचार लिखकर देते थे, वो मुझे नहीं दिया जाता था। मैं आज आपके सामने जिंदा हूं पर मेरे शरीर का हर हिस्सा फेल हो रहा है। मुझे जेल के अंदर कई मेडिकल इमरजेंसी हुईं, पर उन्होंने मुझे सिर्फ पेनकिलर्स दिए और कुछ टेस्ट कराए। मैं अब तक मान नहीं पा रहा हूं कि मैं आजाद हो गया हूं। मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं अब तक उसी जेल में हूं। वहां रहना मेरे लिए अग्नि परीक्षा जैसा था। मुझे एक परीक्षा देने के लिए दो बार अग्नि से गुजरना पड़ा।

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