हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवारों के नामों का ऐलान अब तक नहीं हुआ है। भाजपा की 67 उम्मीदवारों की लिस्ट आ गई है और इसी सप्ताह दो दिन लगातार मंथन के बाद भी कांग्रेस नामों का ऐलान नहीं कर सकी है। इसकी वजह यह भी मानी जा रही है कि आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन अब तक फाइनल नहीं हो सका है। राज्य में गुरुवार से नामांकन की शुरुआत हो चुकी है और 12 सितंबर आखिरी तारीख है। ऐसे में कांग्रेस की ओर से उम्मीदवारों के नाम घोषित किया न जाना चिंता की बात है। कई नेताओं की धुकधुकी भी बढ़ चुकी है क्योंकि उन्हें लगता है कि टिकट का भरोसा मिलने पर ही प्रचार तेज किया जाए।
आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर भी कांग्रेस में मतभेद की स्थिति है। राहुल गांधी के सुझाव के बाद एक वर्ग गठबंधन के लिए उत्साहित है, लेकिन भूपिंदर सिंह हुड्डा गुट इसे लेकर नाखुश है। उसने अपनी राय वरिष्ठ नेताओं के सामने भी जाहिर कर दी है। लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच गठबंधन हुआ था। तब आम आदमी पार्टी को कुरुक्षेत्र की लोकसभा सीट ऑफर की गई थी, लेकिन उसे हार ही मिली थी। AAP के सुशील गुप्ता को भाजपा के नवीन जिंदल के मुकाबले करारी हार मिली थी। कहा जा रहा है कि तब भी भूपिंदर सिंह हुड्डा इसके लिए तैयार नहीं थे।
अब भूपिंदर सिंह हुड्डा गुट का कहना है कि कांग्रेस अकेले ही जीत हासिल कर सकती है। ऐसी स्थिति में आम आदमी पार्टी को साथ लेने से एक तरफ यह मेसेज जाएगा कि कांग्रेस खुद को कमजोर मान रही है। इसके अलावा कुछ ऐसी सीटों पर कांग्रेस के नेताओं में नाराजगी का खतरा है, जहां वे खुद को मजबूत मान रहे हैं और चुनाव के लिए दावेदारी कर रहे हैं। हुड्डा लोकसभा चुनाव के बाद से ही लगातार कह रहे हैं कि हम अकेले ही चुनाव में उतर सकते हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस की संभावनाएं बेहद मजबूत हैं और ऐसी स्थिति है कि 90 सीटों के लिए ढाई हजार आवेदन आए हैं।
भूपिंदर हुड्डा गुट का सवाल है कि जब हर सीट पर अच्छा माहौल है और इतने ज्यादा आवेदन आ रहे हैं तो फिर AAP के साथ जाने की क्या जरूरत है। इससे आखिर कांग्रेस को क्या फायदा होगा? नेताओं ने कहा कि इस गठबंधन से तो सिर्फ आम आदमी पार्टी को ही लाभ होगा। इसके अलावा एक खतरा यह भी है कि आम आदमी पार्टी को मिली सारी सीटें हारने का भी खतरा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आम आदमी पार्टी को 2019 के आम चुनाव में हरियाणा में महज 0.36 फीसदी वोट मिले थे।