चीन को घेरने के लिए जापान ने चली नई चाल, इंडोनेशिया क्यों पहुंचे जापानी पीएम, क्या मिलेगी कामयाबी?

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जापान और इंडोनेशिया ने आर्थिक और रक्षा संबंधों को गहराने का संकल्प लिया। जापानी प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने खाद्य आत्मनिर्भरता, समुद्री सुरक्षा, और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का वादा किया। चीन के प्रभाव को कम करने के लिए जापान ऐसा कर रहा है। आइए समझें…

चीन को घेरने के लिए जापान ने चली नई चाल, इंडोनेशिया क्यों पहुंचे जापानी पीएम?

हाइलाइट्स

  • जापान के प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया की यात्रा की
  • चीन के प्रभाव को कम करने के लिए उन्होंने यह यात्रा की
  • आइए समझें कि इस यात्रा का क्या असर हो सकता है

जकार्ता: जापान और इंडोनेशिया ने आर्थिक और रक्षा संबंधों को गहरा करने का वादा किया है। दुनिया इसे चीन को घेरने की कोशिश के तौर पर देख रही है। यह घोषणा तब हुई है जब हाल ही में जापानी प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने इंडोनेशिया की यात्रा की थी। शुक्रवार को शिगेरू इशिबा इंडोनेशिया पहुंचे थे। यहां आने से पहले उन्होंने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात की थी। दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए यह यात्रा की गई है। यात्रा ऐसे समय में की गई है जब इस बात को लेकर चिंता बढ़ी है कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद क्षेत्र में अमेरिकी नेवी की उपस्थिति में संभावित कमी आएगी।

इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबवो सुबिआंतो ने जापानी पीएम के साथ द्विपक्षीय मीटिंग में हिस्सा लिया। मीटिंग के दौरान इशिबा ने इंडोनेशिया की खाद्य और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने में मदद का वादा किया। इसके अलावा जापान ने इंडोनेशिया के स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन प्रदान करने की प्रतिबद्धता जताई। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इशिबा ने इंडोनेशिया को आश्वासन दिया कि जापान उसे आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) का सदस्य बनने में मदद करेगा।

चीन के खिलाफ जाएगा इंडोनेशिया?
शिगेरु इशिबा ने कहा है कि उनका देश इंडोनेशिया को उसकी समुद्री सुरक्षा के लिए हाईस्पीड पेट्रोलिंग नौकाएं देगा। ऐसी दो नौकाएं जापान की ओर से दिए जाने की उम्मीद है। हालांकि जरूरी नहीं है कि जापान के साथ मिलकर इंडोनेशिया चीन को घेरे। क्योंकि पिछले साल ही नवंबर में इंडोनेशिया और चीन के बीच 10 अरब डॉलर की डील हुई थी। अमेरिकी एक्सपर्ट्स ने तब इसे लेकर चिंता जताई थी कि यह डील इंडोनेशिया की संप्रभुता को कमजोर कर सकता है। बल्कि अवैध मछली पकड़ने को भी बढ़ावा दे सकता है।

वॉइस ऑफ अमेरिका में छपी रिपोर्ट के मुताबिक समुद्री सुरक्षा अनुसंधान से जुड़े संस्थान बारा मैरिटिम की संस्थापक मेरिसा द्वि जुआनिता ने कहा था कि इंडोनेशिया को चीन की ओर से आर्थिक रूप से अधीन किया जा सकता है। संभावित रूप से दक्षिण चीन सागर में सैन्य शक्ति पैदा हो सकती है। प्रबोवो सुबिआंतो ने राष्ट्रपति बनने के बाद पहली यात्रा चीन की ही की थी।

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