बारामूला5 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
जम्मू कश्मीर के बारामूला में रिटायर्ड SSP शफी की हत्या के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है।
जम्मू-कश्मीर में एक और आतंकी हमला हुआ है। बारामूला के गेंटमुल्ला में रविवार (24 दिसंबर) को सुबह आतंकियों ने रिटायर्ड SSP मोहम्मद शफी की गोली मारकर हत्या कर दी है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक, मोहम्मद शफी मस्जिद में नमाज पढ़ रहे थे। इसी दौरान आतंकियों ने मस्जिद के अंदर घुसकर मोहम्मद शफी पर गोली चलाई। घटना के बाद शफी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।
CRPF इलाके की घेराबंदी करके जांच शुरू कर दी है। घटना को अंजाम देने वाले आतंकियों की भी तलाश शुरू हो गई है।

रिटायर्ड SSP मोहम्मद शफी पर आतंकियों ने मस्जिद में गोली मारी।
राजौरी में घात लगाकर हमला, 5 जवान शहीद हुए थे
कश्मीर के राजौरी जिले के सुरनकोट में गुरुवार (21 दिसंबर) को सेना के काफिले पर आतंकियों ने हमला किया था। इसमें 5 जवान शहीद हो गए थे।
थानामंडी-सुरनकोट रोड पर डेरा की गली नाम के इलाके में आतंकी घात लगाकर बैठे थे। दोपहर करीब तीन बजे सेना की एक मारुति जिप्सी और एक ट्रक जैसे की यहां से गुजर रही थी, आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी।
पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट (PAFF) ने हमले की जिम्मेदारी ली है। आतंकियों ने सोशल मीडिया पर हमले वाली जगह की तस्वीरें भी जारी कीं, जिसमें M-4 राइफल के इस्तेमाल का दावा किया गया है।
शहीद सैनिकों की पहचान नायक बीरेंद्र सिंह, नायक करण कुमार, राइफलमैन चंदन कुमार, राइफलमैन गौतम कुमार के रूप में हुई है। सेना ने पांचवें शहीद के नाम का खुलासा नहीं किया है। फिलहाल सर्च ऑपरेशन जारी है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की टीम भी मौके पर पहुंची थी।

डेरा की गली और बुफलियाज के एक अंधे मोड़ पर घात लगाए आतंकियों ने काफिले पर अमेरिकी एम-4 असॉल्ट राइफल से स्टील बुलेट फायर की थीं।
चार आतंकियों ने हमला किया था
राजौरी के हमले को चार आतंकियों ने अंजाम दिया था। आतंकियों ने अमेरिकी M-4 कार्बाइन असॉल्ट राइफल से स्टील बुलेट फायर की थीं। ये स्टील बुलेट सेना के वाहनों की मोटी लोहे की चादर को पार करते हुए जवानों को लगीं। इसमें पांच जवान शहीद हो गए। दो जवान घायल हैं, जिनकी हालत गंभीर है। सूत्रों के अनुसार, M-4 राइफल आतंकियों के पास पाकिस्तानी हैंडलरों से आई थी। ये राइफल उस जखीरे का हिस्सा है जो अमेरिकी सेना अफगानिस्तान से जाते समय वहां छोड़ गए थे।
