Supreme Court to hear Godhra train fire case on February 13 | गोधरा-ट्रेन अग्निकांड में 13 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में आग लगने से 59 लोग मारे गए थे – Gujarat News

सुप्रीम कोर्ट गुजरात के गोधरा ट्रेन अग्निकांड मामले में आगामी 13 फरवरी को सुनवाई करेगा। गौरतलब है कि इस मामले में गुजरात सरकार ने याचिका लगाई थी। 27 फरवरी, 2002 को गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में आग लगने से 59 लोग मारे गए थे, जि

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह 2002 के गोधरा ट्रेन अग्निकांड मामले में गुजरात सरकार और कई अन्य दोषियों की तरफ से दायर अपीलों पर 13 फरवरी को सुनवाई करेगा। वहीं इस मामले में जस्टिस जेके माहेश्वरी और अरविंद कुमार की पीठ ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई की तारीख पर मामले में कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा।

2011 में SIT कोर्ट ने 11 दोषियों को फांसी और 20 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

गोधरा कांड के 31 दोषियों को उम्रकैद गोधरा कांड के बाद चले मुकदमों में करीब 9 साल बाद 31 लोगों को दोषी ठहराया गया था। 2011 में SIT कोर्ट ने 11 दोषियों को फांसी और 20 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में अक्टूबर 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने 11 दोषियों की फांसी की सजा को भी उम्रकैद में बदल दिया था।

दोषियों के लिए मौत की सजा मांगेगी गुजरात सरकार दरअसल, गुजरात उच्च न्यायालय के अक्तूबर 2017 के फैसले को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में कई अपीलें दायर की गई हैं, जिसमें कई दोषियों की दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया था और 11 लोगों की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था। गुजरात सरकार ने फरवरी 2023 में शीर्ष अदालत से कहा था कि वह उन 11 दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग करेगी, जिनकी सजा को उच्च न्यायालय ने आजीवन कारावास में बदल दिया था।

शीर्ष अदालत ने 11 लोगों की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था।

शीर्ष अदालत ने 11 लोगों की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था।

गोधरा कांड के बाद गुजरात में भड़के थे दंगे गोधरा कांड के बाद पूरे गुजरात में दंगे भड़क उठे। इन दंगों में एक हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे, जिनमें 790 मुसलमान और 254 हिंदू थे। गोधरा कांड के एक दिन बाद 28 फरवरी को अहमदाबाद की गुलबर्ग हाउसिंग सोसायटी में बेकाबू भीड़ ने 69 लोगों की हत्या कर दी थी। मरने वालों में उसी सोसाइटी में रहने वाले कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी भी शामिल थे। इन दंगों से राज्य में हालात इस कदर बिगड़ गए कि स्थिति काबू में करने के लिए तीसरे दिन सेना उतारनी पड़ी।

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