PM मोदी के यूक्रेन दौरे से पहले आनन-फानन में चेचन्या क्यों पहुंचे पुतिन, 13 साल में पहली बार मुस्लिम गणराज्य का दौरा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 अगस्त को एक दिन के दौरे पर यूक्रेन जाने वाले हैं लेकिन उससे ठीक पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मुस्लिम गणराज्य चेचन्या का दौरा किया है। मंगलवार को पुतिन का स्वागत चेचन्या के स्वयंभू दबंग नेता कमांडर रमजान कादिरोव ने किया। उनके साथ पुतिन ने वहां विशेष बल अकादमी का दौरा किया और यूक्रेन में तैनात होने से पहले वहां प्रशिक्षण ले रहे स्वयंसेवी लड़ाकों से बातचीत की। इस अकादमी का नाम पुतिन के ही नाम पर रखा या है।

पुतिन का चेचन्या दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब यू्क्रेन आक्रामक रुख अख्तियार किए हुए है और कुर्स्क इलाके में लगातार घुसपैठ कर रहा है। यूक्रेनी सेना कुर्स्क में 1000 किलोमीटर से भी अंदर तक घुस चुकी है और कई शहरों पर कब्जा कर चुकी है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद रूस पर इतना बड़ा आक्रमण पहली बार हुआ है। इससे यूक्रेन की सेना और जनता में जोश जाग उठा है।

दूसरी तरफ रूसी सेना भी यूक्रेन के कई इलाकों में बम बरसा रही है और लगातार आगे बढ़ती जा रही है लेकिन रूस के कुर्स्क क्षेत्र में कीव के आक्रमण से युद्ध की दिशा बदल रही है और यूक्रेन की युद्ध से थकी हुई जनता का मनोबल बढ़ रहा है। हालांकि, इस आक्रमण के अंतिम परिणाम की भविष्यवाणी करना अभी संभव नहीं है। रूस की सरकारी एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन ने इन स्वयंसेवी लड़ाकों की प्रशंसा की और कहा कि जब तक रूस के पास उनके जैसे लोग हैं, तब तक उसे ‘‘कोई हरा नहीं’’ सकता।

कादिरोव ने अपने आधिकारिक ‘टेलीग्राम’ चैनल पर एक पोस्ट में कहा कि मॉस्को द्वारा यूक्रेन में अपना ‘‘विशेष सैन्य अभियान’’ शुरू किए जाने के बाद से स्वयंसेवकों सहित 47,000 से अधिक लड़ाके इस केंद्र में प्रशिक्षण ले चुके हैं। चेचन्या के लड़ाके यूक्रेन के साथ संघर्ष में दोनों पक्षों की ओर से लड़ रहे हैं। तत्कालीन सोवियत संघ के पतन के बाद स्वतंत्रता समर्थक लड़ाकों का रूसी सरकारी बलों के साथ कई वर्षों तक युद्ध चला।

दिवंगत चेचन नेता जोखर दुदायेव के प्रति वफादार कीव समर्थक स्वयंसेवक पुतिन और कादिरोव का समर्थन करने वाली चेचन सेना के कट्टर दुश्मन हैं। जोखर दुदायेव आजादी समर्थक नेता थे। पुतिन मंगलवार को कादिरोव के पिता एवं पूर्व चेचन नेता अखमत कादिरोव की कब्र, एक कमांड पोस्ट और स्थानीय राजधानी ग्रोज्नी की एक मस्जिद में भी गए।

बता दें कि कादिरोव को चेचन्या के भीतर मानव अधिकारों के कई घोर उल्लंघनों के आरोप में अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा 2020 में प्रतिबंधित किया जा चुका है। कादिरोव पहले ही कह चुके हैं कि उन्होंने यूक्रेन में लड़ने के लिए अपने हजारों सैनिकों को तैनात कर रखा है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच मंगलवार को हुई चर्चा में इन लड़ाकों की कुर्स्क क्षेत्र में तैनाती पर चर्चा हुई है क्योंकि रूस उस मोर्चे पर कमजोर है और स्थिति को और बिगड़ने नहीं दे सकता।

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