Nawaz said-Pakistan broke the agreement between me and Vajpayee | नवाज बोले-पाकिस्तान ने मेरे-वाजपेयी के बीच हुआ समझौता तोड़ा: ये हमारी गलती थी; 1999 में लाहौर एग्रीमेंट के 2 महीने बाद कारगिल वॉर हुआ था

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नई दिल्ली/इस्लामाबाद7 घंटे पहले

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ये फोटो 20 फरवरी 1999 की है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तब भारत के पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को रिसीव करने वाघा बॉर्डर गए थे।

पाक के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ (74) ने मंगलवार 28 मई को कहा कि पाकिस्तान ने मेरे और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी के बीच 1999 में हुआ समझौता तोड़ा।

शरीफ ने अपनी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) की मीटिंग में कहा कि 28 मई 1998 में पाकिस्तान ने 5 परमाणु परीक्षण किए थे। इसके बाद वाजपेयी साहब पाकिस्तान आए थे और हमने एक समझौता किया था, लेकिन इसका उल्लंघन किया गया। ये हमारी गलती थी।

शरीफ और वाजपेयी ने 21 फरवरी 1999 को लाहौर डिक्लेरेशन (लाहौर समझौते) पर साइन किए थे। इस एग्रीमेंट में भारत और पाकिस्तान शांति और स्थायित्व की बात कही गई थी। समझौते को बड़ा कदम माना गया था। इसके कुछ महीनों बाद ही पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के कारगिल में घुसपैठ की, जिससे कारगिल जंग हुई।

लाहौर समझौते में क्या था
यह दो पड़ोसियों के बीच एक शांति समझौता है, जिसमें शांति और सुरक्षा बनाए रखने और दोनों देशों के बीच पीपल-टु-पीपल कॉन्टैक्ट को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया था। हालांकि, शरीफ के मुताबिक, पाकिस्तान ने कुछ ही समय बाद कारगिल में घुसपैठ कर इसका उल्लंघन किया था। पाकिस्तानी सेना की इसी घुसपैठ की वजह से कारगिल जंग हुई थी।

कारगिल युद्ध के समय शरीफ प्रधानमंत्री थे, मुशर्रफ आर्मी चीफ
पाकिस्तान के तब आर्मी चीफ रहे परवेज मुशर्रफ ने अपनी सेना को खुफिया तरीके से मार्च 1999 में जम्मू कश्मीर के कारगिल जिले में घुसपैठ का आदेश दिया था। भारत को जब इस घुसपैठ का पता चला तो बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ गया। नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री रहते भारत ने युद्ध जीत लिया था।

3 मई से 26 जुलाई 1999 तक कारगिल युद्ध चला था। पाकिस्तानी सेना और आतंकियों ने नियंत्रण रेखा पार कर भारत की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी। भारत ने पाकिस्तान के मंसूबों को नाकाम कर दिया था।

3 मई से 26 जुलाई 1999 तक कारगिल युद्ध चला था। पाकिस्तानी सेना और आतंकियों ने नियंत्रण रेखा पार कर भारत की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी। भारत ने पाकिस्तान के मंसूबों को नाकाम कर दिया था।

एटॉमिक टेस्ट रोकने के लिए अमेरिका ने 5 अरब डॉलर के पेशकश की थी
नवाज ने ये भी कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने पाकिस्तान को परमाणु परीक्षण करने से रोकने के लिए पांच अरब अमेरिकी डॉलर की पेशकश की थी, लेकिन मैंने इनकार कर दिया। अगर इमरान जैसे लोग मेरी जगह होते तो उन्होंने क्लिंटन का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया होता।

पाकिस्तान के तीन बार पीएम रहे थे नवाज
शरीफ ने 2017 में प्रधानमंत्री पद छोड़ने पर भी बात की। नवाज ने कहा कि तब पाकिस्तान के चीफ जस्टिस रहे साकिब निसार ने मुझ पर गलत केस किया था। मेरे खिलाफ किए गए हर केस गलत थे, जबकि इमरान खान के खिलाफ किए गए केस सही थे।

शरीफ ने बताया कि ISI के पूर्व प्रमुख जहीरुल इस्लाम ने मुझे बेदखल कर इमरान को सत्ता में बैठा दिया। जब मैंने इमरान से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि ISI का इसमें कोई हाथ नहीं।

शरीफ के मुताबिक, मुझे 2014 में इस्लाम की तरफ से मैसेज मिला कि पद से हट जाऊं, लेकिन मैंने इनकार कर दिया। इस पर इस्लाम ने धमकी दी कि वे मेरे लिए एग्जाम्पल सेट करेंगे।

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