Mumbai Robbery Case; Marathi Writer Narayan Surve | मुंबई में चोर ने चोरी का सामान लौटाया: पता चला प्रसिद्ध कवि का था घर तो पछतावा हुआ, नोट छोड़कर मांगी माफी

मुंबई14 मिनट पहले

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नारायण सुर्वे प्रसिद्ध मराठी कवि और सामाजिक कार्यकर्ता थे। उन्हीं के घर पर चोरी हुई थी।

मुंबई से चोरी का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां चोरी करने के बाद जब एक चोर को पता चला कि उसने एक प्रसिद्ध कवि के घर से समाना चुराया है तो उसने कीमती सामान लौटा दिया।

मुंबई पुलिस ने मंगलवार (16 जुलाई) को बताया कि चोर ने रायगढ़ जिले के नेरल में स्थित नारायण सुर्वे के घर से LED समेत कीमती सामान चुराया था। नारायण सुर्वे प्रसिद्ध मराठी कवि और सामाजिक कार्यकर्ता थे।

सुर्वे के निधन के बाद से उनकी बेटी सुजाता और उनके पति गणेश घारे अब इस घर में रहते हैं। हाल में वे अपने बेटे के पास विरार गए थे और उनका घर 10 दिनों से बंद था। उनकी गैर-मौजूदगी में चोर घर में घुसा और LED टीवी समेत कीमती सामान चुराकर ले गया।

उस्मान अली, मेरे शब्द, माफ कीजिए मराठी कवि सुर्वे की प्रमुख कविताओं में से शामिल हैं।

उस्मान अली, मेरे शब्द, माफ कीजिए मराठी कवि सुर्वे की प्रमुख कविताओं में से शामिल हैं।

अगले दिन चोर जब कुछ और सामान चुराने आया तो उसने एक कमरे में नारायण सुर्वे की तस्वीर और उनसे जुड़ी यादगार चीजें देखीं। तब चोर को पता चला कि यह मशहूर कवि का घर है। इसके बाद चोर को पछतावा हुआ और उसने जो भी सामान उठाया था, उसे वापस रख दिया।

चोर ने मांगी माफी
चोर ने दीवार पर एक छोटा सा नोट चिपका दिया, जिसमें उसने महान साहित्यकार के घर से चोरी करने के लिए मालिक से माफी मांगी। नेरल थाने के पुलिस इंस्पेक्टर शिवाजी धवले ने बताया कि सुजाता और उनके पति जब रविवार (14 जुलाई) को विरार से घर लौटे तो उन्हें यह नोट मिला। पुलिस TV सेट और अन्य चीजों से मिले फिंगर प्रिंट के आधार पर आगे की जांच कर रही है।

संघर्ष में बीता सुर्वे का बचपन
मुंबई में जन्मे सुर्वे की कविता और लेखों में शहरी मजदूर वर्ग के संघर्षों का चित्रण देखने को मिलता है। 84 साल की उम्र में 16 अगस्त 2010 को उनका निधन हो गया था। सुर्वे ने प्रसिद्ध मराठी कवि बनने से पहले जिंदगी एक अनाथ के रूप में मुंबई की गलियों में गुजारी थी। इसके बाद उन्होंने हाउस हेल्पर, होटल में डिशवॉशर, दाई, पालतू कुत्ते की देखभाल करने वाला, दूध वाला, कुली और एक मजदूर के तौर में काम किया। उस्मान अली, मेरे शब्द, लेनिन, एक नए घमासान में, दबाव नहीं डालें आप, माफ कीजिए, रायटर्स पार्क, पोस्टर उनकी प्रमुख कविताओं में से शामिल हैं।

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