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- Kolkata Rape Murder Case; Doctors Protest Vs CBI Probe | RG Kar Hospital
कोलकाता40 मिनट पहले
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डॉक्टरों ने 14 दिसंबर को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित CBI ऑफिस तक मार्च निकाला था।
पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित आरजी कर हॉस्पिटल में ट्रेनी डॉक्टर से रेप-मर्डर केस में दो आरोपियों को जमानत मिलने से डॉक्टर्स गुस्से में हैं। वेस्ट बंगाल जॉइंट प्लेटफॉर्म ऑफ डॉक्टर्स (WBJPD) सीबीआई जांच को लेकर मंगलवार, यानी 17 दिसंबर से कोलकाता में 10 दिन का धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे।
पांच एसोसिएशन से बना WBJPD का धरना 26 दिसंबर तक डोरेना क्रॉसिंग पर किया जाएगा। WBJPD ने सीबीआई से सप्लिमेंट्री चार्जशीट दायर करने की मांग की है और कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा से धरने की परमिशन मांगी है।
सियालदह कोर्ट ने 13 दिसंबर को आरोपी पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और ताला थाने के पूर्व इंचार्ज अभिजीत मंडल को जमानत दी थी। CBI 90 दिनों के तय समय में चार्जशीट फाइल नहीं कर पाई थी, इसलिए दोनों को बेल दी गई। घोष पर सबूतों से छेड़छाड़ और मंडल पर देरी से FIR दर्ज करने का आरोप है।

संदीप घोष अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे, उन्हें फाइनेंशियल फ्रॉड केस में जमानत नहीं मिली है।
आरजी कर ट्रेनी डॉक्टर रेप-मर्डर केस, 3 पॉइंट्स में
- आरजी कर हॉस्पिटल की इमरजेंसी बिल्डिंग के सेमिनार हॉल में 9 अगस्त की सुबह 31 साल की ट्रेनी डॉक्टर का शव मिला था। वह नाइट ड्यूटी पर थी। डॉक्टर के प्राइवेट पार्ट, आंखों और मुंह से खून बह रहा था। उसकी गर्दन की हड्डी भी टूटी हुई पाई गई थी।
- डॉक्टर की बॉडी के पास एक हेडफोन मिला था। पुलिस ने इस केस में कोलकाता पुलिस में काम करने वाले सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को 10 अगस्त को गिरफ्तार किया था। CCTV कैमरे में संजय इमरजेंसी बिल्डिंग में घुसते हुए दिखा था। तब उसके गले में हेडफोन था। हालांकि, बिल्डिंग से बाहर निकलते समय उसके गले में हेडफोन नहीं था।
- शुरुआत में हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने घटना को सुसाइड बताने की कोशिश की। इसमें प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष की भूमिका संदिग्ध थी। हॉस्पिटल में वित्तीय गड़बड़ी और करप्शन के आरोप में CBI ने संदीप घोष के अलावा डॉ. देबाशीष सोम और डॉ. सुजाता घोष को गिरफ्तार कर लिया। सितंबर में संदीप घोष का पॉलीग्राफ टेस्ट भी किया गया था।

डॉक्टर्स ने अपनी मांगों के लिए अनशन किया
- जूनियर डॉक्टरों ने रेप-मर्डर घटना के खिलाफ 10 अगस्त से 21 सितंबर तक 42 दिन तक हड़ताल की थी। डॉक्टरों ने सरकार के सामने पहले 5 मांगें रखी थीं। इनमें से सरकार ने 3 मांगें मान लीं। CM ममता ने दो अन्य मांगों और शर्तों पर विचार करने का आश्वासन दिया था।
- इसके बाद डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म कर दी थी। वे अस्पतालों में काम पर लौट गए थे। 27 सितंबर को सागोर दत्ता हॉस्पिटल में 3 डॉक्टरों और 3 नर्सों से पिटाई का मामला सामने आया, जिससे नाराज होकर डॉक्टरों ने 1 अक्टूबर को फिर से हड़ताल शुरू कर दी।
- 5 अक्टूबर से जूनियर डॉक्टरों ने अपनी 9 मांगों को लेकर आमरण अनशन किया था। अनशन कर रहे जूनियर डॉक्टर्स के समर्थन में आरजी कर मेडिकल कॉलेज में 50 सीनियर डॉक्टर्स ने रिजाइन दिया था।

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