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कश्मीर48 मिनट पहले
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मनोज सिन्हा 7 अगस्त 2020 से जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल हैं। (फाइल)
जम्मू-कश्मीर यूनियन टैरेटरी के 5वें स्थापना दिवस पर गुरुवार को श्रीनगर में ऑफिशियल इवेंट आयोजित किया गया था, जिसमें सत्ताधारी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के विधायकों ने बहिष्कार किया।
कांग्रेस और NC ने कहा कि वे जम्मू-कश्मीर को यूनियन टैरेटरी नहीं मानते हैं। जम्मू-कश्मीर को जल्द से जल्द स्टेटहुड मिलना चाहिए। इसे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा दोनों पार्टियों का दोहरा चरित्र बताया है।
एलजी ने कहा कि कांग्रेस और NC के नेताओं ने जम्मू-कश्मीर UT के विधायकों के रूप में संविधान की शपथ ली है। फिर वे ऑफिशियल इवेंट का बहिष्कार कैसे कर सकते हैं। एक तरफ वे शपथ लेकर विधायक बने, दूसरी तरफ आधिकारिक कार्यक्रम का बहिष्कार कर रहे हैं। यह इनका दोहरा चरित्र दर्शाता है।
दरअसल, 2019 में अनुच्छेद 370 और 35A हटाते समय जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए थे। सरकार ने उस समय ही राज्य के हालात सामान्य होने पर पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का भरोसा दिया था। हालिया राज्य विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने इसे दोहराया था।

स्थापना दिवस के बहिष्कार पर 3 नेताओं के बयान
- CM उमर अब्दुल्ला: जम्मू-कश्मीर लंबे समय तक केंद्र शासित प्रदेश नहीं रहेगा। हम अपना राज्य का दर्जा वापस लेंगे। हम बिजली,सड़क, पानी और रोजगार की जरूरतों को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं। अगर हमारी पहचान कुछ नहीं है, तो इन विकास कार्यों का कोई मतलब नहीं है।
- पूर्व CM महबूबा मुफ्ती: यह स्थापना दिवस नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लिए काला दिवस है। यह विकास का नहीं, बल्कि अधिकारों से दूर रखने की निशानी है। यह तब तक काला दिवस ही रहेगा जब तक राज्य का दर्जा नहीं मिल जाता।
- कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष तारीक कर्रा: जम्मू-कश्मीर में कोई भी संवेदनशील व्यक्ति, जो केंद्र शासित प्रदेश और राज्य के बीच का अंतर समझता है, वह कभी भी इस दिन को नहीं मनाएगा। कांग्रेस ने कभी भी अपने दिल में जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में मान्यता नहीं दी और हम राज्य के दर्जे के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
स्टेटहुड का प्रस्ताव उमर कैबिनेट से पास, LG ने भी मंजूरी दी

उमर अब्दुल्ला सरकार ने 17 अक्टूबर को अपनी पहली कैबिनेट मीटिंग में ही जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिए जाने का प्रस्ताव पास किया था।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 23 अक्टूबर को गृह मंत्री अमित शाह और 24 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस दौरान उमर ने पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का आग्रह किया था। उन्हें इसी साल राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन मिला था।
चुनाव के बाद गठित सरकार की पहली कैबिनेट मीटिंग में राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव पास करके उप-राज्यपाल (LG) को भेजा गया था। LG मनोज सिन्हा ने 19 अक्टूबर को प्रस्ताव मंजूर करने के बाद गृह मंत्रालय को भेज दिया था।
जम्मू-कश्मीर को राज्य के दर्जे की कानूनी प्रक्रिया… 2 पॉइंट
- जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुर्नगठित किया गया था। इसलिए पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए संसद में एक कानून पारित कर पुनर्गठन अधिनियम में बदलाव करना होगा। यह बदलाव संविधान की धारा 3 और 4 के तहत होंगे।
- राज्य का दर्जा देने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में नए कानूनी बदलावों का अनुमोदन जरूरी होगा, यानी संसद से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलना जरूरी है। मंजूरी के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी के बाद जिस दिन राष्ट्रपति इस कानूनी बदलाव की अधिसूचना जारी करेंगे, उसी तारीख से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा।
पूर्ण राज्य के दर्जे के बाद जम्मू-कश्मीर में क्या-क्या बदलेगा?
- पुलिस और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य सरकार के पास आ जाएगी। सरकार का पुलिस पर सीधा नियंत्रण होगा।
- भूमि, राजस्व और पुलिस से जुड़े मामलों पर कानून बनाने का अधिकार भी राज्य सरकार को मिल जाएगा।
- सरकार चलाने में तब राज्यपाल का दखल नहीं होगा।
- वित्तीय मदद के लिए केंद्र पर निर्भरता खत्म होगी। वित्त आयोग से वित्तीय सहायता मिलेगी।
- राज्य की विधानसभा को पब्लिक ऑर्डर यानी सार्वजनिक व्यवस्था और समवर्ती सूची के मामलों में कानून बनाने के अधिकार मिलेंगे।
- सरकार कोई वित्तीय बिल पेश करती है तो इसके लिए उसे राज्यपाल की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी।
- एंटी करप्शन ब्यूरो और अखिल भारतीय सेवाओं पर राज्य सरकार का पूरा नियंत्रण हो जाएगा। यानी राज्य में अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग राज्य सरकार के हिसाब से होंगे, उस पर उपराज्यपाल का नियंत्रण नहीं रहेगा।
- अनुच्छेद 286, 287, 288 और 304 में बदलाव से व्यापार, टैक्स और वाणिज्य के मामलों में राज्य सरकार को सभी अधिकार हासिल हो जाएंगे।
- केंद्र शासित प्रदेश में विधायकों की संख्या के 10% मंत्री बनाए जा सकते हैं, राज्य का दर्जा बहाल होने से मंत्रियों की संख्या का यह बंधन भी खत्म हो जाएगा और विधायकों की संख्या के 15% तक विधायक मंत्री बनाए जा सकेंगे।
- इसके अलावा जेल के कैदियों की रिहाई और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बाकी चुनावी वादे पूरे करने वाली योजनाओं को पूरा करने में राज्य सरकार को केंद्र से ज्यादा अधिकार हासिल होंगे।

उमर अब्दुल्ला ने 16 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। ये फोटो उसी दिन की है।
स्टेटहुड का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा जम्मू-कश्मीर को स्टेटहुड दिलाने की मांग की याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी लगी है। जम्मू-कश्मीर UT को दो महीने में पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को तैयार हो गया। एडवोकेट गोपाल शंकर नारायण ने जहूर अहमद भट और खुर्शीद अहमद मलिक की ओर से यह याचिका लगाई है। CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि वे इस पर सुनवाई करेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
सितंबर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद राज्य में पहला विधानसभा चुनाव हुआ अनुच्छेद 370 हटने के बाद पिछले महीन राज्य में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए थे। तीन फेज में हुए चुनाव का रिजल्ट 8 अक्टूबर को आया था। इसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। पार्टी को 42 सीटें मिली थीं। NC की सहयोगी कांग्रेस को 6 और CPI(M) ने एक सीट जीती थी।
भाजपा 29 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। वहीं, 2014 के विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनी PDP को सिर्फ 3 सीट मिलीं। पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती भी बिजबेहरा सीट से हार गईं। पिछले चुनाव में पार्टी ने 28 सीटें जीती थीं।

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जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन एक्ट, 2019 में बदलाव करना होगा। संसद से इसकी मंजूरी मिलने इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी के बाद जिस दिन राष्ट्रपति इस कानूनी बदलाव की अधिसूचना जारी करेंगे, उसी तारीख से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
उमर की शपथ के बाद कांग्रेस ने कहा था- पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने तक लड़ाई जारी रहेगी

उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने 16 अक्टूबर को शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में उमर अब्दुल्ला को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी।
उमर अब्दुल्ला ने 16 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस सरकार में शामिल नहीं हुई। कांग्रेस ने सरकार को बाहर से समर्थन दिया। पार्टी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलने तक उसकी लड़ाई जारी रहेगी। पूरी खबर पढ़ें…
