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नई दिल्ली: जहां बीते बुधवार को पाकिस्तान (Pakistan) के दक्षिण-पश्चिम में बलूचिस्तान पर आतंकियों के ठिकानों पर ईरान (Iran) ने मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। वहीं इसके बाद पाकिस्तान ने भी पलटवार करते हुए ईरान में मौजूद बलूच आतंकियों के ठिकानों पर हमले करने का दावा किया है।
दरअसल आज पाकिस्तान ने भी फाइटर जेट्स और मिसाइलों के जरिए बलूच आतंकियों के अड्डों को निशाना बनाया। ऐसे में अब ईरान अपनी सेनाओं को पाकिस्तान से सटी सीमा की तरफ भेजना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान ने भी अब ऐसे ही तैयारी शुरू कर दी है। तो क्या यह मान लिया जाए की दोनों देशों के बीच जंग शुरू हो गई है?
ऐसे में आइए जानते हैं कि इन दोनों की सैन्य शक्ति कितनी ताकतवर है और कौन किससे बेहतर है?
अगर Global Firepower की मिलिट्री स्ट्रेंथ इंडेक्स की नई लिस्ट के मुताबिक पाकिस्तान दुनिया की दस सबसे ताकतवर मिलिट्री वाले देशों में 9 नंबर पर है। जबकि ईरान का इसमें 14वें स्थान है।

सैन्य शक्ति में पाक, इरान से आगे
यह तो बनी बात है कि, पाकिस्तान अपनी आर्मी और पैरामिलिट्री हर मामले में ईरान से बेहतर दीखता है। पाकिस्तान के पास मौजूद मैनपावर 10.64 करोड़ है। जबकि ईरान के पास सिर्फ 4.90 करोड़ है। वहीं पाकिस्तान के पास सर्विस के लिए फिट 8.42 करोड़ लोग हैं। ईरान के पास यहां सिर्फ 4.11 करोड़ हैं। अगर पाकिस्तान के पास 6.54 लाख एक्टिव पर्सनल हैं, तो वहीं ईरान के पास 6.10 लाख हैं। पाकिस्तान के पास रिजर्व सैनिकों की संख्या 5.50 लाख है, जबकि ईरान के पास 3.50 लाख। पाकिस्तान के पास 5 लाख की पैरामिलिट्री फोर्स है, जबकि ईरान के पास सिर्फ 2.20 लाख

एयरफोर्स में पाकिस्तान आगे
अगर पाकिस्तान के पास कुल 1434 एयरक्राफ्ट हैं, तो ईरान के पास 551 एयरक्राफ्ट। पाकिस्तान के पास 387 फाइटर एयरक्राफ्ट हैं, जबकि इसके उलट ईरान के पास सिर्फ 186 हैं। वहीं अटैक एयरक्राफ्ट भी पाकिस्तान के पास 90 तो ईरान के पास सिर्फ 23 हैं। पाकिस्तान के पास अगर 60 ट्रांसपोर्ट प्लेन हैं, तो ईरान के पास 86 प्लेन का जखीरा। यहां ईरान आगे है। पाकिस्तान के पास 549 ट्रेनर विमान हैं, जबकि ईरान के पास 102 विमान। अगर जंग हुई तो इनका इस्तेमाल भी इमरजेंसी में हो सकता है।

यहां ईरान आगे
नौसेना शक्ति की बात करें तो पाकिस्तान की कुल नौसैनिक फ्लीट 114 है, जबकि ईरान की पास 101। हालांकि इसमें सारे जंगी जहाज और पनडुब्बियां शामिल हैं। लेकिन पाकिस्तान के पास 8 पनडुब्बियां हैं, जबकि ईरान के पास उससे कहीं ज्यादा 19 सबमरीन मौजूद हैं। पाकिस्तान के पास 2 डेस्ट्रॉयर्स हैं, जबकि ईरान के पास एक भी नहीं। पाकिस्तान के पास 9 फ्रिगेट्स हैं, ईरान के पास 7 फ्रिगेट्स। पाकिस्तान के पास 7 कॉर्वेट्स हैं, वहीं ईरान के पास 3। पैट्रोल वेसल भी पाकिस्तान के पास 69 है, ईरान के पास सिर्फ 21 वेसल।

अगर लॉजिस्टिक सपोर्ट के बवाट करें तो पाकिस्तान के पास 151 हवाई अड्डे हैं। जबकि ईरान के पास इससे दोगुने ज्यादा, यानी 319 हवाई अड्डे। पाकिस्तान के पास मर्चेंट जहाज 58 हैं, तो ईरान के पास कई गुना ज्यादा यानी 942 जहाज। पाकिस्तान के पास सिर्फ दो बंदरगाह हैं, जबकि ईरान के पास 4 बंदरगाह। ये ख़ास चीजें हीं जंग के दौरान बैकअप सपोर्ट का जबरदस्त काम करती हैं।

क्या जंग ही है रास्ता
देखा जाए तो ईरान, इराक़ से सटी अपनी पश्चिमी सीमा पर लगातार मुश्किलों का सामना कर रहा है, वहीं पाकिस्तान के लिए भी अपनी पूर्वी सीमा पर चुनौतियां कम नहीं होती दिख रही हैं। पाकिस्तान के पूरब की तरफ़ की सीमा भारत से सटती है। जिससे उसका नर्म-गर्म रिश्ता जग जाहिर है।ऐसे में सिस्तान और बलूचिस्तान इलाक़े में सीमा पर तनाव जारी रहने के बावजूद पाकिस्तान-ईरान दोनों ही रणनीतिक तौर पर तनाव बढ़ाने से बचने की ही कोशिश करते रहे हैं।
मुश्किलों में न आ जाए ईरान
लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है कि ईरान ने जिस वक़्त पाकिस्तान पर हमला किया उससे पहले उसने सीरिया और इराक़ पर भी मिसाइल हमले किए थे। इन हमलों के नतीजों का असर इस पूरे क्षेत्र में ईरान की भूमिका और उसकी कूटनीतिक कोशिशों पर पड़ सकता है।ख़ासकर पश्चिमी मुल्कों के साथ उसके रिश्तों को लेकर। जो अब यह मानते हैं कि ईरान इस क्षेत्र को “अस्थिर” करने की कोशिश कर रहा है।ऐसे में हो सकता है कि ईरान के लिए इन मुश्किलों का समाधान तलाशना अपने आप में ही एक चुनौती बन जाए। जिससे इरान एक बार फिर मुश्किलों में आ जाए।
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