Haryana Election
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साढ़े चार साल तक बिना शर्त समर्थन देकर प्रदेश की भाजपा सरकार और लोकसभा चुनाव से पहले पाला बदलकर विपक्ष की उम्मीदों को सहारा देने वाले निर्दलीय विधायक विधानसभा चुनाव में बेसहारा हो गए हैं। भाजपा ने किसी भी निर्दलीय विधायक को टिकट नहीं दिया। दोराहे पर फंसे पांच निर्दलीय विधायकों में से तीन फिर आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव में सात निर्दलीय जीते थे। रानियां से रणजीत चौटाला, पृथला से नयनपाल रावत, बादशाहपुर से राकेश दौलताबाद, दादरी से सोमबीर सांगवान, पूंडरी से रणधीर गोलन, नीलोखेड़ी से धर्मपाल गोंदर व महम से बलराज कुंडू। कुंडू को छोड़कर शेष छह विधायकों ने भाजपा को समर्थन देकर प्रदेश में दूसरी बार सरकार बनाने में मदद की।
भाजपा ने चौटाला को मंत्री व शेष को बोर्डों व निगमों का चेयरमैन बनाया। चाहे शराब घोटाले के आरोप हों या पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह के महिला कोच के यौन उत्पीड़न का मामला, विपक्ष के जोरदार हमलों के बाद भी निर्दलीय विधायकों ने सरकार का साथ नहीं छोड़ा।
साढ़े चार साल बाद लोकसभा चुनाव से पूर्व धर्मपाल गोंदर, रणधीर गोलन व सोमबीर कांग्रेस के पाले में चले गए। तीनों को अब कांग्रेस से टिकट की आस थी। लोकसभा चुनाव के दौरान ही राकेश दौलताबाद का निधन हो गया। रणजीत चौटाला ने भाजपा में शामिल होकर हिसार से लोकसभा चुनाव लड़ा, पर जीत नहीं मिली।
