Fought the 1971 war now this Muslim ex soldier is donating idols to temples sets an example of brotherhood – India Hindi News

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1971 का युद्ध लड़ने वाला एक मुस्लिम रिटायर्ड सैनिक अब तक कई मंदिरों को मूर्तियां दे चुका है। लक्षद्वीप की राजधानी कावारत्ती  के रहने वाले चेरियाकोया वैसे तो मुस्लिम हैं लेकिन वह बड़े शौक और श्रद्धा के साथ हिंदू मंदिरों के लिए मूर्तियां गढ़ते हैं। उनका कहना है कि यह काम करके उन्हें काफी सुकून और सुख मिलता है। वह कई सालों से मूर्तियां बनाने का काम कर रहे हैं। 

पूर्व सैनिक पीपी चेरियाकोया ने अंधरोथ द्वीप के लिे भगवान गणेश की मूर्ति बनाई थी। 1970 में मध्य प्रदेश स्पेशल फोर्स ने उनसे निवेदन किया था कि वह एक मूर्ति बनाकर दें। 79 साल के चेरियाकोया 1971 में बांग्लादेश का युद्ध भी लड़ चुके हैं। सेना से रिटायर होने के बाद वह मूर्ति बनाने का काम करने लगे। उनका कहना है कि उनके पिता मूर्ति बनाने का काम करते थे। इसलिए उन्हें यह आर्ट कहीं सीखनी नहीं पड़ी। उन्होंने अपने पिता से ही मूर्तिकला सीखी थी। 

एएनआई से बात करते हुए चेरियाकोया ने कहा, 1972 में मध्य प्रदेश स्पेशल फोर्स के जवान पूजा करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि एक हनुमान जी की मूर्ति की जरूरत है। मैंने यह काम खुशी खुशी किया। मुझे खुशी है कि उन्हें पूजा करने के लिए मूर्ति मिल गई। मैंने कवरत्ती से निवेदन मिलने के बाद भगवान गणेश की भी मूर्ति बनाई। उन्होने कहा, हमने ध्यान से मूर्तिकारी को देखकर ही यह कला सीखी है। मुझे पेंटिंग से ज्यादा मूर्तिकारी में मजा आता है। 

लक्षद्वीप में पोस्टेड स्पेशल सेक्रेटरी शैलेंद्र सिंह परिहार ने कहा कि चेरियाकोया ने सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे के लिए काम किया है। 1978 में कावारत्ती में केवल एक ही मंदिर था और यह मध्य प्रदेश पैरामिलिट्री फोर्स ने बाताय था। कई सैनिक पूजा करना चाहते थे और तब उन्होंने चेरियाकोया से भगवान गणेश की मूर्ति बनाने के लिए कहा था। मंदिर के पुजारी चितरंजन मिश्रा ने भी चेरियाकोया को धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी वजह से ही उस समय यहां मंदिर बन पाया था। 

बता दें कि एमपी स्पेशल फोर्स ने ही 1978 में इस मंदिर का उद्घाटन किया था। इसके बाद आईआरबी ने इसकी जिम्मेदारी ली। अब यहां पर हिंदुओं का हर त्योहार मनाया जाता है। गौर करने वाली बात है कि चेरियाकोवा ने इस मूर्ति को बनाने के लिए पैसे नहीं लिए थे। 

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