Census Caste Column Decision; Modi Government | Congress JDU LJP | जनगणना में जाति का कॉलम जोड़ सकती है सरकार: कांग्रेस के साथ भाजपा की साथी JDU-LJP ने भी की मांग, 2021 में होनी थी जनगणना

नई दिल्ली3 घंटे पहले

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पिछली बार देश में 2011 में जनगणना हुई थी। तब जनसंख्या 121 करोड़ से ज्यादा थी।

केंद्र सरकार जनगणना के दौरान जाति का कॉलम जोड़ने का विचार कर ही है। यह खबर तब आई है, जब कांग्रेस और विपक्ष के अलावा भाजपा की साथी जेडीयू और एलजेपी भी जातिगत जनगणना की मांग कर रही हैं।

इंडिया टुडे को सरकार के सूत्रों ने सोमवार को बताया कि राजनीतिक मांग के चलते सरकार जनगणना में कास्ट कॉलम जोड़ सकती है। जनगणना हर 10 साल में होती है। पिछली बार ये 2011 में हुई थी। इसके बाद 2021 में यह कोरोना महामारी के चलते नहीं हो पाई।

जातिगत जनगणना पर किसका क्या स्टैंड केंद्र सरकार: उद्धव ठाकरे सरकार ने जब सुप्रीम कोर्ट में पिटिशन लगाई कि महाराष्ट्र में बैकवर्ड क्लास ऑफ सिटिजंस (BCC) का डेटा जुटाने का निर्देश दिया जाए, तब केंद्र सरकार ने अपना स्टैंड साफ किया था। केंद्र ने कहा था कि यह पॉलिसी का मामला है और अदालतों को इसमें नहीं पड़ना चाहिए। जातिगत जनगणना को एडमिनिस्ट्रेटिव लेवल पर कराने में बहुत दिक्कतें आएंगी और यह व्यावहारिक भी नहीं है।

विपक्षी पार्टियां: कांग्रेस समेत BJD, SP, RJD, BSP, NCP शरद पवार देश में जातिगत जनगणना की मांग कर रही हैं। TMC का रुख अभी साफ नहीं है। राहुल गांधी हाल में ही अमेरिका दौरे पर गए थे, वहां उन्होंने जातिगत जनगणना को सही बताया था।

NDA: भाजपा का स्टैंड जातिगत जनगणना के पक्ष में नहीं है। NDA कांग्रेस समेत दूसरी विपक्षी पार्टियों पर आरोप लगा रही हैं कि ये जातिगत जनगणना के जरिए देश को बांटने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, बिहार में भाजपा ने ही जातिगत जनगणना का सपोर्ट किया था।सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, निषाद पार्टी, अपना दल, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा सेकुलर, PMK भी कास्ट सेंसस का सपोर्ट कर रही हैं। अब चिराग पासवान की LJP और नीतीश की JDU भी देश में जातिगत जनगणना की मांग कर रही हैं।

2 बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: कांग्रेस सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना की बात कर रही है, यह एक नक्सली विचारधारा है। हमारी राजनीतिक विपक्षी कांग्रेस समाज को जाति के आधार पर बांटने का पाप कर रही है। हमारे लिए गरीबों को सबसे पहले हक मिलना चाहिए, क्योंकि देश में यही सबसे ज्यादा वंचित पॉपुलेशन है।

नेता विपक्ष राहुल गांधी: भारत के दलित, OBC, आदिवासी को उनका हक नहीं मिल रहा है। देश के 90% आबादी वाले OBC, दलित और आदिवासी इस खेल में ही नहीं हैं। जातिगत जनगणना यह जानने का आसान तरीका है कि निचली जातियां, पिछड़ी जातियां और दलित किस स्थिति में हैं।

2 सवाल 1. देश में जनगणना कब होगी कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि देश में जनगणना सितंबर महीने में शुरू की जा सकती है, लेकिन अभी सरकार ने इसकी पुष्टि नहीं की है। अगर जनगणना शुरू भी होती है तो इसे पूरा होने में 2 साल का समय लगेगा। यानी इसके नतीजे 2026 तक आ पाएंगे।

2. एक्ट में क्या बदलाव करने होंगे जातियों की गिनती के लिए एक्ट में संशोधन करना होगा जनगणना एक्ट 1948 में एससी- एसटी की गणना का प्रावधान है। ओबीसी की गणना के लिए इसमें संशोधन करना होगा। इससे ओबीसी की 2,650 जातियों के आंकड़े सामने आएंगे। 2011 की जनगणना के अनुसार, मार्च 2023 तक 1,270 एससी, 748 एसटी जातियां हैं। 2011 में एससी आबादी 16.6% और एसटी 8.6% थी।

बिहार की जातिगत जनगणना के आंकड़े

बिहार सरकार ने अक्टूबर 2023 में जातीय गणना के आंकड़े जारी किए थे। इसके साथ ही बिहार जातीय गणना के आंकड़े जारी करने वाला पहला राज्य बना था। इसमें अत्यंत पिछड़ा वर्ग 36%, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) 27% हैं। सबसे ज्यादा 14.26% यादव हैं। ब्राह्मण 3.65%, राजपूत (ठाकुर) 3.45% हैं। सबसे कम संख्या 0.60% कायस्थों की है।

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‘जातिगत जनगणना यानी कास्ट सेंसस हिंदुस्तान का एक्स-रे है। इससे पता लग जाएगा कि देश में OBC, आदिवासी और सामान्य वर्ग के कितने लोग हैं। एक बार आंकड़ा आ जाएगा तो देश सबको लेकर आगे चल पाएगा। OBC महिलाओं को भागीदारी देनी है। सबको भागीदारी देनी है तो जातिगत जनगणना करानी होगी।’ पूरी खबर पढ़ें…

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