भुवनेश्वर1 घंटे पहले
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घटना 15 सितंबर की रात को हुई थी। इसका खुलासा 19 सितंबर को हुआ था।
ओडिशा के भुवनेश्वर में आर्मी अफसर और उनकी मंगेतर से भरतपुर थाने में मारपीट और यौन उत्पीड़न का मामला बढ़ता जा रहा है। पूर्व सेना प्रमुख और पूर्व CBI चीफ के बीच पीड़ित से थाने में हुए व्यवहार पर बहस हुई।
पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने X पोस्ट में लिखा- पुलिस स्टेशन में उसके साथ जो हुआ वह शर्मनाक है। ओडिशा के सीएम को वर्दीधारी अपराधियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। रिटायर्ड सेना अधिकारी की बेटी की बात सुननी चाहिए।
इस पर पूर्व CBI चीफ और ओडिशा कैडर के IPS एम. नागेश्वर राव ने लिखा- एक सैन्य अधिकारी और उनकी मंगेतर ने शराब पीकर देर रात शहर में गाड़ी चलाई। छात्रों के साथ झगड़ा किया और बाद में पुलिस थाने में हंगामा किया।
उन्होंने लिखा कि जब उनसे मेडिकल जांच और ब्लड टेस्ट कराने के लिए कहा गया, तो उन्होंने इनकार कर दिया, जो जांच का एक सामान्य हिस्सा है। इस केस में पुलिस की आलोचना करना सही नहीं है।
वहीं, इस मामले में ओडिशा की कोर्ट ने सस्पेंड किए गए भरतपुर थाने के पुलिस अधिकारी के पॉलीग्राफ परीक्षण की परमिशन दे दी। ओडिशा सरकार ने सैन्य अधिकारी और उसकी मंगेतर को सुरक्षा मुहैया कराई है।
आरोप है कि 15 सितंबर को थाने में रोड रेज की शिकायत दर्ज कराने गए आर्मी अफसर को पुलिसकर्मियों ने प्रताड़ित किया गया। उसकी मंगेतर का यौन उत्पीड़न किया गया।

पहला वीडियो: महिला और आर्मी अफसर को युवक घेरे नजर आए।
ओडिशा CM ने की पीड़ित से मुलाकात ओडिशा CM मोहन चरण माझी ने 23 सितंबर को इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। जांच की अध्यक्षता हाईकोर्ट के जस्टिस चित्तरंजन दास करेंगे। सरकार ने 60 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही सरकार ने हाईकोर्ट से पुलिस की क्राइम ब्रांच की तरफ से हो रही जांच की निगरानी करने की भी अपील की है। वहीं, सीएम ने पीड़ित मुलाकात भी की थी।

रोड रेज करने वाले 7 आरोपी गिरफ्तार 21 सितंबर को पुलिस ने इस मामले में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। भुवनेश्वर के एडिशनल DCP कृष्ण प्रसाद दास ने कहा था कि आरोपियों के पास से एक वाहन और 11 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। घटना से जुड़ी वीडियो-ऑडियो क्लिप भी मिली हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है।
गिरफ्तार आरोपियों में राकेश नाइक, अभिलाष सावंत, अमन कुमार, आदित्य रंजन बेहरा, आकाश पढियारी, हरीश मंता और आशीष कुमार शामिल हैं। उनके खिलाफ BNS की कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है।।
घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल मारपीट और यौन उत्पीड़न के मामले से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। इनमें आर्मी अफसर और उसकी मंगेतर कई युवकों से घिरे नजर आ रहे हैं। विवाद हो रहा है। युवक महिला से कहते दिख रहे हैं- ये दिल्ली नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सभी के बीच बहस, गाली-गलौज और धक्का-मुक्की होती नजर आ रही है।
पहला वीडियो पीड़ित महिला: सर, मैं आपसे बात नहीं कर रही हूं, मैं उन लोगों से बात कर रही हूं जो मेरे साथ दुर्व्यवहार करने की कोशिश कर रहे हैं। ये मेरी कार है, चाहे मैं अपने पैर दिखाऊं, अपने बाल दिखाऊं, कुछ भी दिखाऊं…आप कौन हो? यह मेरा विशेषाधिकार है।
भीड़ में मौजूद युवक: …तो फिर इसे हमें मत दिखाओ।
पीड़ित महिला: आप कौन हैं?
भीड़ में मौजूद युवक: मोहन मांझी का नाम लेकर पूछता है क्या इनका नाम सुना है। जब महिला कहती है कि उसने नहीं सुना है… तभी एक युवक चिल्लाकर कहता है कि ओडिशा के प्रधानमंत्री।
बहस बढ़ती है, आर्मी अफसर महिला मित्र का हाथ पकड़कर उसे दूर ले जाने की कोशिश करता है, लेकिन युवकों की भीड़ उनका पीछा करती है… एक युवक कहता है कि… यह दिल्ली नहीं है।
इसके बाद सभी युवक आर्मी अफसर को धक्का देते हैं। बहस जारी रहती है। युवकों का ग्रुप महिला से कहता है कि वे विक्टिम कार्ड खेल रही हैं। उससे कहते हैं कि इतना ओवर कॉन्फिडेंस दिखाने की जरूरत नहीं है।
इसके बाद आर्मी अफसर अपनी महिला मित्र को कार में बिठाता है।

दूसरा वीडियो: युवकों का ग्रुप महिला और आर्मी अफसर पर हमला करते दिखता है।
दूसरा वीडियो युवकों का ग्रुप गालियां देते हुए आर्मी अफसर को पीटता है। महिला आर्मी अफसर को बचाने की कोशिश करती है। युवकों का ग्रुप दोनों को धक्का देता है, उन पर हमला करता है।
वीडियो के अंत में आर्मी अफसर और महिला कार की ओर बढ़ते हैं, जब वह कहती है कि वह पुलिस के पास जाएगी, तब एक आदमी को यह कहते हुए सुना जाता है… अरे जा।

तीसरा वीडियो: भरतपुर थाने में पीड़ित और उसका मंगेतर अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए।
तीसरा वीडियो तीसरा वीडियो भरतपुर थाने का है। इसमें पीड़ित महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाती नजर आ रही है। पीड़ित कहती है कि पुलिसवालों ने उससे कहा- ओडिशा भारत में नहीं है… हिंदी-इंग्लिश में बात नहीं कीजिए।
पीड़ित महिला का आरोप- थाने में पुलिस अफसरों ने मेरा यौन उत्पीड़न किया खुद पर हुए हमले की शिकायत करने के लिए आर्मी अफसर और महिला भुवनेश्वर के भरतपुर पुलिस स्टेशन जाते हैं। पीड़ित महिला का आरोप है कि जब हम रोड रेज की शिकायत दर्ज करवाने पुलिस थाने पहुंचे तो पुलिसकर्मियों ने उनसे पहले बदसलूकी की, फिर आर्मी ऑफिसर को लॉकअप में बंद कर दिया।
पीड़ित के मुताबिक, उसने इसका विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की और हाथ-पैर बांध दिए। एक पुरुष अधिकारी ने उसके अंडरगारमेंट उतारे। फिर छाती पर लातें मारीं। थाने में जब इंस्पेक्टर-इंचार्ज पहुंचा तो उसने पीड़ित की पैंट नीचे कर अपना प्राइवेट पार्ट दिखाया और अश्लील बातें कीं।
इसके बाद पुलिस ने पीड़िता को ही बदतमीजी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था।
19 सितंबर को हुआ मामले का खुलासा 15 सितंबर को घटी इस घटना का खुलासा 19 सितंबर को हुआ। हाईकोर्ट से जमानत के बाद पीड़िता का 19 सितंबर को भुवनेश्वर AIIMS में इलाज कराया गया था। तभी घटना के बारे में सभी को पता चला।
पीड़ित के आरोपों के बाद DG वाईबी खुरानिया के निर्देश पर 19 सितंबर को ही चांदका थाने में शिकायत दर्ज की गई। उन्होंने क्राइम ब्रांच को जांच के आदेश दिए, जिसके बाद भरतपुर के इंस्पेक्टर इंचार्ज समेत 5 पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड किया गया।
मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता वीके सिंह ने आरोपियों के खिलाफ एक्शन लेने की बात कही है।
पीड़ित के पुलिसकर्मियों पर 5 गंभीर आरोप
- 15 सितंबर को रात 1 बजे मैं अपना रेस्टोरेंट बंद करके आर्मी ऑफिसर के साथ घर लौट रही थी। रास्ते में कुछ युवकों ने हमारा रास्ता रोकने की कोशिश की और छेड़छाड़ करने लगे। पुलिस से शिकायत करने और मदद मांगने के लिए हम भरतपुर थाने पहुंचे।
- भरतपुर थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की तो वहां सिविल ड्रेस में मौजूद एक महिला पुलिसकर्मी हमसे गाली-गलौज करने लगी। थोड़ी देर बाद एक पेट्रोलिंग गाड़ी से कुछ और पुलिसकर्मी थाने पहुंचे। उन्होंने आर्मी ऑफिसर को लॉकअप में बंद कर दिया।
- जब मैंने कहा कि वे आर्मी ऑफिसर को हिरासत में नहीं रख सकते, यह गैरकानूनी है, तो दो महिला पुलिसकर्मियों ने मेरे बाल पकड़ लिए जोर-जोर से मारने लगीं। एक महिला पुलिसकर्मी ने मेरी गर्दन पकड़ने की कोशिश की तो मैंने उसके हाथ पर काट लिया।
- इसके बाद उन्होंने मेरी जैकेट से मेरे हाथ बांध दिए। एक लेडी कॉन्स्टेबल के स्कार्फ से मेरे पैर बांध दिए। थोड़ी देर बाद एक मेल ऑफिसर आया। उसने मेरे अंडरगारमेंट उतार दिए और छाती पर लातें मारने लगा।
- सुबह करीब 6 बजे इंस्पेक्टर-इंचार्ज आया। उसने मेरी पैंट नीचे कर दी। फिर अपनी पैंट नीचे की और प्राइवेट पार्ट दिखाकर अश्लील बातें की। मैं इस दौरान मदद के लिए जोर-जोर से चिल्ला रही थी।
आर्मी ऑफिसर बोले- 4 पुलिसवालों ने मुझे घसीटा, पेंट खोली आर्मी ऑफिसर ने बताया कि थाने में शिकायत दर्ज कराने के दौरान अचानक चार पुलिस अधिकारियों ने मुझे पकड़ लिया। चारों मुझे घसीटते हुए एक सेल में ले गए। वहां उन्होंने मेरी पैंट उतारी। मेरा सारा सामान ले लिया। मुझे सुबह 3 बजे अवैध रूप से सेल के अंदर बंद रखा। इस बीच लॉबी में दो महिला पुलिस अधिकारियों ने मेरी मंगेतर के साथ मारपीट की।
सुबह 6 बजे, जब मेरी मंगेतर ने पुलिस अधिकारियों से गिरफ्तारी वारंट की मांग की, तो उसे एक कमरे में घसीटा गया और SI प्रभारी सहित चार पुरुष और तीन महिला पुलिस अधिकारियों ने उसके कपड़े उतार दिए और उसके साथ मारपीट की। मैं 30 मिनट तक चीखें सुनता रहा। इसके बाद मेरी मंगेतर को बदतमीजी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।

आरोपियों में शामिल इंस्पेक्टर-इंचार्ज दिनकृष्ण मिश्रा।
पुलिस बोली- आर्मी ऑफिसर और उसकी मंगेतर नशे में थी भरतपुर पुलिस ने बताया कि आर्मी ऑफिसर और उसकी मंगेतर नशे में थी। उन्होंने 15 सितंबर की रात भरतपुर पुलिस स्टेशन पहुंचकर तोड़फोड़ की। कंप्यूटर और फर्नीचर को तोड़ा। ऑन-ड्यूटी अफसरों से मारपीट भी की। इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया।
पूर्व आर्मी चीफ बोले- थाने में जो हुआ, वह शर्मनाक मामले पर भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने X पर अपनी पोस्ट में लिखा- सभी को पीड़ित (आर्मी ऑफिसर की मंगेतर) की बात सुननी चाहिए। वह रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर की बेटी है। ओडिशा के थाने में उनके साथ जो हुआ, वह शर्मनाक है। आरोपी पुलिसकर्मियों पर तुरंत एक्शन होना चाहिए।
महिला आयोग ने संज्ञान लिया राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले को लेकर संज्ञान लिया है। आयोग ने ओडिशा के DGP को एक पत्र लिखकर 3 दिनों के अंदर एक्शन रिपोर्ट मांगी है। साथ ही कहा कि मामले में तत्काल कार्रवाई की जाए। इसमें देरी न हो।

मेडिकल जांच में पीड़ित के साथ शारीरिक उत्पीड़न की पुष्टि पीड़ित महिला का फिलहाल AIIMS-भुवनेश्वर में इलाज चल रहा है। मेडिकल जांच में उसके साथ शारीरिक उत्पीड़न की पुष्टि हुई है। डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस वाईबी खुरानिया ने क्राइम ब्रांच को मामले की जांच सौंपी है।
ओडिशा पुलिस ने बताया कि मामले के आरोपी भरतपुर पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर-इंचार्ज (ICC) दिनकृष्ण मिश्रा, सब-इंस्पेक्टर बैसालिनी पांडा, असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर्स सलिलामयी साहू और सागरिका रथ और कॉन्स्टेबल बलराम हांडा को सस्पेंड कर दिया गया है।
पीड़ित महिला के पिता बोले- पुलिसवालों की गिरफ्तारी हो पीड़ित महिला के ब्रिगेडियर पिता ने कहा- पुलिस ने मेरी बेटी का यौन उत्पीड़न करके कई कानूनों का उल्लंघन किया है। आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी होनी चाहिए। राज्य सरकार को महिलाओं के साथ संवेदनशील होकर काम करना चाहिए। राज्य सरकार आरोपी पुलिसवालों को सजा देकर एक उदाहरण पेश करे।
पूर्व चीफ सेक्रेटरी का सवाल- महिला से मारपीट का अधिकार पुलिस को किसने दिया? ओडिशाा के पूर्व चीफ सेक्रेटरी बिजय कुमार पटनायक ने कहा कि भरतपुर थाना प्रभारी निरीक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस को किसी लड़की को पीटने का अधिकार किसने दिया। रात में अगर पुलिस गश्त नहीं कर रही है, तो सरकार क्या कर रही है। विभिन्न योजनाओं पर इतना पैसा खर्च किया जा रहा है, आखिर क्यों? महिला सशक्तीकरण को लेकर अगर कदम उठाए जा रहे हैं, तो फिर वे असुरक्षित क्यों हैं?
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