[ad_1]
ढाकाकुछ ही क्षण पहले
- कॉपी लिंक
5 जून को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फिर से आरक्षण देने का आदेश दिया था। इसके बाद ही छात्र नाराज हुए।
बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन के बीच पूरे देश में कर्फ्यू लग गया है। सत्तारूढ़ अवामी लीग पार्टी के जनरल सेक्रेटरी ओबैदुल कादर ने शुक्रवार (19 जुलाई) देर रात इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि हिंसा काबू करने के लिए सेना को भी तैनात किया गया है।
प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार की तरफ से कर्फ्यू की घोषणा तब हुई है, जब शुक्रवार दिन में पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि इसमें कई लोग मारे गए हैं। सरकार ने राजधानी ढाका में किसी तरह के जमावड़े पर भी बैन लगाया है।
हिंसा में अब तक 105 लोगों की मौत
अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार, इस हफ्ते छात्र प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों में अब तक कम से कम 105 लोग मारे गए हैं। इंडिपेंडेंट टेलीविजन ने सिर्फ शुक्रवार को 17 लोगों की मौत की जानकारी दी। सोमोय टीवी ने 30 लोगों की मौत का दावा किया।
एक एसोसिएटेड प्रेस रिपोर्टर ने ढाका मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 23 शव देखे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सभी लोगों की मौत शुक्रवार को ही हुई है या नहीं। इससे पहले गुरुवार (18 जुलाई) को 22 लोगों की मौत की खबर आई थी।
405 भारतीय स्टूडेंट्स अपने घर लौटे
बांग्लादेश में बढ़ते तनाव के बीच अब तक 405 भारतीय स्टूडेंट्स अपने घर लौट आए हैं। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय स्टूडेंट्स को डॉकी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट के जरिए बांग्लादेश से निकाला गया है। उनमें से लगभग 80 मेघालय से हैं और बाकी देश के अन्य राज्यों से हैं। नेपाल, भूटान के कुछ छात्रों और पर्यटकों को भी निकाला गया है।
मेघालय सीएम ने बताया कि बांग्लादेश के ईस्टर्न मेडिकल कॉलेज में करीब 36 छात्र फंसे हुए हैं। हम वहां के अधिकारियों के संपर्क में हैं। कॉलेज और उसके आसपास की स्थिति ठीक है। हालांकि, स्टूडेंट्स के माता-पिता वहां के हालात को लेकर चिंता में हैं। जब तक भारत सरकार पूरी तरह आश्वस्त नहीं हो जाती कि रास्ता साफ हो गया है, तब तक स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है। रास्ता सुरक्षित होने के बाद ही स्टूडेंट्स को भारत लाया जाएगा।
[ad_2]
Source link
