Arvind Kejriwal CBI Case Update; Supreme Court | Delhi Liquor Scam | शराब नीति केस- केजरीवाल की जमानत पर आज फैसला: CBI ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था- CM को बेल के लिए ट्रायल कोर्ट जाना चाहिए

नई दिल्ली23 मिनट पहले

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यह तस्वीर 25 जुलाई 2024 की है। जब CBI केस में ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान केजरीवाल पेश हुए थे।

दिल्ली शराब नीति केस में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुनाएगा। 5 सितंबर को पिछली सुनवाई में कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखने से पहले केजरीवाल और CBI का पक्ष सुना।

केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि CBI ने केजरीवाल को इसलिए गिरफ्तार किया, ताकि वे जेल से बाहर ना आ सकें। वहीं CBI की तरफ से ASG एसवी राजू ने दलील दी कि CM को जमानत के लिए पहले ट्रायल कोर्ट जाना चाहिए, सीधे सुप्रीम कोर्ट नहीं आना चाहिए।

केजरीवाल की जमानत और CBI की गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका पर जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जवल भुइयां की बेंच सुनवाई कर रही है।

केजरीवाल को शराब नीति से जुड़े ED केस में सुप्रीम कोर्ट से ही 12 जुलाई को जमानत मिल चुकी है। इस केस में आम आदमी पार्टी (AAP) नेता संजय सिंह, दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और भारत राष्ट्र समिति (BRS) लीडर के कविता को जमानत दी जा चुकी है।

5 सितंबर की सुनवाई में सिंघवी की 2 अहम दलीलें

1. CBI ने दलील दी है कि केजरीवाल सहयोग नहीं कर रहे हैं। कोर्ट के ही आदेश में कहा गया है कि यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि आरोपी खुद को दोषी बता दे।

2. केजरीवाल एक संवैधानिक पद पर हैं, उनके भागने की कोई आशंका नहीं, सबूतों से छेड़छाड़ नहीं हो सकती, क्योंकि लाखों दस्तावेज और 5 चार्जशीट मौजूद हैं। गवाहों को प्रभावित करने का खतरा भी नहीं है। बेल की 3 जरूरी शर्तें हमारे पक्ष में हैं।

CBI की ओर से ASG राजू की दलीलें

1. मनीष सिसोदिया, के. कविता सभी पहले जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट गए थे। केजरीवाल सांप-सीढ़ी के खेल की तरह शॉर्टकट अपना रहे।

2. केजरीवाल को लगता है कि वे एक एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी व्यक्ति हैं, जिनके लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए। हमारा कहना है कि गिरफ्तारी पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट पहली अदालत नहीं होनी चाहिए। केजरीवाल को ट्रायल कोर्ट जाना चाहिए।

3. अगर केजरीवाल को जमानत दी जाती है तो ये फैसला हाईकोर्ट को निराश करेगा।

ED केस में सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को 12 जुलाई को जमानत दी थी सुप्रीम कोर्ट ने ED के मनी लॉन्ड्रिंग केस में अरविंद केजरीवाल को 12 जुलाई को जमानत दे दी थी। जमानत देते हुए जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा था कि केजरीवाल 90 दिन से जेल में हैं, इसलिए उन्हें रिहा किए जाने का निर्देश देते हैं। हम जानते हैं कि वह चुने हुए नेता हैं और ये उन्हें तय करना है कि वे मुख्यमंत्री बने रहना चाहते हैं या नहीं।

जस्टिस खन्ना ने कहा था कि हम ये मामला बड़ी बेंच को ट्रांसफर कर रहे हैं। गिरफ्तारी की पॉलिसी क्या है, इसका आधार क्या है। इसके लिए हमने ऐसे 3 सवाल भी तैयार किए हैं। बड़ी बेंच अगर चाहे तो केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर बदलाव कर सकती है।

ED ने 2 सप्लिमेंट्री चार्जशीट में कहा था- केजरीवाल सरगना ED ने 9 जून को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में सातवीं सप्लिमेंट्री चार्जशीट जमा की थी। 208 पेज की इस चार्जशीट में दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल को केस का सरगना और साजिशकर्ता बताया गया। चार्जशीट में कहा गया कि स्कैम से मिला पैसा आम आदमी पार्टी पर खर्च हुआ है। यह भी दावा किया गया कि केजरीवाल ने शराब बेचने के कॉन्ट्रैक्ट के लिए साउथ ग्रुप के सदस्यों से 100 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी थी, जिसमें से 45 करोड़ रुपए गोवा चुनाव पर खर्च किए गए थे। पढ़ें पूरी खबर…

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सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में दोषी करार होने के बाद सजा काट रहे व्यक्ति की दायर याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार उसकी सजा माफ करने में देरी लगा रही है। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच को दिल्ली सरकार ने कहा कि सीएम अरविंद केजरीवाल जेल में हैं। ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी के चलते सजा माफ वाली फाइलों पर उनके साइन नहीं हो पा रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें …

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