स्पेस यात्रा में निजी कंपनियों के सहारे नासा, आखिर क्यों नहीं बनाता खुद के यान ; रूस से भी ले चुका है मदद

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सुनीता विलियम्स और बुच बिल्मोर को लेकर गया बोइंग का स्टारलाइनर धरती पर वापस आ गया है। लेकिन इसकी सुरक्षित लैंडिंग पर संदेह के कारण नासा ने इसमें दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को आने की इजाजत नहीं दी थी। इन दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाने का काम नासा ने एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को दिया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर धरती पर अंतरिक्ष के क्षेत्र का बिग बॉस आखिर अंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाने के लिए प्राइवेट कंपनियों पर इतना निर्भर क्यों हो गया है, आखिर क्यों उसके पास खुद के स्पेस शटल नहीं है, जिनके सहारे वह अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस की यात्रा करा सके और फिर वापस भी ला सके।

हालांकि बोइंग और स्पेसएक्स को नासा ने ही परमीशन दी है कि वह नासा के लिए अंतरिक्ष यान तैयार करें और फिर इनका इस्तेमाल करें। स्पेसएक्स तो कुछ सालों से इस भरोसे पर खरा उतरा है और लगातार अंतरिक्ष यान के साथ यात्राओं को पूरा कर रहा है लेकिन का यह प्रयास असफल ही माना जा रहा है, हालांकि स्टारलाइनर ने धरती पर सफल लैंडिंग कर ली है तब भी उसकी जांच और नासा के अधिकारियों के साथ बोइंग के अधिकारियों की बहस ने दोनों के बीच चीजों को खराब कर दिया है।

अंतरिक्ष के क्षेत्र में आखिर कैसे हुए प्राइवेट प्लेयर्स की एंट्री

अपनी स्पेस टेक्नोलॉजी के दम पर चंद्रमा पर पहुंचने और सफल रूप से वापस आने वाले नासा ने इस प्रोग्राम के दौरान काफी उतार चढ़ाव देखे। नासा के स्पेस शटल प्रोग्राम ने चार दशक के समय में करीब 135 बार अंतरिक्ष की यात्रा की, लेकिन इसके बाद 21 जुलाई 2011 को इस स्पेस शटल प्रोग्राम को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया। इसका मुख्य कारण इसकी बहुत अधिक लागत और इसमें होने वाला जोखिम शामिल था, 1986 में हुई एक दुर्घटना में पूरे चालक दल की मृत्यु हो गई, लेकिन नासा ने अपने आप में थोड़े बहुत सुधार करके यह प्रोग्राम चालू रखा। लेकिन तमाम सुधारों और प्रयासों के बाद भी 17 साल बाद कल्पना चावला को लेकर गया स्पेस शटल कोलंबिया यान दुर्घटना ग्रस्त हो गया, जिसके बाद अमेरिका के स्पेस शटल प्रोग्राम पर ताला डलने की रूप रेखा तय हो गई।

इस दुर्घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने 2004 में घोषणा की, कि नासा अपना स्पेस शटल प्रोग्राम बंद करेगा। इसके बाद नासा अपने यानों के लिए रूस पर निर्भर हो गया क्योंकि केवल रूस ही ऐसा था जो इसमें अमेरिका के बाद सबसे बेहतर था। 2011 में अमेरिका का यह प्रोग्राम पूरी तरह से बंद हुआ तो रूस ने अमेरिका की मदद की भी, इस दौरान अमेरिका ने रूस के सोयूज स्पेसक्राफ्ट का इस्तेमाल किया। लेकिन अमेरिका और रूस के संबंध कभी भी सामान्य नहीं रहे। 3 साल बाद ही रूस ने क्रीमिया पर हमला किया और अमेरिका ने रूस को जी 7 से बाहर का रास्ता दिखा दिया इसके बाद दोनों देशों के बीच संबंध बिगड़ गए।

फिर सामने आए स्पेसएक्स और बोइंग

2014 में रूस के साथ रिश्तों की खराबी और अंतरिक्ष में पिछड़ने के बाद नासा ने तय कर लिया कि अब वह प्राइवेट प्लेयर्स की तरफ मुड़ेगी। सितंबर 2016 में नासा के द्वारा घोषणा की गई कि अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष स्टेशन तक भेजने और वहां से वापस लाने के लिए एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स और अमेरिकी एयरक्राफ्ट निर्माता कंपनी बोइंग के साथ करार किया गया है। इस करार के तहत बोइंग को 4.2 बिलियन डॉलर, जबकि स्पेसएक्स को 2 बिलियन डॉलर की रकम दी गई।

इस करार के बा दोनों कंपनियों में स्पेस में पहले पहुंचने की होड़ शुरू हो गई। नासा ने स्पेसएक्स को कम कीमत अदा की थी लेकिन इसने बोइंग से पहले अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस में भेजना शुरू कर दिया, एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स अभी तक 13 मिशन को अपने ड्रैगन कैप्सूल के जरिए पूरा कर चुकी है। इस क्षेत्र के पुराने खिलाड़ी बोइंग के लिए यह अपमान के समान बात थी इसलिए वह भी जल्द से जल्द इस मुकाम को हासिल करना चाहती थी।

हालांकि बोइंग ने स्टारलाइनर को 2017 में ही लॉन्च कर दिया था लेकिन इसमें बार- बार आती खराबी के कारण ज्यादा सफल नहीं माना गया। 2022 की आखिरी उड़ान में यह बिना यात्रियों के सफलता पूर्वक स्पेस में पहुंचकर स्पेस स्टेशन में डॉक कर पाया और सफलता पूर्वक वापस धरती पर आ गया। फिर इस बार वह सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को लेकर वापस अपनी काबिलियत साबित करने के लिए गया था लेकिन यान में आई खराबी ने बोइंग के मंसूबों पर फिर पानी फेर दिया।

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