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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पनामा नहर को कब्जाने की धमकियों के बीच, पनामा ने संयुक्त राष्ट्र का रुख किया है. पनामा ने UN चार्टर का हवाला दिया है, जो किसी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता क…और पढ़ें
पनामा ने अमेरिका की शिकायत UN में की है. (AP)
पनामा सिटी: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शपथ लेते ही पनामा नहर को कब्जाने की धमकी दोहराई थी. ट्रंप के पास इस समय दुनिया की सबसे ताकतवर फौज है. अगर वह धमकी दे रहे हैं तो संभव है कि अमेरिका सेना भेजकर इस रणनीतिक नहर को कब्जाने की कोशिश करें. ट्रंप की धमकियों से डरे पनामा ने अब संयुक्त राष्ट्र का रुख किया है. पनामा की ओर से संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस को एक चिट्ठी लिखी गई है. इस चिट्ठी में पनामा ने यूएन चार्टर के उस अनुच्छेद का हवाला दिया है, जो किसी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग या धमकी को रोकता है. ट्रंप की धमकियों को पनामा ने ‘चिंताजनक’ बताते हुए कहा कि इसे लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चर्चा होनी चाहिए. हालांकि, पत्र में UNSC की बैठक बुलाने की मांग नहीं की गई है.
इससे संबंधित एक घटनाक्रम में, पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो ने ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया कि अमेरिका ने पनामा को नहर उपहार में दी थी. मुलिनो ने स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर कहा, ‘हम ट्रंप की ओर से कही गई हर बात को पूरी तरह से खारिज करते हैं. पहले तो यह झूठ है और दूसरा, पनामा नहर पनामा की है और पनामा की ही रहेगी. पनामा नहर अमेरिका का उपहार या रियायत नहीं थी.’
ट्रंप ने पनामा नहर वापस लेने की दी धमकी
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पुनर्वासवादी एजेंडे की तरह, ट्रंप ने हाल के हफ्तों में पश्चिमी देशों को आक्रमण और कब्जे की धमकियां दी हैं. उन्होंने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने, पनामा नहर पर कब्जा करने के लिए बल प्रयोग करने और कनाडा के कब्जे का आह्वान किया है. अपने उद्घाटन भाषण में, ट्रंप ने पनामा के कब्जे का जिक्र करते हुए कहा कि ‘हम इसे वापस ले रहे हैं’. उन्होंने कहा कि अमेरिकी जहाजों से नहर पार करने के लिए अन्य जहाजों की तुलना में अधिक शुल्क लिया जाता है और झूठा दावा किया कि नहर को पनामा नहीं, बल्कि चीन चला रहा है.
ट्रंप ने कहा, ‘हमें इस मूर्खतापूर्ण उपहार से बहुत बुरा व्यवहार मिला है जो कभी नहीं दिया जाना चाहिए था. और पनामा का हमसे किया वादा टूट गया है. हमारे समझौते का उद्देश्य और हमारी संधि की भावना का पूरी तरह से उल्लंघन किया गया है. अमेरिकी जहाजों से अत्यधिक शुल्क लिया जा रहा है और किसी भी रूप में उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा है, और इसमें अमेरिकी नौसेना भी शामिल है. इसमें सबसे बड़ी बात कि चीन पनामा नहर चला रहा है और हमने इसे चीन को नहीं दिया, हमने इसे पनामा को दिया, और हम इसे वापस ले रहे हैं.’
ट्रंप के बयान पर क्या बोला पनामा?
पनामा के राष्ट्रपति मुलिनो ने तुरंत प्रतिक्रिया दी. ट्रंप के भाषण के तुरंत बाद, उन्होंने एक बयान जारी कर ट्रंप के कब्जे के आह्वान को खारिज कर दिया और कहा कि नहर ‘पनामा की है और पनामा की ही रहेगी और इसका प्रशासन पनामा के नियंत्रण में रहेगा, इसके स्थायी तटस्थता के सम्मान के साथ’.
न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के मुताबिक पनामा ने ट्रंप की टिप्पणियों को खारिज कर दिया है और UN का रुख किया है. उसने ‘सार्वजनिक संसाधनों के कुशल और पारदर्शी उपयोग को सुनिश्चित करने’ के उद्देश्य से पनामा पोर्ट्स कंपनी में ‘एक व्यापक ऑडिट’ की घोषणा की है, जो नहर का प्रबंधन करती है.
हालांकि चीन नहर का प्रबंधन नहीं करता, लेकिन एक चीनी कंपनी नहर पर दो बंदरगाहों का प्रबंधन करती है और ऑडिट यह निर्धारित करेगा कि कंपनी अपने रियायत समझौतों का पालन कर रही है या नहीं, जिसमें आय, भुगतान और देश को योगदान की पर्याप्त रिपोर्टिंग शामिल है.
New Delhi,New Delhi,Delhi
January 22, 2025, 17:50 IST
ट्रंप की दादागिरी के खिलाफ उठ खड़ा हुआ पनामा, UN में की अमेरिका की शिकायत
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