पत्नी से तलाक…क्या सच है तुर्किये के इस निशानेबाज की कहानी, आखिर कौन बना ओलंपिक की प्रेरणा

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वह आया और छा गया. ना स्पेशल चश्मा, ना कानों में विशेष ईयरबड और ना ही कोई अन्य सेफ्टी सामान. जेब में हाथ डाले हुए ही एक हाथ से पिस्टल उठाई और धाय….लगा दिया निशाना. पहली ही गोली ने सिल्वर मेडल को भेद दिया. निशानेबाज का यह अनोखा अंदाज हर कोई वाह…वाह…कर बैठा. तुर्किये के निशानेबाज यूसुफ डिकेच ने मस्तमौला अंदाज में पेरिस ओलंपिक में मेडल जीतकर जो सुर्खियां बटोरी हैं, वह किसी गोल्ड मेडल विनर को भी नसीब नहीं हुईं. बेहद कैजुअल अंदाज में सिल्वर मेडल जीतने के साथ-साथ यूसुफ डिकेच को लेकर एक और कहानी सोशल मीडिया पर तैर रही है. हालांकि यह कहानी एकदम फर्जी है.

पहले चर्चा फर्जी कहानी की. तुर्किये के इस शूटर के बार में सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि यूसुफ डिकेच ने पत्नी से तलाक के बाद बंदूक को ही अपना सहारा बनाया. वे जब भी उदास होते, पिस्टल उठाकर दीवार पर निशाना लगाने लग जाते. और बीवी से अलगाव का यही सदमा उन्हें ओलंपिक के मैदान तक ले आया. सोशल मीडिया पर यूसुफ डिचेक की निजी दास्तान के बारे में कहा जा रहा है कि डिचेक पहले इस्तांबुल में एक मामूली मैकेनिक थे. पत्नी के साथ उनकी कभी नहीं बनी और छोटी-छोटी बात पर पत्नी के साथ झगड़ा होता रहता था. कुछ समय तक को दोनों ने जैसे-तैसे जीवन की गाड़ी खींची, लेकिन जब बिल्कुल भी नहीं बनी तो दोनों ने तलाक ले लिया. पत्नी से अलग रहने के बाद यूसुफ डिचेक ने निशानेबाजी शुरू की. और एक दिन कामयाब निशानेबाज बन गए. उनका यही हुनर डिचेक को पेरिस ले आया.

क्या है असल कहानी
लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह कहानी पूरी तरह से फर्जी है. इसमें रत्ती भर सच्चाई नहीं है. असल में यूसुफ डिकेच ने वर्ष 2001 में जेंडरमेरी जनरल कमांड में नॉन-कमीशन अधिकारी के रूप में नौकरी शुरू की. नौकरी के साथ में ही उन्होंने छोटे स्तरों पर निशानेबाजी प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू कर दिया था. उन्होंने चार बार 2008, 2012, 2016 और 2020 के ओलंपिक्स खेलों में हिस्सा लिया है. और अब 2024 के पेरिस ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता है. वे सात बार यूरोपीय चैंपियन भी रह चुके हैं.



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