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म्यांमार की सेना और विद्रोहियों के बीच साल 2021 में आंग सान सू की की सरकार का तख्तापलट होने के बाद से ही जंग चल रही है. इसी कड़ी में अब रूस से म्यांमार को एडवांस सुखोई विमान मिलने जा रहे हैं. अब विद्रोही देश…और पढ़ें
नई दिल्ली. म्यांमार में गृह युद्ध के बीच शुक्रवार को जुंटा आर्मी की ताकत अचानक काफी ज्यादा बढ़ गई. ऐसा इसलिए क्योंकि रूस से म्यांमार की वायु सेना को छह सुखाई विमान के एडवांस वर्जन Su-30 SME की डिलीवरी मिल गई है. म्यांमार के एक बड़े हिस्से पर इस वक्त विद्रोहियों का कब्जा है. म्यांमार की सेना धीरे-धीरे अपनी पकड़ को खोती जा रही है. विद्रोही खेती में मदद के लिए इस्तेमाल होने वाले ड्रोन की मदद से म्यांमार की सेना की हर हरकत पर नजर रख रहे हैं और फिर उनके खिलाफ करारा प्रहार भी कर रहे हैं.
सुखोई के लिए रूस ने की आर्थिक मदद
रूस से मिले छह Su-30 SME दो सीट वाला डबल इंजन फाइटर जेट है. इस जेट को विस्तारित रेंज और पर्याप्त पेलोड क्षमता की आवश्यकता वाले मिशनों के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसकी अधिकतम गति मैक 2.0 है और सर्विस सीलिंग 17,300 मीटर है. इसकी ऑपरेशनल रेंज लगभग 3,000 किलोमीटर है और विभिन्न हथियार विन्यासों को ले जाने के लिए 12 हार्डपॉइंट हैं. छह रूसी जेट विमानों को 2018 के अनुबंध के तहत खरीदा गया है, जिसकी कीमत 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर है. म्यांमार को रूस ने इन विमानों को खरीदने के लिए लोन दिया था. इस कांट्रैक्ट के तहत आखिरी दो फाइटर जेट 15 दिसंबर, 2024 को मिले.
म्यांमार सेना की अब कितनी है ताकत?
रूस के उप रक्षा मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल अलेक्जेंडर फोमिन ने रूसी समाचार एजेंसी TASS को बताया कि ये Su-30 जेट क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा और आतंकी खतरों का मुकाबला करने के लिए म्यांमार के प्राथमिक विमान के रूप में काम करेंगे. Su-30SME को नेपीडॉ एयर बेस पर तैनात किया गया है. जिससे पूरे देश की कवरेज संभव है. म्यांमार जुंटा विद्रोहियों से निपटने के लिए अपनी हवाई क्षमताओं को मजबूत कर रहा है. अकेले 15 दिसंबर को सेना ने छह रूसी निर्मित Mi-17 हेलीकॉप्टर, छह चीनी निर्मित FTC-2000G फाइटर जेट, एक K-8W फाइटर जेट और एक Y-8 सपोर्ट एयरक्राफ्ट को कमीशन किया. साल 2021 से म्यांमार वायु सेना हवाई हमले कर रही है. वायु सेना विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों में बम गिराने के लिए Y-12 विमानों का इस्तेमाल कर रही है.
म्यांमार के चीन पर आरोप
मौजूदा वक्त में म्यांमार की सेना चीनी निर्मित JF-17 थंडर फाइटर जेट की मदद से विद्रोहियों पर हमले कर रही है. हालांकि इसके बवाजूद भी वो विद्रोहियों को नहीं रोक पा रहे हैं. रूसी लड़ाकू विमानों की डिलीवरी म्यांमार के लिए ऐसे समय में हुई है जब म्यांमार में चीनी जेएफ-17 थंडर लड़ाकू विमानों को कई तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. म्यांमार ने बीजिंग पर विद्रोहियों का समर्थन करने का भी आरोप लगाया था. सेना प्रमुख वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने अगस्त 2024 में कहा था कि चीन की भागीदारी के कारण सेना ने लैशियो क्षेत्र खो दिया.
बागियों के ड्रोन अटैक से तंग आ चुका सेना
म्यांमार में साल 2021 में आंग सान सू की सरकार का तख्तापलट सेना ने कर दिया था. इसके बाद से ही व्रिदोही आंदोलन चल रहे हैं. बताया जा रहा है कि बागियों के पास चीन से अवैध तरीके से लिए गए ड्रोन मौजूद हैं. इन ड्रोन की मदद से किए गए हमलों के कारण ही म्यांमार की आर्मी अपने ही देश में पिछड़ती जा रही है. इन ड्रोन का निर्माण आमतौर पर खेती में मदद के लिए किया जाता है लेकिन बागी जमकर इन्हें आधुनिक बना सेना के खिलाफ यूज कर रही है.
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