अंतरिक्ष से आई रहस्यमयी आवाज, वैज्ञानिकों ने खोजा नया रहस्य

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Agency:News18Hindi

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Science News: वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष से एक रहस्यमयी आवाज सुनी है. 1 लाख किमी दूर से आ रही ये आवाज पक्षी की आवाज जैसी लग रही है. वैज्ञानिकों के लिए ये आवाज रहस्यमयी बना हुआ है. ऐसी आवाज शनि और ब़हस्पति ग्रह पर …और पढ़ें

100000 KM दूर से आ रही रहस्यमयी आवाज! चौंक उठे वैज्ञानिक, 60 साल बाद भी रहस्य

धरती पर आ रही है अजीब आवाज.

Science News: दुनिया भर के वैज्ञानिक लगातार अंतरिक्ष के रहस्यों को सुलझाने की कोशिश करते रहते हैं. कुछ साल पहले वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष से पक्षी की आवाज जैसी तंरग मिली थी. आवाज को सुनने से ऐसा लग रहा था कि चिड़िया चहचहा रही हो. हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि ये चिड़ियों की आवाजें नहीं हैं. इन आवाजों को ‘कोरस वेव्स’ कहा जाता है. ये प्लाज्मा की तरंगें हैं, जो मानव सुनने की क्षमता के समान फ्रीक्वेंसी पर कंपन करती हैं. जब इन्हें ऑडियो में बदला गया, तो इनकी आवाज़ पक्षियों की तेज चहचहाहट जैसी लगी.

वैज्ञानिकों ने पहले भी अंतरिक्ष में ऐसी आवाजें सुनी थीं. लेकिन, इस बार वैज्ञानिकों को यह आवाज पहले से भी ज्यादा दूर यानी कि धरती से लगभग 1 लाख किलोमीटर दूर से दर्ज किया है. वैज्ञानिकों ने इस आवाज को अनजान जगह पर खोजा है. उनका मानना है कि यह खोज इसलिए खास है, क्योंकि इस दूरी पर पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था.

क्या बोले रिसर्चर्स
यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा की स्पेस वैज्ञानिक एलीसन जेन ने कहा कि है कि यह खोज नए सवाल खड़े करती है कि इस क्षेत्र में भौतिकी के कौन-कौन से नियम काम कर सकते हैं. उनका मानना है कि पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का इससे कुछ लेना-देना हो सकता है.

पहली बार कब हुई घटना
पहली बार 1960 के दशक में ऐसी ध्वनी दर्ज की गई थी. वैज्ञानिकों का कहना है कि 60 के दशक में अंटार्कटिका में रिसर्च स्टेशन के रिसीवर पर दशकों से आ रहीं कोरस को रेडियो एंटेना पर कैच किया गया था. इसे नासा के जुड़वां अंतरिक्ष यान वैन एलन प्रोब्स ने पृथ्वी के रेडिएशन बेल्ट से बेल्ट से चहचहाहट की को कैच किया था. नासा के मैग्नेटोस्फेरिक मल्टीस्केल सैटेलाइट्स, जो 2015 में लॉन्च हुए थे, ने इन तरंगों को रिकॉर्ड किया.

कोरस वेव्स कैसे बनती हैं?
वैज्ञानिक अभी तक यह नहीं समझ पाए हैं कि ये तरंगें कैसे बनती हैं. हालांकि, उनका मानना है कि पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र का लेना देना होगा. कोरस वेव्स बृहस्पति और शनि जैसे ग्रहों के पास भी पाई गई हैं. ये तरंगें ऊर्जावान इलेक्ट्रॉनों का निर्माण कर सकती हैं, जो सैटेलाइट संचार को बाधित कर सकते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि इन तरंगों के बारे में और अधिक अध्ययन करने की जरूरत है. यह खोज अंतरिक्ष विज्ञान में नई संभावनाओं को जन्म दे सकती है.

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