नई दिल्ली7 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने वकीलों की ओर से बार-बार ‘माई लॉर्ड’ और ‘योर लॉर्डशिप’ कहे जाने पर नाखुशी जताई। दरअसल, कोर्ट में बुधवार को एक नियमित मामले की सुनवाई चल रही थी। इस दौरान जस्टिस एएस बोपन्ना के साथ बेंच में जस्टिस पीएस नरसिम्हा भी बैठे थे। इस दौरान एक सीनियर एडवोकेट उन्हें बार-बार ‘माई लॉर्ड’ और ‘योर लॉर्डशिप’ कह रहे थे।
तभी जस्टिस नरसिम्हा ने सीनियर एडवोकेट से कहा कि आप कितनी बार ‘माई लॉर्ड्स’ कहेंगे। यदि आप यह कहना बंद कर देंगे, तो मैं आपको अपनी आधी सैलरी दे दूंगा।
सुप्रीम कोर्ट में किसी मामले में बहस के दौरान जजों को हमेशा “माई लॉर्ड” या “योर लॉर्डशिप” कहकर संबोधित किया जाता है। इसका विरोध करने वाले अक्सर इसे औपनिवेशिक युग का अवशेष और गुलामी की निशानी कहते हैं।
जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, आप इसके बजाय सर का उपयोग क्यों नहीं करते? आपने माई लॉर्ड कहना बंद करें नहीं तो वे गिनना शुरू कर देंगे कि आपने कितनी बार माई लॉर्ड्स कहा।
2006 में, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें निर्णय लिया गया था कि कोई भी वकील जजों को “माई लॉर्ड” और “योर लॉर्डशिप” कहकर संबोधित नहीं करेगा। लेकिन व्यवहार में इसका पालन नहीं किया गया। आज की वकील सुप्रीम कोर्ट में इन शब्दों का उपयोग करते हैं।
