Sikkim Lottery Distributors GST Tax Update | Supreme Court | लॉटरी डिस्ट्रीब्यूटर्स केंद्र को सर्विस-टैक्स देने के लिए जिम्मेदार नहीं: SC बोला- इसके लिए कोई एजेंसी नहीं इसलिए टैक्स की जिम्मेदारी भी नहीं

नई दिल्ली2 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लॉटरी डिस्ट्रीब्यूटर्स केंद्र सरकार को सर्विस टैक्स का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस मुद्दे पर केंद्र की अपील को खारिज करते हुए कहा कि लॉटरी पर टैक्स राज्य सरकार लगा सकती है, केंद्र नहीं। लॉटरी वितरक राज्य सरकार को गैंबलिंग टैक्स यानी जुआ कर देते हैं, यह उन्हें देना होगा।

केंद्र सरकार ने लॉटरी के प्रचार और आयोजन को टैक्सेबल सर्विस की कैटेगरी में शामिल किया था। सरकार के इस फैसले को सिक्किम में पेपर और ऑनलाइन लॉटरी टिकट बेचने वाली कंपनियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि नियमों के मुताबिक सट्टा जुआ की कैटेगरी में आता है। इसलिए केंद्र इसपर टैक्स नहीं लगा सकता है।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और एनके सिंह की पीठ ने की। जिसने सिक्किम हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र की अपील को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति ने कहा कि चूंकि इस संबंध में कोई एजेंसी नहीं है, इसलिए लॉटरी वितरक सर्विस टैक्स का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि लॉटरी डिस्ट्रीब्यूटर और सिक्किम सरकार के बीच का संबंध प्रिंसिपल ‘प्रिंसिपल-टू-प्रिंसिपल’ का है, न कि ‘प्रिंसिपल-एजेंट’ का। इसका मतलब यह हुआ कि डिस्ट्रीब्यूटर राज्य सरकार को कोई सेवा प्रदान नहीं कर रहे हैं और इसलिए उन पर जीएसटी नहीं लगाया जा सकता है।

यह फैसला 2024 में दिए गए के. अरुमुगम बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के जैसा ही है। इसमें कहा गया था कि राज्य सरकार द्वारा लॉटरी टिकटों की बिक्री एक सेवा नहीं राजस्व बढ़ाने की गतिविधि हैं। इसलिए लॉटरी पर जीएसटी नहीं लगाया जा सकता है।

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