S Jaishankar Vs US; Khalistani Gurpatwant Pannu Murder Controversy | India US | विदेश मंत्रालय बोला- अमेरिका के आरोप गंभीर, ये हमारी सुरक्षा के लिए भी खतरा

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8 मिनट पहले

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फुटेज में खालिस्तानी आतंकी गुरुपतवंतसिंह पन्नू नजर आ रहा है। (फाइल)

अमेरिका ने भारत पर खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कोशिश के आरोप लगाए थे। इस पर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि हम संगठित अपराधियों, आतंकवादियों और दूसरे लोगों के बीच की कड़ी की जांच कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा- भारत ऐसे इनपुट्स को बहुत गंभीरता से लेता है, क्योंकि ये हमारे सुरक्षा हितों को भी खतरे में डाल सकते हैं।

बागची ने कहा- अमेरिकी आरोपों के मामले में विभाग जांच कर रहे हैं। ये मामला दोनों देशों के लिए चिंता का विषय है। वहीं न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने कहा- अमेरिका अपनी धरती पर एक सिख अलगाववादी को मारने की साजिश को बहुत गंभीरता से ले रहा है। हमने भारत सरकार में सबसे सीनियर लेवल पर मामले को उठाया है।

तस्वीर खालिस्तानी आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू की है। भारत ने 2020 में इसके संगठन SFJ पर बैन लगा दिया था।

तस्वीर खालिस्तानी आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू की है। भारत ने 2020 में इसके संगठन SFJ पर बैन लगा दिया था।

अमेरिका बोला- भारत ने आश्वसत किया कि वो ऐसी पॉलिसी को बढ़ावा नहीं देता
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट से जुड़े सवाल पर व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता एड्रिन वॉटसन ने कहा- भारतीय अधिकारियों ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उन्होंने हमें आश्वस्त किया है कि भारत ऐसी पॉलिसी को बढ़ावा नहीं देता है। भारत सरकार फिलहाल इस मामले में जांच कर रही है। हम उम्मीद करते हैं कि जो भी इसका जिम्मेदार होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, बुधवार को फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया था कि अमेरिका ने खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश को नाकाम किया था। अमेरिकी सरकार ने भारत के इस साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया। साथ ही भारत को चेतावनी जारी की। हालांकि, यह मामला कब का है रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है।

मोदी के अमेरिका दौरे के बाद US ने उठाया था मुद्दा
रिपोर्ट के मुताबिक, जून में PM मोदी के अमेरिका दौरे के बाद ही अमेरिकी अधिकारियों ने भारत के सामने ये मुद्दा उठाया था। वहीं, इस मामले में एक कथित आरोपी के खिलाफ न्यूयॉर्क डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में सीलबंद केस दायर किया गया है। लेकिन आरोपी कौन है और आरोप क्या हैं यह लिफाफा खुलने पर पता चलेगा। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, अमेरिका ने भारत को डिप्लोमैटिक वॉर्निंग भी दी थी।

अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट फिलहाल इस बात पर बहस कर रहा है कि इस सीलबंद केस को अभी खोला जाए और आरोपों को सार्वजनिक किया जाए या आतंकी निज्जर की हत्या की जांच पूरी होने के बाद खोला जाए। दरअसल, जून में कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हुई थी। उसकी हत्या का आरोप कनाडा ने भारत पर लगाया है। भारत ने इस आरोप को खारिज किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के सामने विरोध जताने के बाद अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों और फाइव आइज इंटेलिजेंस (अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड) से भी इस बारे में जानकारी साझा की थी। फाइनेंशियल टाइम्स ने इस मामले में पन्नू से भी बात की। हालांकि, पन्नू ने यह तो नहीं बताया कि अमेरिकी प्रशासन ने उसे साजिश की जानकारी दी या नहीं।

पन्नू बोला- ये अमेरिकी संप्रभुता को चुनौती
पन्नू ने कहा- मैं चाहूंगा कि अमेरिकी जमीन पर मेरी हत्या की साजिश पर अमेरिकी सरकार ही जवाब दे। अमेरिकी धरती पर एक अमेरिकी नागरिक को खतरा अमेरिका की संप्रभुता के लिए एक चुनौती है और मुझे विश्वास है कि बाइडेन प्रशासन ऐसी किसी भी चुनौती से निपट सकता है। पन्नू के पास अमेरिका और कनाडा की नागरिकता है।

भारत पर अमेरिका और कनाडा दोनों की तरफ से आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इसमें एक बड़ा अंतर ये है कि अमेरिका ने अब तक आरोपों को सार्वजनिक नहीं किया है। साथ ही उन्होंने पब्लिक में जाने से पहले भारत सरकार के सामने मामले को उठाया है। हालांकि, रॉयटर्स के मुताबिक व्हाइट हाउस ने कहा है कि वो आने वाले समय में इस मामले में और जानकारी साझा करेंगे।

2020 में आतंकी घोषित हुआ पन्नू
भारत सरकार ने 2019 में आतंकी गतिविधियां चलाने के आरोप में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम यानी UAPA के तहत पन्नू के संगठन SFJ पर बैन लगाया। गृह मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में कहा था कि सिखों के लिए रेफरेंडम की आड़ में SFJ पंजाब में अलगाववाद और उग्रवादी विचारधारा का समर्थन कर रहा है।

पन्नू पर साल 2020 में अलगाववाद को बढ़ावा देने और पंजाबी सिख युवाओं को हथियार उठाने के लिए प्रोत्साहित करने का आरोप लगा। इसके बाद केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2020 को पन्नू को UAPA के तहत आतंकी घोषित किया। 2020 में सरकार ने SFJ से जुड़े 40 से ज्यादा वेब पेज और यूट्यूब चैनलों को बैन किया।

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