S Jaishankar in Qatar Doha Forum de-dollarization policy | जयशंकर बोले- रूस-यूक्रेन में भारत के जरिए बात हो रही: हमने कभी डी-डॉलराइजेशन की वकालत नहीं की, फिलहाल ब्रिक्स करेंसी का प्रस्ताव नहीं

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दोहा1 घंटे पहले

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एस जयशंकर दोहा फोरम के 22वें एडिशन में भाग लेने कतर पहुंचे थे। तस्वीर-सोशल मीडिया

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कतर में हुए दोहा फोरम में हिस्सा लिया। यहां उन्होंने डी-डॉलराइजेशन, रूस यूक्रेन वॉर, भू-मध्य सागर और दुनिया भर में फैले तनाव पर बात की। विदेश मंत्री ने बताया कि कैसे भारत, रूस और यूक्रेन से सीधे बात कर रहा है और दोनों देशों को एक-दूसरे के मैसेज पहुंचा रहा है।

दोहा फोरम में डी-डॉलराइजेशन के मुद्दे पर जयशंकर ने कहा कि हमने कभी इसकी वकालत नहीं की है और फिलहाल ब्रिक्स करेंसी का कोई प्रस्ताव नहीं है। ब्रिक्स देश इसे लेकर अलग अलग रुख रखते हैं।

दरअसल, डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी डॉलर के अलावा किसी और करेंसी में ट्रेड करने पर BRICS देशों पर 100% टैरिफ लगाने की बात कही है। BRICS में भारत, रूस और चीन समेत 9 देश शामिल हैं। यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों का समूह है।

वक्त की सुई युद्ध की जगह डायलॉग की तरफ बढ़ रही दुनिया भर में फैले तनाव पर जयशंकर ने कहा- हम आपस की साझा कड़ियां तलाश रहे हैं, जिन्हें सही वक्त आने पर इस्तेमाल किया जा सके। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारतीय विदेश मंत्री ने कहा-

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अब वक्त की सुई युद्ध की जगह बातचीत की तरफ बढ़ रही है। वॉर की वजह से विकासशील देशों को महंगाई, भोजन, फ्यूल और फर्टिलाइजर की ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ रहा है।

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भारत ग्लोबल साउथ की भावनाओं को जाहिर कर रहा दोहा फोरम में जयशंकर ने बताया कि भारत ग्लोबल साउथ की भावनाओं और हितों को जाहिर कर रहा है। युद्ध की वजह से 125 देश प्रभावित हुए हैं। पिछले कुछ हफ्तों और महीनों में मैंने यूरोपीय नेताओं को भी इस बारे में बात करते देखा है। ये यूरोपीय नेता हमसे रूस और यूक्रेन से बात जारी रखने के लिए कह रहे हैं।

दुनिया के अलग-अलग हिस्से में जारी संघर्ष पर जयशंकर ने कहा कि डिप्लोमैट्स को दुनिया की हकीकत पहचान कर आगे बढ़ना चाहिए।

भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि जैसे-जैसे हमारे चारों ओर संघर्ष बढ़ रहा है, यह वक्त की जरूरत है कि डिप्लोमेसी को कम न किया जाए, बल्कि उसे और बढ़ाया जाए।

भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि जैसे-जैसे हमारे चारों ओर संघर्ष बढ़ रहा है, यह वक्त की जरूरत है कि डिप्लोमेसी को कम न किया जाए, बल्कि उसे और बढ़ाया जाए।

IISS मनामा डायलॉग में शामिल होने बहरीन जाएंगे भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान के इनविटेशन पर दोहा फोरम में शामिल होने पहुंचे थे। यह दोहा फोरम का 22वां एडिशन था, जिसकी थीम ‘नए युग में संघर्ष समाधान’ थी। इसके बाद जयशंकर 8-9 दिसंबर को बहरीन जाएंगे। जहां वो IISS मनामा डायलॉग में भाग लेंगे।

दोहा फोरम में एस जयशंकर ने कहा कि डिप्लोमैट्स को दुनिया की हकीकत पहचान कर आगे बढ़ना चाहिए।

दोहा फोरम में एस जयशंकर ने कहा कि डिप्लोमैट्स को दुनिया की हकीकत पहचान कर आगे बढ़ना चाहिए।

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