[ad_1]
![]()
नई दिल्ली: कंगाली की मार झेल रहे पाकिस्तान पर अब एक और मुसीबत मंडराने लगी है। पाकिस्तान जल्द ही बूंद-बूंद पानी के लिए तरसेगा। वैसे दुनिया जानती है कि पाकिस्तान भारत को फूटी आंख भी नहीं पसंद करता है। भारत की तरक्की उसे रास नहीं आती है। अंतराष्ट्रीय मंच पर भी पाकिस्तान भारत को बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ता है। इसके अलावा अपनी पनाह में आतंकियों को पालता है और फिर भारत पर हमला करवाता है। यही कारण है कि दोनों देश के बीच कभी रिश्ते ठीक नहीं हो पाए। अब भारत के इस कदम से एक बार फिर पाकिस्तान को झटका लगने वाला है। क्योंकि अब रावी नदी का पानी पाकिस्तान की तरफ नहीं जा सकेगा।
शाहपुर कंडी बैराज परियोजना
भारत पिछले कई साल से रावी नदी पर बांध बनवा रहा था। रावी नदी पर बन रहा ये बांध अब पूरा हो चुका है। इसी रावी नदी का पानी पाकिस्तान में जाता था। रिपोर्ट के मुताबिक अब इस रावी नदी का पानी जो पाकिस्तान की तरफ प्रवाह होता था उसे पूरी तरह से रोक दिया गया है। कई सालों से पाकिस्तान में इस नदी के पानी का बड़ा हिस्सा बहकर जाता था लेकिन अब शाहपुर कंडी बैराज परियोजना पूरा होने पर पानी को रोक दिया गया है।
सिंधु जल संधि
विश्व बैंक की देखरेख में साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। जिसके मुताबिक भारत के पास तीन पूर्वी नदियों रावी, व्यास और सतलुज के पानी के इस्तेमाल का अधिकार दिया गया था। वहीं इस संधि के मुताबिक पाकिस्तान के पास सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी पर अधिकार है। बता दें कि रावी नदी का अधिकांश पानी पाकिस्तान के पास चला जाता था। जिसे रोकने और भारत के अन्य राज्यों में पानी की पूर्ति के लिए इस शाहपुर कंडी बैराज परियोजना का निर्माण कराया गया।
45 साल बाद पूरा शाहपुर कंडी बैराज परियोजना
1960 में अधिकार मिलने के बाद पंजाब के पठानकोट जिले में स्थित शाहपुर कंडी बैराज बनाने का फैसला लिया गया था। लेकिन इस बीच जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सरकारों के बीच घरेलू विवाद के कारण इसका काम रुका हुआ था। जिसके बाद परियोजना अधर में लटक गयी, लेकिन साल 1979 में, पंजाब और जम्मू-कश्मीर सरकार ने पाकिस्तान को पानी रोकने के लिए रंजीत सागर बांध और डाउनस्ट्रीम शाहपुर कंडी बैराज बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। उस वक्त समझौते पर जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन सीएम शेख मोहम्मद अब्दुल्ला और उनके पंजाब समकक्ष प्रकाश सिंह बादल ने हस्ताक्षर किए थे।
जिसके बाद साल 1982 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस परियोजना शिलान्यास किया और अंदाजा लगाया गया था कि यह परियोजना 1998 तक पूरी हो जायेगी। इस दौरान रणजीत सागर बांध का निर्माण 2001 में कंप्लीट हो गया, लेकिन शाहपुर कंडी बैराज काम फिर से अधर में लटक गया। जिसके बाद साल 2018 में इस मामले में केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप किया और दोनों राज्यों के बीच पनपे विवाद को समाप्त किया और उसके बाद इस परियोजना पर काम शुरू हो गया।
[ad_2]
Source link
