Qatar Former Indian Navy Officials Case | Indian Navy Officials PM Modi S Jaishankar | ठोस सबूत नहीं फिर भी भारतीयों को सुनाई सजा-ए-मौत; इनकी उम्र 60 साल से ज्यादा

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दोहा/नई दिल्ली2 मिनट पहलेलेखक: अभिनंदन मिश्रा

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फोटो- भारतीय नौसेना का प्रतीकात्मक है।

कतर ने भारतीय नौसेना के जिन 8 पूर्व अफसरों को मौत की सजा सुनाई है, उनसे पूछताछ के दौरान सख्ती की गई थी। यह खुलासा कतर की राजधानी दोहा में मौजूद भास्कर के सूत्रों ने किया है।

कतर की इंटेलिजेंस एजेंसी ‘कतर स्टेट सिक्योरिटी’ ने पिछले साल अगस्त में इन पूर्व अफसरों गिरफ्तार किया था।

देर रात गिरफ्तारी हुई थी

  • सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आठ लोगों में एक नाविक भी शामिल है। इन्हें देर रात गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद एक सुरक्षित ठिकाने पर ले जाया गया और सभी से अलग-अलग पूछताछ की गई। पूछताछ का जो तरीका अपनाया गया, वो अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन और गैरकानूनी था।
  • यहां ये जान लेना जरूरी है कि गिरफ्तार किए गए पूर्व भारतीय अफसरों में ज्यादातर की उम्र 60 साल से ज्यादा है और उन्हें सेहत संबंधी दिक्कतें हैं। इसके बावजूद उनसे जो सलूक किया गया, उससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गलत असर पड़ा।
  • हालांकि तमाम सख्तियों के बावजूद कतर के अधिकारी भारतीय अधिकारियों से आरोप कबूल नहीं करा सके। ये सभी कतर की कंपनी ‘दाहरा ग्लोबल’ के लिए काम करते थे।
दिसंबर 2022 में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में बताया था कि पूर्व नौसैनिकों की रिहाई एक संवेदनशील मामला है। यह हमारी प्राथमिकता में शामिल है।

दिसंबर 2022 में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में बताया था कि पूर्व नौसैनिकों की रिहाई एक संवेदनशील मामला है। यह हमारी प्राथमिकता में शामिल है।

विदेश मंत्री से मिलेंगे परिवार

  • नौसेना के इन पूर्व अधिकारियों के परिवार 30 अक्टूबर (सोमवार) को रात 8 बजे विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान पूछताछ में सख्ती समेत कई मुद्दों पर बातचीत होगी। इन परिवारों ने जयशंकर से मुलाकात के लिए कई बार कोशिश की, लेकिन 27 अक्टूबर को पहली बार उन्हें जवाब मिला।
  • हैरानी की बात ये है कि भारत और कतर की सरकार ने अब तक सार्वजनिक तौर पर ये नहीं बताया है कि 14 महीने से कतर की कैद में मौजूद इन भारतीयों पर आरोप क्या हैं और उन्हें सजा-ए-मौत क्यों सुनाई गई। इतने खुफिया तरीके से हुई सुनवाई और फिर सजा के ऐलान पर न सिर्फ सवालिया निशान लग रहे हैं, बल्कि इसकी आलोचना भी हो रही है।
  • भास्कर ने कतर में दो कानूनी जानकारों से अदालत के दस्तावेजों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की, लेकिन इन्होंने ‘सरकारी आदेश’ का हवाला देते हुए मदद करने में असमर्थता जताई। अदालत के दस्तावेज न तो सार्वजनिक किए गए हैं और न ही पीड़ित परिवारों को मुहैया कराए गए हैं। मीडिया में कयास लगाए जा रहे हैं कि इन पूर्व अधिकारियों को पनडुब्बी परियोजना से जुड़ी अहम जानकारी लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और बाद में उन्हें सजा-ए-मौत सुनाई गई। यह पनडुब्बी प्रोजेक्ट इटली की एक कंपनी चला रही है।
  • इस मामले में एक चौंकाने वाली बात यह भी है कि इटली की जिस कंपनी (फिनकेनतिरेई) को प्रोजेक्ट होल्डर बताया जा रहा है, वो इसमें भागीदारी से इनकार कर चुकी है। भास्कर से बातचीत में इस कंपनी की प्रवक्ता मिकेलिया लोंगो ने कहा- मीडिया कतर के प्रोजेक्ट से हमें गलत जोड़ रहा है। हम कतर के लिए कोई पनडुब्बी नहीं बना रहे और न ही हमारे पास ऐसा कोई ठेका है।

कतर के पास सबूत नहीं

  • सूत्रों के मुताबिक कतर की एजेंसियों के पास इस बात के कोई ठोस सबूत नहीं है कि भारत के पूर्व नौसेना अधिकारियों ने इजराइल के लिए जासूसी की। इस बात की पुष्टि पूर्व नेवी कमांडर पूर्णेंदु तिवारी के परिवार ने भी की है। तिवारी को 2019 में प्रवासी भारतीय सम्मान मिला था।
  • भास्कर से बातचीत में तिवारी की बहन मीतू भार्गव ने कहा- कतर के पास कथित तौर पर एक ही सबूत है कि इन भारतीयों ने कतर की इंडियन एम्बेसी में तैनात डिफेंस अटाशै (रक्षा मामले देखने वाले अफसर) मोहन अतला से बातचीत की। मोहन को इसी साल जनवरी में इस पोस्ट से हटा दिया गया था। भारत सरकार ने इसके बाद इस पद पर नई तैनाती नहीं की। घटना के वक्त दीपक मित्तल दोहा में भारतीय राजदूत थे। उन्हें भी वापस बुलाया जा चुका है।
  • तिवारी की बहन ने भास्कर से कहा- हम जानते हैं कि भारत सरकार इन आठ लोगों की रिहाई के लिए कोशिश कर रही है। ये बेकसूर होने के बावजूद शारीरिक और मानसिक यातना झेल रहे हैं। कतर के फैसले से दिल टूट गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से अपील करते हैं कि वो वो बिना देर किए इन लोगों की रिहाई के लिए पहल करें, ताकि सभी लोगों को भारत वापस लाया जा सके।
कतर में गिरफ्तार किए गए इंडियन नेवी के पूर्व अफसर पूर्णेंदु तिवारी।

कतर में गिरफ्तार किए गए इंडियन नेवी के पूर्व अफसर पूर्णेंदु तिवारी।

ये हैं आठ पूर्व अफसर

  • कतर में जिन 8 पूर्व नौसेना अफसरों को मौत की सजा दी गई है उनके नाम हैं- कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी, कमांडर सुग्नाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और सेलर रागेश।
  • कतर की जिस कंपनी के लिए ये भारतीय काम करते थे, उसके CEO खामिस अल आजमी को भी कुछ वक्त के लिए हिरासत में लिया गया था, हालांकि बाद में छोड़ दिया गया। आजमी ओमान एयरफोर्स में अफसर रह चुके हैं। खास बात ये है कि आजमी अब भी इस कंपनी के CEO हैं। हालांकि अब इस कंपनी का नाम बदलकर ‘एडवांस्ड सर्विसेज एंड मेंटेनेंस’ कर दिया गया है।
  • पीड़ित परिवारों के एक और सदस्य ने भास्कर से कहा कि 14 महीनों से इस मामले में भारत सरकार का रवैया नींद में रहने जैसा है। अब जबकि आठ लोगों को मौत की सजा का ऐलान कर दिया गया है तो वो सजग नजर आने लगी है। इस सदस्य ने कहा- दोहा में मौजूद सरकारी अफसर भी तब एक्टिव नजर आए जब मीडिया ने सवाल उठाए। इसके पहले तो हमारी अपील सुनी ही नहीं गई। सभी परिवारों ने अपने स्तर पर नेताओं से संपर्क की कोशिश की, लेकिन नतीजा कुछ खास नहीं निकला। इस मामले को जिस तरह से डील किया गया, उससे हम दुखी हैं।
  • सूत्रों के मुताबिक कतर में भारतीय दूतावास ने इस मामले में जो पहला वकील किया था, उसे भी बदलना पड़ा, क्योंकि वो सही तरीके से दलीलें पेश नहीं कर पा रहा था। भारतीय नौसेना के ये पूर्व अधिकारी आर्थिक तौर पर काफी सक्षम हैं और दोहा जाने से पहले उन्होंने अपनी तमाम जिम्मेदारियों को पूरा किया था।
  • कतर की कंपनी से इस्तीफा दे चुके एक पूर्व इंजीनियर ने भास्कर से कहा- हम सोच भी नहीं सकते कि वो जासूसी करेंगे। उन्हें इसकी जरूरत भी नहीं है। उन्हें अच्छी सैलरी मिलती थी। बाद में अच्छी पेंशन मिलने लगी और वो अच्छी जिंदगी गुजार रहे थे। सब जानते हैं कि उन्हें फंसाया गया है और इसके पीछे दुनिया की रक्षा कंपनियों की प्रतिस्पर्धा है।

1. कैप्टन नवतेज सिंह गिल: हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार कैप्टन नवतेज सिंह गिल चंडीगढ़ के हैं। उनके पिता आर्मी के रिटायर्ड अफसर हैं। वे देश के फेमस डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन, तमिलनाडु में इंस्ट्रक्टर रह चुके हैं। उन्हें बेस्ट कैडट रहने पर राष्ट्रपति अवॉर्ड दिया जा चुका है।

2019 में प्रवासी भारतीय सम्मान में पूर्णेंदु तिवारी को सम्मानित करते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, नजदीक हैं तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज। तिवारी को ये सम्मान उस समय दिया गया था, जब वे कतर में वहां की नौ सेना को ट्रेनिंग दे रहे थे।

2019 में प्रवासी भारतीय सम्मान में पूर्णेंदु तिवारी को सम्मानित करते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, नजदीक हैं तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज। तिवारी को ये सम्मान उस समय दिया गया था, जब वे कतर में वहां की नौ सेना को ट्रेनिंग दे रहे थे।

2. कमांडर पूर्णेंदु तिवारी: नेवी के टॉप ऑफिसर रह चुके हैं। नेविगेशन के एक्सपर्ट हैं। युद्धपोत INS “मगर’ को कमांड करते थे। दाहरा कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर रिटायर्ड कमांडर पूर्णेंदु तिवारी को भारत और कतर के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में उनकी सेवाओं के लिए 2019 में प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार मिला था। ये पुरस्कार उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिया था। वह यह पुरस्कार पाने वाले आर्म्ड फोर्सेज के एक मात्र शख्स हैं।

3. कमांडर सुगुनाकर पकाला: टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, 54 वर्षीय सुगुनाकर पकाला विशाखापट्‌टनम के रहने वाले हैं। नौसैनिक के तौर पर उनका कार्यकाल शानदार रहा है। उन्होंने 18 साल की उम्र में ही नेवी जॉइन की थी। वे नवंबर 2013 में इंडियन नेवी से रिटायर हुए थे। इसे बाद उन्होंने कतर की कंपनी अल दाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी को जॉइन किया था।

4. कमांडर संजीव गुप्ता को गनरी स्पेशलिस्ट के तौर जाना जाता है। कमांडर वो पद होता है जो किसी यूनिट के ऑपरेशन का हेड होता है।

5. कमांडर अमित नागपाल नौसेना में कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉर सिस्टम के एक्सपर्ट हैं।

6 .कैप्टन सौरभ वशिष्ठ की पहचान तेज-तर्रार टेक्निकल ऑफिसर के तौर पर होती है। उन्होंने कई मुश्किल ऑपरेशन को अंजाम दिया है।

7. कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा को उनके नेविगेशनल एक्सपर्टिज के लिए पहचाना जाता है।

8. नाविक रागेश नौसेना में मेनटेनेंस और हेल्पिंग हैंड के रूप में काम करते थे।

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कतर की एक अदालत ने भारत के 8 पूर्व नौसैनिकों को मौत की सजा सुनाई है। ये एक साल से कतर की अलग-अलग जेलों में कैद हैं। कतर में जिन 8 पूर्व नौसेना अफसरों को मौत की सजा दी गई है उनके नाम हैं- कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी, कमांडर सुग्नाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और सेलर रागेश। पूरी खबर पढ़ें

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