Pakistan Election 2024 Postponement Controversy; Shehbaz Sharif | PAK Senate | पाकिस्तान में चुनाव टलने के कयास: पूर्व PM शाहबाज बोले- इसके गंभीर नतीजे होंगे; सीनेट चाहती है इलेक्शन पोस्टपोन किए जाएं

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इस्लामाबाद27 मिनट पहले

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शाहबाज शरीफ का कहना है कि देश में चुनाव टाले गए तो इसके नुकसान बहुत ज्यादा होंगे। (फाइल)

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने कहा है कि देश में 8 फरवरी को होने वाले इलेक्शन टलने का विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा- हमें मालूम है कि सीनेट के कुछ मेंबर्स इसकी मांग कर रहे हैं, लेकिन ये फैसला खतरनाक हो सकता है।

दूसरी तरफ, कुछ दिन पहले इलेक्शन कमीशन ने सुप्रीम कोर्ट को बता चुका है कि वो चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है और अब तक ऐसी कोई दिक्कत सामने नहीं आई है, जिसकी वजह से चुनाव टाले जाएं।

देश को नुकसान होगा

  • ‘जियो न्यूज’ को दिए इंटरव्यू में शाहबाज शरीफ ने कहा- अगर अब जबकि इलेक्शन में चंद दिन ही बचे हैं, इसे टाला जाता है तो मुल्क के लिए बहुत मुश्किल और खतरनाक फैसला होगा। हम इसका सड़कों पर भी विरोध करेंगे।
  • 16 महीने सरकार चला चुके शाहबाज ने कहा- मैं नहीं जानता कि सीनेट के कुछ मेंबर्स इलेक्शन क्यों नहीं चाहते। मैं सिर्फ इतना जानता हूं कि अगर इलेक्शन हुए तो पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (PML-N) फुल मेजॉरिटी हासिल करेगी और सरकार बनाएगी। नवाज शरीफ फिर प्रधानमंत्री बनेंगे। हम चाहते हैं कि पाकिस्तान में सियासी स्थिरता आए और मुल्क दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चले।
  • एक सवाल के जवाब में पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा- कुछ लोग कह रहे हैं कि ईरान और पाकिस्तान के बीच बड़ी जंग छिड़ सकती है और मुल्क की इकोनॉमी भी अच्छी नहीं है। मेरा उनसे सवाल है कि क्या ये हालात हमारे तीन बॉर्डर्स पर आज पैदा हुए हैं? ये लंबे वक्त से हैं और चुनाव टालने के लिए ये बहाना दुनिया में हमारी पोजिशन खराब ही करेगा।

इमरान पर गोलमोल जवाब
शाहबाज से जब यह पूछा गया कि क्या जरूरत पड़ने पर उनकी पार्टी इमरान खान की पार्टी पीटीआई से हाथ मिलाएगी? उन्होंने कहा- देश को सियासी स्थिरता की जरूरत है और हमें हर मामले में एक पेज पर रहना होगा। 9 मई 2023 को इमरान और उनकी पार्टी ने फौज के ठिकानों पर हमला करके गद्दारी की थी और इसके नतीजे उन्हें भुगतना होंगे।
शरीफ ने आगे कहा- कौन नहीं जानता कि 9 मई कि घटना के पीछे फौज और ज्यूडिशियरी के भी कुछ लोग शामिल थे। सच्चाई ये है कि अब इन लोगों को भी कानून के कठघरे में लाया जा चुका है और बहुत जल्द इन्हें सजा भी मिलेगी।

इमरान से हाथ मिला सकते हैं जरदारी
कुछ दिन पहले आसिफ अली जरदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) का अहम बयान सामने आया था। PPP ने कहा कि वो इलेक्शन के मद्देनजर दूसरी पार्टियों से गठबंधन कर सकती है। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) भी शामिल है। इमरान अगस्त से जेल में हैं। उन्हें करप्शन केस में सजा सुनाई गई है।

बिलावल भुट्टो शाहबाज सरकार में विदेश मंत्री थे। उनके पिता आसिफ अली जरदारी चाहते हैं कि बिलावल प्रधानमंत्री बनें। इसके लिए वो सियासी दांव-पेंच खेल रहे हैं। (फाइल)

बिलावल भुट्टो शाहबाज सरकार में विदेश मंत्री थे। उनके पिता आसिफ अली जरदारी चाहते हैं कि बिलावल प्रधानमंत्री बनें। इसके लिए वो सियासी दांव-पेंच खेल रहे हैं। (फाइल)

बिलावल की नजर कुर्सी पर

  • आसिफ अली जरदारी पूर्व राष्ट्रपति हैं। इमरान के दौर में कई विपक्षी नेताओं को जेल भेजा गया था। आसिफ अली जरदारी भी इनमें शामिल रहे हैं। पहले खबरें थीं कि PPP और नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज (PML-N) अलायंस कर सकते हैं। कुछ दिन पहले जब नवाज शरीफ लंदन से पाकिस्तान लौटे तो जरदारी की सोच बदल गई।
  • दरअसल, जरदारी अपने बेटे बिलावल भुट्टो को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहते हैं, लेकिन नवाज की वापसी ने सियासी पलड़ा PML-N की तरफ झुका दिया है। फौज भी नवाज के साथ नजर आ रही है। अदालतों से भी उन्हें वहीं राहत मिल रही है, जो पिछले इस साल जुलाई तक इमरान खान को मिलती थी। लिहाजा, अब पाकिस्तान की सियासत में बदलाव देखने मिल सकते हैं।
  • पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सीनियर लीडर राणा फारूक सईद ने लाहौर में कहा- हम दूसरी पार्टियों के साथ चुनावी गठबंधन कर सकते हैं। इसमें PTI भी शामिल है, क्योंकि हमें नवाज की पार्टी PML-N से मुकाबला करना है।

इस बयान के मायने क्या

  • आमतौर पर इस तरह के अहम सियासी बयान आसिफ अली जरदारी या बिलावल भुट्टो की तरफ से आते हैं। इस दफा ये बयान जरदारी परिवार के बाहर से आया है और इसकी टाइमिंग भी मायने रखती है। दरअसल, नवाज शरीफ के चार साल बाद मुल्क लौटने के बाद से अब तक जरदारी परिवार का कोई सदस्य उनसे मुलाकात करने भी नहीं गया।
  • इसके अलावा इस स्टेटमेंट के पीछे एक वजह और है। कुछ दिन पहले नवाज की पार्टी के नेता सैयद फाजिल ने कहा था कि उनकी पार्टी सिंध प्रांत में मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) से अलायंस कर सकती है।
  • जरदारी परिवार इसी बात से नाराज है। इसकी वजह यह है कि सिंध प्रांत को इस परिवार और पीपीपी का गढ़ माना जाता है। बीस साल से ज्यादा गुजरे, लेकिन सत्ता पर इसी पार्टी का कब्जा है। दूसरी तरफ, MQM ही वो पार्टी है जो पीपीपी को चुनौती देने की ताकत रखती है। इसलिए, नवाज की पार्टी उससे गठबंधन की बातें कर रही है। इसी सियासी दांव का जवाब देने के लिए पीपीपी ने इमरान की पार्टी से गठबंधन का बयान एक सीनियर लीडर से दिलवाया है।
9 मई 2023 को पाकिस्तानी फौज और ISI के साथ ही मुल्क के कुछ ऐतिहासिक महत्व के संस्थानों पर हमले हुए थे। 14 लोगों की मौत हुई थी। हमले का इलजाम सीधे तौर पर इमरान की पार्टी PTI पर लगा था। खान को अब मिलिट्री कोर्ट में केस लड़ना होगा। (फाइल)

9 मई 2023 को पाकिस्तानी फौज और ISI के साथ ही मुल्क के कुछ ऐतिहासिक महत्व के संस्थानों पर हमले हुए थे। 14 लोगों की मौत हुई थी। हमले का इलजाम सीधे तौर पर इमरान की पार्टी PTI पर लगा था। खान को अब मिलिट्री कोर्ट में केस लड़ना होगा। (फाइल)

सियासत में रंजिश न करें

  • PPP लीडर राणा फारूक सईद के बयान में एक और अहम बात है। उन्होंने कहा- सियासी गठजोड़ बनते और टूटते रहते हैं। इसमें कोई नई बात नहीं है, लेकिन निजी रंजिश की कोई गुंजाइश सियासत में नहीं होनी चाहिए। अगर इलेक्शन में किसी पार्टी को हिस्सा लेने से रोका गया तो हम चुनाव के नतीजों को कबूल नहीं करेंगे।
  • अब इसके मायने समझिए। दरअसल, 9 मई को पाकिस्तानी फौज और ISI के साथ ही मुल्क के कुछ ऐतिहासिक महत्व के संस्थानों पर हमले हुए थे। 14 लोगों की मौत हुई थी। हमले का इलजाम सीधे तौर पर इमरान की पार्टी PTI पर लगा।
  • PTI के 1200 से ज्यादा नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। कुछ पर मिलिट्री कोर्ट्स में केस चल रहे हैं। इमरान भी इस केस में आरोपी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक- इलेक्शन कमीशन 9 मई हिंसा मामले में PTI को बतौर पॉलिटिकल पार्टी हिस्सा लेने से रोक सकता है।
  • अगर ऐसा होता है तो पीपीपी को कोई सहयोगी पार्टी गठबंधन के लिए नहीं मिलेगी और नवाज की PML-N को एक तरह से वॉकओवर मिल जाएगा। पीपीपी का सिंध के बाहर ज्यादा वोट बैंक भी नहीं है। उसे लगता है कि हारने से पहले ही वो इलेक्शन कमीशन और अदालतों को दबाव में ले आए।

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