Myanmar airstrike; People defence forces, military Coup; Operation 1027 | 5 हजार लोग भागकर मिजोरम पहुंचे; 2021 में तख्तापलट के बाद से 30 हजार लोगों ने पनाह ली

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3 घंटे पहले

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म्यांमार में सेना के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन से जुड़ी तस्वीरें।

म्यांमार में मंगलवार को सेना भारत से लगी सीमा के पास एयरस्ट्राइक की, जिसके बाद करीब 5 हजार लोग भागकर मिजोरम आ गए। दरअसल, रविवार से म्यांमार में पीपुल्स डिफेंस फोर्सेस (PDF) और मिलिट्री के बीच में मुठभेड़ चल रही थी। इस दौरान घायल लोग मिजोरम के चम्फाई शहर पहुंचे, जहां उनका इलाज चल रहा है।

चम्फाई के डिप्टी कमिश्नर जेम्स लालरिंचना ने बताया कि इस लड़ाई की शुरुआत तब हुई जब PDF ने भारतीय सीमा के पास स्थित म्यांमार के चिन राज्य में खावमावी और रिहखावदार में दो सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया। उन्होंने रिहखावदार सैन्य अड्डे को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद उन्होंने खावमावी सैन्य अड्डे पर भी दोपहर तक कंट्रोल कर लिया।

PDF और सेना के खिलाफ लड़ रही दूसरी फोर्सेज ने कई मिलिट्री बेस पर कब्जा कर लिया है।

PDF और सेना के खिलाफ लड़ रही दूसरी फोर्सेज ने कई मिलिट्री बेस पर कब्जा कर लिया है।

PDF के 5 लड़ाकों की मौत
इसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए म्यांमार की मिलिट्री ने खावमावी और रिहखावदार गांवों पर हवाई हमले किए। इसमें एक 51 साल के व्यक्ति की मौत भी हो गई। इसके अलावा करीब PDF के करीब 5 लोगों ने हमले में जान गंवाई है। मिजोरम के 6 जिले चम्फाई, सियाहा, लांग्टलाई, सेरछिप, हनाथियाल और सैतुअल म्यांमार के चिन राज्य के साथ 510 किमी लंबी सीमा साझा करते हैं।

2021 के तख्तापलट के बाद से करीब 30 हजार चिन शरणार्थी यहां रहते हैं। इससे पहले अप्रैल में म्यांमार सेना ने हवाई हमले किए थे, जिसमें करीब 100 लोग मारे गए थे। हमला पाजीगी कस्बे में हुआ था। आर्मी ने यह हमला तब किया था जब पाजीगी शहर में PDF का ऑफिस खोल रहे थे। दरअसल, PDF देश में मिलिट्री के खिलाफ अभियान चला रही है। हमले के वक्त 300 से ज्यादा लोग वहां मौजूद थे।

PDF ने सेना के हथियारों को भी जब्त कर लिया।

PDF ने सेना के हथियारों को भी जब्त कर लिया।

2021 में तख्तापलट के बाद से म्यांमार में इमरजेंसी
म्यांमार में सेना ने 1 फरवरी 2021 को तख्तापलट कर दिया था। वहां की लोकप्रिय नेता और स्टेट काउंसलर आंग सान सू की और राष्ट्रपति विन मिंट समेत कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद मिलिट्री लीडर जनरल मिन आंग हलिंग ने खुद को देश का प्रधानमंत्री घोषित कर दिया था। सेना ने देश में 2 साल के आपातकाल की घोषणा की थी।

दरअसल, म्यांमार में नवंबर 2020 में आम चुनाव हुए थे। इनमें आंग सान सू की पार्टी ने दोनों सदनों में 396 सीटें जीती थीं। वहीं विपक्ष की यूनियन सॉलिडैरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी ने दोनों सदनों में मात्र 33 सीटें ही जीतीं। इस पार्टी को सेना का समर्थन हासिल था।

नतीजे आने के बाद सेना ने इस पर सवाल खड़े कर दिए। सेना ने चुनाव में सू की की पार्टी पर धांधली करने का आरोप लगाया था। चुनाव नतीजों के बाद से ही सरकार और सेना के बीच मतभेद शुरू हो गया, जिसके बाद सेना ने तख्तापलट कर दिया था।

म्यांमार में तख्तापलट के बाद से सेना ने 6,000 लोगों को मारा
पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक म्यांमार में साल 2021 में हुए तख्तापलट के बाद से सेना 6,000 लोगों को मार चुकी है। म्यामांर लगातार विरोधियों को फांसी की सजा भी दे रहा है। द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक म्यामांर में हवाई हमले रोज की कहानी बनते जा रहे हैं। सेना अपने विरोधियों को ढूंढ़ने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। इसके चलते वो आम लोगों को निशाना बना रही है।

म्यांमार मिलिट्री को भारत से मिले 420 करोड़ के हथियार
म्यांमार की मिलिट्री ने 2021 में तख्तापलट के बाद 1 बिलियन डॉलर यानी 8 हजार करोड़ के हथियार खरीदे हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के एक्सपर्ट के मुताबिक ये खरीद म्यांमार की सेना ने उस पर लगी पाबंदियों के बावजूद की है। ज्यादातर हथियार रूस, चीन और सिंगापुर की कंपनियों से खरीदे गए हैं।

वहीं, भारत की कंपनियों से भी म्यांमार की सेना को पिछले 2 सालों में 420 करोड़ के हथियार और उससे जुड़ा सामान मिला है। UN की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात के पुख्ता सुबूत हैं कि सेना ने इन हथियारों का इस्तेमाल लोगों के खिलाफ हिंसा करने में किया है। इसके बावजूद कुछ देशों ने बिना रुके सेना को हथियार पहुंचाए हैं।

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