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28 मिनट पहले
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तस्वीर मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की है। (फाइल)
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने कहा है कि अगर भारत अपनी सेना को नहीं हटाएगा तो यह मालदीव के लोगों की लोकतांत्रिक आजादी का अपमान होगा। यह मालदीव में लोकतंत्र के भविष्य के लिए खतरा होगा। मीडिया हाउस टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रपति मुइज्जू ने भारत के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई।
उन्होंने कहा कि ये आपसी सम्मान और विश्वास पर आधारित है। मुइज्जू ने भरोसा जताया कि मालदीव से भारत की सैन्य उपस्थिति के मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश में बिना संसद की इजाजत के दूसरे देश की सेना की उपस्थिति संविधान के खिलाफ है। इसके साथ ही उन्होंने चीन और भारत के साथ रिश्तों से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए…

COP28 समिट में PM मोदी और राष्ट्रपति मुइज्जू ने दोनों देशों के रिश्ते मजबूत करने पर चर्चा की थी।
मुइज्जू बोले- भारत का सम्मान और उन पर विश्वास करते हैं
मालदीव के विकास और क्षेत्रीय सुरक्षा में भारत की भूमिका और इंडिया फर्स्ट पॉलिसी पर राष्ट्रपति मुइज्जू ने कहा- भारत हमारा सबसे करीबी पड़ोसी है। वो हमारे खास दोस्तों में से एक है। दोनों देशों में ऐतिहासिक तौर पर बहुत सी समानताएं रही हैं। ट्रेड, टूरिज्म और कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में हमारे रिश्ते तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। 2023 में भारत से मालदीव में सबसे ज्यादा टूरिस्ट आए।
मालदीव-भारत समुद्र के रास्ते से जुड़े हुए हैं। भारत हमारी नेशनल डिफेंस फोर्स को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है। हम भारत का सम्मान और उन पर भरोसा करते हैं। हमें पूरा विश्वास है कि हमारे साथ भारत के रिश्तों का भी यही आधार है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चीन समर्थक कहे जाने पर मालदीव के राष्ट्रपति ने कहा- हम किसी भी देश के समर्थक या उसके विद्रोह में नहीं हैं। मेरी सरकार सिर्फ मालदीव के लोगों के पक्ष में है। जो भी नीतियां मालदीव के लोगों के पक्ष में होगी, हम उन पर अमल करेंगे। हमारा मकसद देश की आर्थिक स्थिति को और बेहतर करना है, जिससे हम हिंद महासागर में शांति और स्थिरता बनाए रखने में बेहतर भूमिका निभा सकें।
‘भारतीय सैनिकों को हटाना मालदीव के लोगों की इच्छा है’
भारत की सैन्य मौजूदगी के मुद्दे पर टाइम्स ऑफ इंडिया ने सवाल पूछा कि भारत अपने सैनिकों को बाहर निकालने की आपकी जिद से चिंतित है। यदि वे जाते हैं, तो नौसेना के हेलिकॉप्टरों और विमानों जैसी भारतीय संपत्तियों या प्लैटफॉर्म्स का क्या होगा। इसने स्थानीय लोगों की जान बचाने और अन्य HADR गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है?
इस पर मुइज्जू ने जवाब दिया- इस साल के राष्ट्रपति चुनावों में मालदीव के लोगों ने यह साफ कर दिया था कि वो देश में विदेशी सैनिकों की मौजूदगी नहीं चाहते हैं। फिलहाल, भारत ही ऐसा देश है, जिसके सैनिक यहां मौजूद हैं। मालदीव के नागरिकों की इच्छा को देखते हुए ही मैंने भारत से अपने सैनिकों को हटाने के लिए कहा है।
मुझे पूरा भरोसा है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भारत मालदीव के लोगों की इच्छा का सम्मान करेगा। मेरा मानना है कि हमारे द्विपक्षीय रिश्ते इतने मजबूत हैं कि दोनों देश बातचीते के जरिए इस मसले का हल निकाल सकें।
साथ ही बगैर सैन्य उपस्थिति के अपने रिश्तों को और मजबूत कर सकें। मुझे इस बात पर कोई शक नहीं है कि भारत या कोई भी अन्य देश जिसके हित हिंद महासागर से जुड़े हैं, वो हमारे नागरिकों की लोकतांत्रिक इच्छा का सम्मान करेगा।

राष्ट्रपति बोले- हाइड्रोग्राफिक सर्वे एग्रीमेंट रद्द नहीं कर रहे
भारत के साथ हाइड्रोग्राफिक सर्वे एग्रीमेंट भी रद्द करने के मुद्दे पर राष्ट्रपति ने कहा- हमारी सरकार कोई भी एग्रीमेंट रद्द नहीं कर रही है। इस समझौते की एक समय सीमा है और उस तारीख के बाद हम इसे रिन्यू नहीं कर रहे हैं।
इस समझौते का मकसद हमारी राष्ट्रीय एजेंसियों की क्षमता का बढ़ाना है। हमारे पास एक राष्ट्रीय हाइड्रोग्राफी एजेंसी है और जहां भी, जब भी समर्थन की जरूरत होगी, हम अपने सहयोगियों से मदद जरूर लेंगे।
‘हिंद महासागर की तरफ शिफ्ट हो रही जियोपॉलिटिक्स’ राष्ट्रपति मुइज्जू की नई सरकार की विदेश नीति से जुड़े सवाल पर उन्होंने बताया कि ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स अब मेडिटेरनियन से हिंद महासागर की तरफ शिफ्ट हो गया है। इसकी वजह यह है कि ज्यादातर शिपिंग रूट हिंद महासागर से होकर जाते हैं। यह मालदीव के बेहद करीब से गुजरते हैं, इसलिए दुनिया हमें अपनी तरफ खींचना चाहती है।
हमें सतर्क रहना होगा और भू-राजनीतिक स्थिति का सही आकलन करना होगा। एक छोटी सी गलती की वजह से हमें देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता को खोना पड़ सकता है। संचार की समुद्री लाइनों को सुरक्षित करना मालदीव और हिंद महासागर की स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।
इन सबके साथ हमारा मानना है कि मालदीव जियोपॉलिटिकल प्रतिस्पर्धा के लिए बहुत ही छोटा देश है। हम किसी भी पक्ष का साथ नहीं देना चाहते हैं। हमारा मकसद सिर्फ देश और हिंद महासागर की सुरक्षा है। ऐसा करने के लिए हमें अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और स्वतंत्रता के लिए सहयोगी देशों के सम्मान की जरूरत है। हमें चाहिए कि सहयोगी देश हमारे हितों का सम्मान करें।
इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए मेरी विदेश नीति मालदीव की आजादी को बनाए रखने पर केंद्रित होगी।
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