{“_id”:”67b2dd63a2c6560684069c57″,”slug”:”impact-of-u-s-tariff-reciprocity-on-indian-exports-likely-to-be-limited-sbi-2025-02-17″,”type”:”story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”US Tariff: अमेरिका की पारस्परिक टैरिफ का भारत के निर्यात पर क्या असर पड़ेगा, उसका समाधान क्या? एसबीआई ने बताया”,”category”:{“title”:”Business Diary”,”title_hn”:”बिज़नेस डायरी”,”slug”:”business-diary”}}
भारतीय स्टेट बैंक – फोटो : amarujala.com
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व्यापार प्रतिबंधों से जुड़ी चिंताओं के बावजूद, भारतीय निर्यात पर ट्रंप प्रशासन की ओर से लगाए जाने वाले पारस्परिक टैरिफ का प्रभाव न्यूनतम रहने की उम्मीद है। भारतीय स्टेट बैंक की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, भले ही अमेरिका 15 से 20 प्रतिशत की उच्च टैरिफ लगाए, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में कुल गिरावट केवल 3 से 3.5 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है।
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एसबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “हमारे अनुमानों से पता चलता है कि अमेरिका की ओर से लगाए गए 15-20 प्रतिशत के समग्र वृद्धिशील टैरिफ स्तर अब भी अमेरिका को निर्यात पर प्रभाव को केवल 3-3.5 प्रतिशत की सीमा तक सीमित रखेंगे।” रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय निर्यात में रणनीतिक विविधता लाकर, उत्पादों और सेवाओं के मूल्य को बढ़ाकर और नए व्यापार मार्गों की खोज से इस प्रभाव की भरपाई की जा सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका भारत का शीर्ष निर्यात गंतव्य बना हुआ है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल निर्यात में अमेरिका निर्यात का हिस्सा 17.7 प्रतिशत है। हालांकि, भारत की निर्यात रणनीति किसी एक बाजार पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में विकसित हो रही है। यूरोप, मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में बढ़ते व्यापार संबंधों के साथ, भारत निर्यात में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अपनी आपूर्ति शृंखला नेटवर्क को मजबूत करने पर काम कर रहा है। जबकि भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ पिछले कुछ वर्षों में अपेक्षाकृत स्थिर रहे हैं, भारत की टैरिफ नीतियां अधिक गतिशील रही हैं।
एसबीआई की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ दर 2018 में 2.72 प्रतिशत से बढ़कर 2021 में 3.91 प्रतिशत हो गई, जो 2022 में थोड़ी कम होकर 3.83 प्रतिशत हो गई। दूसरी ओर, अमेरिकी आयातों पर भारत के टैरिफ में काफी वृद्धि हुई है, जो 2018 में 11.59 प्रतिशत से बढ़कर 2022 में 15.30 प्रतिशत हो गई। टैरिफ संरचनाओं में यह बदलाव भारत की अधिक मुखर व्यापार नीति को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य घरेलू उद्योगों की रक्षा करते हुए व्यापार संबंधों को संतुलित करना है। भारत अपना निर्यात बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और कच्चे माल से तैयार माल व उच्च मूल्य वाले उत्पादों की ओर रुख कर रहा है। यह रणनीति न केवल निर्यात आय को बढ़ाती है, बल्कि यह सुनिश्चित करके टैरिफ वृद्धि के संभावित प्रभाव को भी कम करती है कि भारतीय सामान वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बने रहें।
इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत यूरोप, मध्य पूर्व और अमेरिका को जोड़ने वाले वैकल्पिक व्यापार मार्गों पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है, जिससे रसद लागत कम हो रही है और दक्षता में सुधार हो रहा है। नई आपूर्ति शृंखला विकसित होने से वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद अंतराष्ट्रीय व्यापार में भारत की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, यदि अमेरिका उच्च टैरिफ लागू करता है तो भारत अपनी सक्रिय व्यापार नीतियों, निर्यात विविधीकरण और आपूर्ति शृंखला को नया रूप देकर इसके प्रभाव को कम कर सकता है। इससे लंबे समय में निर्यात बढ़ने की भी उम्मीद है।