चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग।
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को दुनिया भर में पदस्थ चीनी राजनयिकों और वाणिज्य दूतावास के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की। इस दौरान उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व में बढ़ते संघर्ष और आर्थिक मंदी के बीच बीजिंग की राजनयिक प्राथमिकताओं के बारे में चर्चा की। बता दें, पिछले साल सन वेइदोंग की वापसी के बाद से चीन ने भारत में अपना कोई नया राजदूत नियुक्त नहीं किया है।
प्रमुख देशों की कूटनीति में नई संभावनाएं खोलीं
इससे पहले, गुरुवार को जिनपिंग ने विदेशी मामलों से संबंधित दो दिवसीय केंद्रीय सम्मेलन को संबोधित किया था। सम्मेलन के बाद एक आधिकारिक रीडआउट जारी किया गया। इसमें कहा गया कि चीन ने अधिक ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ हासिल की है और शी के नेतृत्व में एक ‘जिम्मेदार प्रमुख देश’ के रूप में उभरा है। बैठक में पिछले वर्ष में चीन की कूटनीतिक प्रगति के बारे में कहा गया कि हमने चीनी विशेषताओं के साथ प्रमुख देशों की कूटनीति में नई संभावनाएं खोली हैं और हमारी कूटनीति में बहुत अधिक रणनीतिक स्वायत्तता और पहल हासिल की।
मूल्यवान अनुभव की व्यवस्थित रूप से समीक्षा की
आधिकारिक बयान के अनुसार अपने भाषण में, राष्ट्रपति शी ने नए युग में चीनी विशेषताओं के साथ प्रमुख देशों की कूटनीति की ऐतिहासिक उपलब्धियों और मूल्यवान अनुभव की व्यवस्थित रूप से समीक्षा की। उन्होंने नई यात्रा में अंतरराष्ट्रीय माहौल और चीन के बाहरी काम के ऐतिहासिक मिशन के बारे में विस्तार से बताया। वर्तमान और भविष्य में चीन के बाहरी काम के लिए व्यापक योजनाएं बनाईं।
70 वर्षीय शी सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक माओत्से तुंग के बाद एकमात्र चीनी नेता हैं, जो पार्टी के मुख्य नेता के रूप में उभरने के बाद अभूतपूर्व तीसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए सत्ता में बने रहे। दुनियाभर में चीन के राजनयिक और सैन्य दबदबे पर जोर दे रहे हैं। जब से उन्होंने 2012 में सत्ता संभाली है।
