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मुंबई5 मिनट पहले
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आरोपी अक्षय शिंदे 17 अगस्त को गिरफ्तार हुआ और 23 सितंबर को पुलिस एनकाउंटर में उसकी मौत हो गई थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बदलापुर यौन शोषण केस के आरोपी के एनकाउंटर मामले में पांच पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश दिए हैं। मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने का भी आदेश दिया है। इसके लिए अदालत ने दो दिन का समय दिया है।
कोर्ट ने एनकाउंटर की FIR दर्ज न करने पर सोमवार को राज्य सरकार की आलोचना की। कोर्ट ने कहा- इससे आम आदमी के क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में विश्वास कमजोर होता है।
राज्य सरकार ने दलील दी थी कि केवल मजिस्ट्रेट की जांच के आधार पर पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज नहीं कर सकते, हम CID की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
एनकाउंटर की मजिस्ट्रेट जांच में पुलिसकर्मियों के आत्मरक्षा में गोली चलाने के दावों पर संदेह जताया गया था। रिपोर्ट में आरोपी की मौत के लिए पांच पुलिसकर्मियों को जिम्मेदार ठहराया गया था।
जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने कहा कि भले ही मृतक के माता-पिता इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते लेकिन अदालत चुप रहकर सब देख नहीं सकती।
आरोपी अक्षय शिंदे के पिता अन्ना शिंदे ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी कि फर्जी मुठभेड़ में उनके बेटे की हत्या की गई थी। हालांकि, बाद में उन्होंने याचिका वापस ले ली थी।

कोर्ट बोला- सिर्फ न्याय होना नहीं, न्याय होते दिखना भी जरूरी पीठ ने मुंबई क्राइम ब्रांच के जॉइंट पुलिस कमिश्नर लखमी गौतम की अगुआई में SIT गठित करने का आदेश दिया है। गौतम को छूट होगी कि वे SIT में अपनी पसंद के अधिकारी चुन सकें। अदालत ने CID को दो दिन के अंदर मामले से जुड़े सभी दस्तावेज SIT को सौंपने को कहा है।
कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट के बात एनकाउंटर की गहन जांच की जरूरत है। पुलिस का कर्तव्य है कि वे कानून का पालन करे। न्याय न केवल किया जाना चाहिए, बल्कि न्याय होते हुए दिखना भी चाहिए। हमें उम्मीद है और भरोसा है कि SIT साजिश का पता लगाएगी।
मजिस्ट्रेट जांच में पुलिस के दावों पर शक बदलापुर यौन शोषण केस मामले में आरोपी अक्षय शिंदे की 23 सितंबर, 2024 में पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। उसे अगस्त में ठाणे के बदलापुर में एक स्कूल के शौचालय में दो नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
उस पूछताछ के लिए नवी मुंबई के तलोजा जेल से ठाणे के कल्याण ले जाया जा रहा था। पुलिस ने दावा किया कि इसी दौरान उसने एक पुलिसकर्मी से बंदूक छीनकर फायरिंग कर दी। आत्मरक्षा में पुलिस ने भी फायरिंग की। इसमें आरोपी की मौत हो गई।
सीनियर इंस्पेक्टर संजय शिंदे ने उसे गोली मारी। मुठभेड़ के समय वैन में असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर नीलेश मोरे, दो कॉन्स्टेबल और पुलिस ड्राइवर मौजूद थे। अक्षय को उसकी पत्नी के उसके खिलाफ दर्ज कराए गए केस में पूछताछ के लिए ले जाया जा रहा था।
नियमों के मुताबिक मामले में मजिस्ट्रेट जांच हुई। इसकी रिपोर्ट बॉम्बे हाईकोर्ट को सौंपी गई। रिपोर्ट में मजिस्ट्रेट आरोपी के पिता के फर्जी मुठभेड़ के आरोप पर सहमति जताई और पुलिसकर्मियों के आत्मरक्षा के दावों पर संदेह जताया। रिपोर्ट में आरोपी की मौत के लिए पांच पुलिसकर्मियों को जिम्मेदार ठहराया गया था।

आरोपी अक्षय शिंदे की एनकाउंटर के बाद की फोटो, उसे अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था।
आरोपी अक्षय की मां ने शव लेने से इनकार किया था आरोपी शिंदे की मां ने एनकाउंटर के बाद कहा था कि हम अस्पताल में घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन पुलिसवालों ने हमें अक्षय का शव भी देखने नहीं दिया।
अक्षय के खिलाफ यौन शोषण के आरोप साबित नहीं हुए थे। वह पटाखे फोड़ने तक से डरता था।
पुलिस पर गोली कैसे चला सकता था। एनकाउंटर एक साजिश है। अब हम उसका शव नहीं लेंगे। अक्षय ने बताया था कि पुलिस वाले उसे पीटते थे। दबाव डालकर बयान भी लिखवाते थे।

ठाणे पुलिस ने इसी वैन में आरोपी का एनकाउंटर किया था। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार सुबह इसकी जांच की।

बदलापुर के स्कूल में यौन शोषण की खबर फैलने के बाद स्थानीय लोगों ने स्कूल का घेराव किया था।
आरोपी ने 1 अगस्त को स्कूल जॉइन किया, 12-13 अगस्त को यौन शोषण किया आरोपी अक्षय शिंदे स्कूल में स्वीपर का काम करता था। वह 1 अगस्त को ही कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त हुआ था। 12 और 13 अगस्त को उसने स्कूल के गर्ल्स वॉशरूम में KG में पढ़ने वाली 3 और 4 साल की दो बच्चियों का यौन शोषण किया।
घटना के बाद दोनों बच्चियां स्कूल जाने से डर रही थीं। एक बच्ची के माता-पिता को शक हुआ तो उन्होंने बेटी से पूछताछ की। इसके बाद बच्ची ने सारी बात बताई। फिर उस बच्ची के माता-पिता ने दूसरी बच्ची के पेरेंट से बात की। इसके बाद दोनों बच्चियों का मेडिकल टेस्ट हुआ, जिसमें यौन शोषण का खुलासा हुआ।
दोनों बच्चियों का परिवार जब केस दर्ज कराने के लिए थाने पहुंचा, तो पुलिस ने भी FIR दर्ज करने में टालमटोल की। पीड़ित परिवारों ने सामाजिक कार्यकर्ताओं से मदद मांगी। दो दिन बाद 16 अगस्त की देर रात पुलिस ने शिकायत दर्ज की। पुलिस ने 17 अगस्त को आरोपी को गिरफ्तार किया था।
लोगों ने ट्रेनें रोकी थीं, पुलिस पर पथराव किया था

20 अगस्त को प्रदर्शनकारियों ने स्कूल का मेन गेट खुलवाया और अंदर घुसकर तोड़फोड़ की।
घटना को लेकर भीड़ ने 20 अगस्त को सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक बदलापुर स्टेशन पर प्रदर्शन किया था। 10 घंटे से ज्यादा लोकल ट्रेनों की आवाजाही रुकी रही। शाम को पुलिस ने लाठीचार्ज कर रेलवे ट्रैक खाली कराया। तब पुलिस पर भीड़ ने पत्थरबाजी भी की थी।
कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए बदलापुर स्टेशन पहुंचे, लेकिन उन्हें लौटना पड़ा था। इसके बाद उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने SIT गठित करने का ऐलान किया। इसके अलावा सरकार ने केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की बात कही थी।
राज्य सरकार ने केस दर्ज करने में देरी के आरोप में बदलापुर थाने के महिला पुलिस निरीक्षक समेत 3 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। साथ ही प्रिंसिपल समेत कुछ स्कूल स्टाफ को भी सस्पेंड किया था।

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