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इस्लामाबाद3 मिनट पहले
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सिराजुद्दीन हक्कानी ने 2021 में होम मिनिस्ट्री संभाली। इसके बाद वो सिर्फ एक बार सार्वजनिक तौर पर नजर आया है। (फाइल)
अफगानिस्तान की तालिबान हुकूमत में होम मिनिस्टर सिराजुद्दीन हक्कानी ने करीब पांच साल पाकिस्तान का पासपोर्ट इस्तेमाल किया। यह खुलासा पाकिस्तान की वेबसाइट ‘द न्यूज’ ने गुरुवार को एक रिपोर्ट में किया।
रिपोर्ट के मुताबिक- हक्कानी ने इस पासपोर्ट पर कतर समेत कुछ और विदेशी दौरे किए। पासपोर्ट इमरान खान सरकार के दौर में जारी किया गया था। इसके लिए खुफिया एजेंसी ISI ने दबाव डाला था।

सिराजुद्दीन हक्कानी अमेरिका की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल रह चुका है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि इसके बावजूद अमेरिका ने उससे कैसे बातचीत की। (फाइल)
कैसे हुआ खुलासा
- रिपोर्ट के मुताबिक- कुछ महीने पर हक्कानी दोहा जाने वाली फ्लाइट में मौजूद थे। इसी फ्लाइट में पेशावर का एक जर्नलिस्ट भी सफर कर रहा था। दोहा के इमीग्रेशन काउंटर पर हक्कानी ने पाकिस्तानी पासपोर्ट दिखाया तो जर्नलिस्ट हैरान रह गया। हालांकि, उसने तब इस मामले का खुलासा नहीं किया।
- इसके बाद अगस्त में इसी पत्रकार ने पाकिस्तान के पासपोर्ट अथॉरिटी को मामले की जानकारी दी। इसके बाद जांच शुरू हुई। दो अफसरों को गिरफ्तार किया गया। एक और अफसर को जिम्मेदार माना गया, लेकिन वो रिटायर हो चुका है। उसके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है।
- दरअसल, हक्कानी तालिबान के उस दल में शामिल थे, जो 2021 में कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका से बातचीत कर रहा था। बाद में कतर की मदद से दोनों पक्षों में समझौता हुआ और अमेरिकी फौज ने अफगानिस्तान छोड़ दिया। हालांकि, रिपोर्ट में यह साफ नहीं है कि हक्कानी के पास अब भी पाकिस्तानी पासपोर्ट है या नहीं।

पाकिस्तान के इमीग्रेशन अफसर ने पूछताछ में बताया है कि उसने पासपोर्ट फोन पर मिले ऑर्डर के बाद जारी किया था। (प्रतीकात्मक)
एक फोन पर जारी हो गया पासपोर्ट
- रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 40 हजार अफगान नागरिकों के पास पाकिस्तानी पासपोर्ट थे, अब इन्हें ब्लॉक किया गया है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा दो ऐसे राज्य हैं, जहां से ज्यादातर पासपोर्ट गैर कानूनी तौर पर जारी हुए।
- जहां तक हक्कानी को ट्रैवल डॉक्यूमेंट जारी किए जाने का ताल्लुक है तो इसमें एक बात हैरान करती है। दरअसल, गिरफ्तार किए गए अफसर ने पूछताछ में बताया कि यह घटना उस वक्त (2018 के आसपास) की है, जब खैबर पख्तूनख्वा राज्य और केंद्र यानी इस्लामाबाद में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की हुकूमत थी।
- इस दौरान सिराजुद्दीन हक्कानी के पासपोर्ट की एप्लीकेशन आई थी। एक शख्स ने खुद को इंटेलिजेंस एजेंसी का आला अफसर बताया और हक्कानी को पासपोर्ट जारी करने को कहा। इस अफसर ने पूछताछ में बताया कि वो इंटेलिजेंस अफसर सामने नहीं आया था, बल्कि उसने फोन पर बात की थी। रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि क्या पाकिस्तान में एक फोन कॉल पर पासपोर्ट जारी कर दिए जाते हैं।

सऊदी अरब ने सितंबर में पाकिस्तान को 12 हजार पासपोर्ट होल्डर्स की लिस्ट भेजी थी। इन सभी के सऊदी अरब आने पर रोक लगा दी गई थी। (प्रतीकात्मक)
पहले फजीहत, अब मुश्किल में पाकिस्तान
- करीब एक साल से सऊदी अरब और UAE पाकिस्तानी नागरिकों की अपने यहां आमद को लेकर काफी सख्त हो गए हैं। इसकी दो वजह हैं। पहली- पाकिस्तानी सऊदी अरब में हज के बहाने आते हैं, और यहां भीख मांगते हैं। सऊदी सरकार डिप्लोमैटिक लेवल और सार्वजनिक तौर पर पाकिस्तान से इसे रोकने को कह चुकी है। दूसरी- कई पाकिस्तानी पासपोर्ट होल्डर गैरकानूनी कामों, मसलन ह्यूमन ट्रैफिकिंग और ड्रग स्मगलिंग में शामिल पाए गए हैं।
- अफगान नागरिकों के बारे में इन देशों को परेशानी यह है कि ये पाकिस्तान के पासपोर्ट पर सफर करते हैं और इन देशों में आकर नौकरी मांगते हैं। हालांकि, अब यह इसलिए मुश्किल हो गया है, क्योंकि दोनों ही देशों ने स्किल्ड लेबर का रूल मेंडेटरी कर दिया है। इसका फायदा भारतीयों को ज्यादा हो रहा है। UAE ने तो कोरोना के दौर में पाकिस्तानियों को वापस भेज दिया था और भारतीयों को ज्यादा वीजा जारी किए थे।
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