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Pakistan Nawaz Sharif Family: पड़ोसी देश पाकिस्तान में एक बार फिर पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) की सरकार बनने जा रही है और वहां के सबसे ताकतवर परिवार का देश की शासन व्यवस्था पर कब्जा होने जा रहा है। हालांकि, यह गठबंधन की सरकार होगी लेकिन उसकी अगुवाई पीएमएल (नवाज) के नेता शहबाज शरीफ करेंगे। शहबाज शरीफ पहले भी प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह उनकी दूसरी पारी होगी। अप्रैल 2022 में इमरान सरकार के गिरने के बाद शहबाज शरीफ ने अगस्त 2023 तक गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया था।
इससे पहले भी शरीफ खानदान के बड़े बेटे नवाज शरीफ तीन बार देश की बागडोर संभाल चुके हैं। चुनावों से पहले माना जा रहा था कि 74 वर्षीय नवाज शरीफ चौथी बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन सकते हैं लेकिन अब जब किसी भी एक दल को बहुमत नहीं मिला है, तब पीएमएल-एन के नेतृत्व में छह दलों ने गठबंधन बनाकर बहुमत का जुगाड़ किया है। माना जा रहा है कि अगले महीने के शुरुआती हफ्तों में शहबाज शरीफ दूसरी बार पाकिस्तान के वजीर-ए-आज़म बनेंगे।
चाचा पीएम, भतीजी सीएम
सूत्रों के मुताबिक, शक्तिशाली सेना के समर्थन से प्रधानमंत्री का प्रतिष्ठित पद हासिल करने की दौड़ में शहबाज शरीफ अपने 74 वर्षीय भाई नवाज शरीफ से आगे निकल गए हैं। हालांकि, नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज कहती हैं कि पार्टी को बहुमत नहीं आने की वजह से नवाज की जगह अब शहबाज शरीफ को पीएम बनाने का फैसला किया गया है। शरीफ परिवार से यह दूसरे पीएम होंगे। इससे पहले नवाज शरीफ तीन बार (1990-93, 1997-99 और 2013 से 2017 तक)प्रधानमंत्री रह चुके हैं। दोनों भाई अलग-अलग काल खंड में पंजाब के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। शरीफ खानदान की दूसरी पीढ़ी यानी नवाज शरीफ के बेटी मरियम नवाज अब पंजाब की मुख्यमंत्री होंगी।
शरीफ परिवार का कश्मीर से क्या कनेक्शन
शहबाज़ शरीफ का परिवार मूलत: जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग का रहने वाला है। उनके पिता मुहम्मद शरीफ़ एक उद्योगपति थे। 1930 के दशक में मुहम्मद शरीफ़ ने उद्योग में कदम रखा था। उस वक्त मुस्लिम समाज परंपराओं में जकड़ा था और बहुत कम मुस्लिम परिवार बिजनेस करते थे। बिजनेस की वजह से मुहम्मद शरीफ अनंतनाग से अमृतसर के करीब जती उमरा में आकर बस गए थे और बाद में देश बंटवारे के बाद उनका पूरा परिवार लाहौर आकर बस गया।
1950 के दशक में शरीफ परिवार ने इत्तेफ़ाक ग्रुप ऑफ स्टील इंडस्ट्रीज खड़ा कर लिया था, जो उस वक्त कई लाख का कारोबार करता था। धीरे-धीरे शरीफ परिवार ने ट्रांसपोर्ट, शुगर और एग्रीकल्चर बिजनेस में भी बड़ा नाम कमाया। नवाज शरीफ तीन भाई हैं। वह सबसे बड़े हैं, जबकि शहबाज दूसरे नंबर और अब्बास शरीफ तीसरे नंबर पर हैं।
राजनीति में एंट्री मजेदार
पाकिस्तानी अखबार डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1973 से 1977 के दौरान जब जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने स्टील इंडस्ट्री समेत कई उद्योगों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था। इससे शरीफ परिवार के करोड़ों रुपये के इस्पात साम्राज्य पर सरकार का कब्जा हो गया था। इससे खफा होकर उनसे सियासी शत्रुता के जवाब में और भविष्य में राजनीतिक दखलंदाजी से संरक्षण पाने के लिए पिता मुहम्मद शरीफ ने नवाज शरीफ को जबरन राजनीति में धकेल दिया था।
1976 में नवाज शरीफ ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी, जिसका उस वक्त पंजाब में शासन था और राज्य में मजबूत पकड़ थी। इसके बाद नवाज पहली बार जनरल जियाउल हक के शासन के दौरान 1981 में पंजाब सरकार में वित्त मंत्री बनाए गए।
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