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मुंबई. पाकिस्तानी सिंगर आतिफ असलम (Atif Aslam) 7 साल बाद बॉलीवुड (Bollywood) में वापसी करने जा रहे हैं। उन्हें फिल्म ‘लव स्टोरी ऑफ 90’ में एक गाना ऑफर हुआ है। हालांकि, राज ठाकरे (Raj Thackeray) की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने इसका विरोध किया है। पार्टी ने बॉलीवुड और अन्य भाषाओं के फिल्म निर्माताओं को ऐसा नहीं करने की चेतावनी दी है।
महाराष्ट्र नवनिर्माण फिल्म सेना के अध्यक्ष अमेय खोपकर ने कहा, “पाकिस्तानी सिंगर आतिफ असलम को कुछ निर्माताओं ने एक बॉलीवुड फिल्म में गाने का ऑफर दिया है। कोर्ट के फैसले के बल पर जो लोग कूद रहे हैं उन्हें उनकी जगह दिखाने की जरूरत है।” खोपकर ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुझे यह बार-बार बताना पड़ रहा है। लेकिन फिर भी मैं एक बात स्पष्ट कर दूं कि यहां पाकिस्तानी कलाकारों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, कभी नहीं। मनसे का यही रुख था, है और आगे भी रहेगा।”
खोपकर ने चुनौती देते हुए कहा, “बॉलीवुड ही नहीं बल्कि किसी भी भाषा की फिल्म में पाकिस्तानियों से गाने रिकॉर्ड कर के सिर्फ दिखाए। किसी को भी इस चुनौती को स्वीकार करने का साहस नहीं करना चाहिए। अभी तो बस यही सलाह दे रहा हूं।” खोपकर ने लोकप्रिय गायक अरिजीत सिंह पर भी निशाना साधा, जो कथित तौर पर असलम के समर्थन में खड़े हैं।
अतिफ अस्लम या पाकड्या गायकाला बॉलीवूड फिल्ममध्ये गाण्यासाठी इथलेच काही निर्माते पायघड्या घालतायत.
विरोध झाला तर फाट्यावर मारण्याची भाषा अरिजीत सिंग करतोय. न्यायालयाने दिलेल्या निर्णयाच्या बळावर फुरफुरणाऱ्यांची मस्ती आता उतरवावीच लागेल. पुन्हा पुन्हा सांगावं लागतंय हेच दुर्दैव…— Ameya Khopkar (@MNSAmeyaKhopkar) February 5, 2024
क्यों लगा था बैन
बता दें कि आतिफ असलम ने आखिरी गाना सलमान खान की फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ में गाया था। इसके बाद, भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के कारण, पाकिस्तानी कलाकारों पर भारत में प्रतिबंध लगा दिया गया था।
दरअसल, 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद भारत में पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने सुरक्षा और देशभक्ति का हवाला देते हुए कुछ नियम बनाए थे। जिसके तहत सीमा पार के कलाकारों पर भारत में बैन लगाया गया था। इसके बाद फवाद खान, माहिर खान, अली जफर और राहत फतेह अली खान जैसे कलाकारों को देश छोड़कर जाना पड़ा था।
क्यों हटा बैन
हालांकि, अक्टूबर 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह बैन हटा दिया। सांस्कृतिक सद्भाव, एकता और शांति स्थापित करने के लिए प्रतिबंध हटाया गया। कोर्ट का कहना था विदेशी और पड़ोसी देशों के कलाकारों का विरोध करना देशभक्ति नहीं है।
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