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वहीं, रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर ने राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को ‘ऐतिहासिक’ बताया. हालांकि, उन्हें इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है, प्रेम सागर ने कहा कि वह बाद में मंदिर जाएंगे. प्रेम सागर ने बताया, ‘रामायण’ का निर्माण ‘ईश्वरीय हस्तक्षेप’ से पूरा हुआ. उन्होंने कहा कि अगर कोई दैवीय हस्तक्षेप नहीं होता, तो ‘रामायण’ नहीं बन पाती. 16 जनवरी, 1987 को ‘रामायण’ को हरी झंडी दी गई और 25 जनवरी, 1987 को इसे प्रसारित किया जाना था. स्टूडियो की व्यवस्था करनी पड़ी, अभिनेताओं का चयन किया गया, लेकिन कुछ भी तैयार नहीं था. हालांकि, ‘रामायण’ हर हफ्ते बिना किसी समस्या के प्रसारित हुई. आपको बता दें कि रामानंद सागर एक फिल्म निर्देशक थे, जिनको ‘आंखें’, ‘बगावत’ और ‘प्रेम बंधन’ जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है. फोटो साभार-@siyaramkijai/Instagram
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