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नवभारत डिजिटल डेस्क: पाकिस्तान इस वक्त बदहाली और कंगाली की मार से जूझ रहा है। पाकिस्तान के पीएम रहे इमरान खान इस वक्त जेल में बंद है। ऐसे में उनकी सरकार का कार्यकाल पूरा भी नहीं हो पाया। लेकिन अब पाकिस्तान में इस साल आम चुनाव (Pakistan Election 2024) होना हैं। उसकी तारीख का भी ऐलान हो गया है। पाकिस्तान में आम चुनाव 8 फरवरी को 2024 होना है। लेकिन इस बार पाकिस्तान चुनाव में एक महिला के नाम की चर्चा खूब हो रही है। दरअसल पहली बार ऐसा हो रहा है कि पाकिस्तान में कोई हिंदू महिला (Hindu Women) चुनावी मैदान में उतरने जा रही है। इस हिन्दू महिला का नाम डॉक्टर सवीरा प्रकाश (Saveera Parkash) है।

पाकिस्तान पीपल्स पार्टी ने मैदान में उतारा
पाकिस्तान में चुनाव से पूर्व तमाम पार्टियों ने अपनी ताकत लगानी शुरू कर दी है। जिनमें पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी यानी (PPP) का नाम शामिल है। लेकिन अन्य दलों की तुलना में इस बार पाकिस्तान की आवाम के बीच पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की चर्चा काफी हो रही है। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी ने खैबर पख्तूनख्वा से हिंदू (अल्पसंख्यक) समुदाय की डॉ. सवीरा प्रकाश मैदान में उतार के बड़ा दाव खेल दिया है। खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का वही इलाका है जहां से अक्सर हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की खबरें सामने आती रहती है। ऐसे में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी ने हिंदुओं का भरोसा जीतने के लिए डॉ. सवीरा प्रकाश को अपना उम्मीदवार बनाया है, ताकि उसे हिन्दू समुदाय का सपोर्ट मिल सके। इस तरह की बात भी तेजी से हो रही है।

कौन है सवीरा प्रकाश
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सवीरा पेशे से एक डॉक्टर हैं। सवीरा ने साल 2022 में एबटाबाद इंटरनेशनल मेडिकल कॉलेज से अपनी डिग्री पूरी की है। इस दौरान सवीरा पाकिस्तान पीपल्स पार्टी से जुड़ी हुई थी और उनकी महिला विंग का काम संभाला करती थी। पार्टी ने उन्हें बुनेर सीट से मैदान में उतारा है। बुनेर सीट से पहली बार किसी महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा गया है। वहीं अगर सवीरा के पिता ओमप्रकाश की बात करें तो वो भी पेशे से एक डॉक्टर हैं जो कुछ समय पहले ही रिटायर हुए हैं। सवीरा के पिता काफी लंबे समय से पाकिस्तान पीपल्स पार्टी से जुड़े हैं।
क्या है पाकिस्तान में हिंदुओं के लिए नियम
पाकिस्तान में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं। हिन्दुओं के अलावा क्रिश्चन और सिख भी माइनॉरिटी समुदाय का ही हिस्सा हैं। इसलिए पाकिस्तान की मुख्यधारा की राजनीति में ये समुदाय कम ही नज़र आते हैं। पाकिस्तान के संविधान में अल्पसंख्यकों के लिए अलग से नियम कानून बनाए गए हैं। राजनीति के कानून में अल्पसंख्यकों के लिए अलग से प्रावधान रखा गया है। संविधान के अनुच्छेद 51 (2A) द्वारा पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में गैर मुस्लिम लोगों के लिए दस सीटें आरक्षित हैं। तो वहीं अनुच्छेद 106 के अनुसार चार प्रांतीय विधानसभा में नॉन मुस्लिम लोगों के लिए 23 सीट आरक्षित हैं। पाकिस्तान की सीनेट में भी गैर मुस्लिम लोगों के लिए 4 सीट आरक्षित है। यही कारण है कि मुख्यधारा की राजनीति में अल्पसंख्यकों की मौजूदगी कम नज़र आती है।
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