New Criminal Law Bill; Prisoners in India | Bhartiya Nyaya Sanhita | न्याय संहिता लागू होने से 82 हजार कैदी रिहा होंगे: गैर संगीन अपराध के मामलों में मिलेगी राहत; जमानत के पैसे नहीं तो सरकार भरेगी

नई दिल्ली6 मिनट पहलेलेखक: सुजीत ठाकुर

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देश की जेलों में साढ़े पांच लाख कैदी हैं। इनमें गैर संगीन अपराध के अंडर ट्रायल वालों की संख्या 2 लाख है।

ब्रिटिश काल के दौर से चले आ रहे इंडियन पीनल कोड (IPC) की जगह बनाई गई भारतीय न्याय संहिता (BNS) इसी महीने गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी से पहले लागू करने की तैयारी है।

अधिसूचना जारी होने के साथ ही गैर संगीन अपराध के तहत जेल में बंद करीब 82 हजार कैदियों की रिहाई प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इनके होली से पहले जेल से बाहर आने की संभावना है।

गृह मंत्रालय के सीनियर अधिकारी का कहना है कि अंडर ट्रायल कैदियों की रिहाई प्रक्रिया शुरू करने के लिए ट्रेनर जेल अधिकारियों, पुलिस बल और वकीलों को ट्रेनिंग देंगे।

3000 ट्रेनरों की ट्रेनिंग हो चुकी है। अब ये ही बाकी लोगों को नए कानून के हिसाब से ट्रेंड करेंगे।

जेलों में आधे कैदी गैर संगीन अपराध के
गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि देश की जेलों में साढ़े पांच लाख कैदी हैं। कैदियों की कुल संख्या में करीब आधे गैर संगीन अपराधों के कैदी हैं।

गैर संगीन अपराध के अंडर ट्रायल वालों की संख्या 2 लाख है। इनमें ज्यादातर तो अधिकतम सजा से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं।

जमानत के पैसे नहीं तो सरकार देगी
जिन कैदियों के पास जमानत के पैसे नहीं होंगे, उनके लिए सरकार ने विशेष फंड की व्यवस्था की है। केंद्र और राज्य सरकार ऐसे कैदियों की जमानत राशि जमा कराएंगी।

ऑनलाइन सुनवाई होगी, इससे पुलिसकर्मियों का समय बचेगा
जमानत और रिहाई के लिए अंडर ट्रायल कैदियों को खुद अदालत नहीं जाना पड़ेगा। वे जेल से ही ऑनलाइन अदालत से रूबरू होंगे। जमानत मिलते ही रिहा कर दिए जाएंगे।

गृह मंत्रालय के अधिकारी का कहना है कि अभी तक जमानत के लिए पेशी और जमानत न मिलने पर फिर जेल ले जाने की प्रक्रिया में दिनभर पुलिस जवान लगे रहते थे। अब पुलिस बल को दूसरे काम करने का समय मिल सकेगा।

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