2 घंटे पहलेलेखक: नवनीत गुर्जर, नेशनल एडिटर, दैनिक भास्कर
- कॉपी लिंक
शिवराज सिंह चौहान चुनाव से पहले बार- बार कहते रहे कि मध्यप्रदेश में लाड़ली बहना ही कमाल करेंगी। चुनाव बाद जब परिणाम सामने आए तब भी शिवराज यही साबित करने में लगे रहे कि लाड़ली बहना ने ही इतनी बंपर जीत दिलाई है लेकिन किसी ने नहीं सुनी। तीनों राज्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे की दुहाई दी जाती रही।
वह सही भी था लेकिन राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मोदी के नाम का कमाल ज़रूर था, मध्यप्रदेश में इसके साथ लाड़ली बहना भी थीं। यही वजह है कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा को बहुमत मिला लेकिन मध्यप्रदेश में दो तिहाई बहुमत मिला। अब एसबीआई ने रिपोर्ट दी है कि मध्यप्रदेश में लाड़ली बहना के कारण ही भाजपा को इतनी ज़्यादा सीटें मिलीं हैं।

एसबीआई रिपोर्ट के मुताबिक़ दस हज़ार से कम मार्जिन वाली 24 सीटों पर भाजपा की जीत के चांस केवल 28 प्रतिशत थे लेकिन लाड़ली बहना ने इसे सौ प्रतिशत में बदल दिया। एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष और उनकी टीम द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2029 के बाद हर चुनाव में महिला वोटर्स ही निर्णायक साबित होंगी।
इस रिपोर्ट के अनुसार लाड़ली बहना के कारण मध्यप्रदेश में हर आठवीं सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की जहां उसके हारने के चांस थे। सही भी है, लाड़ली बहना की तर्ज़ पर ही भाजपा आख़िरी के दिनों में छत्तीसगढ़ में महतारी योजना लाई थी जिसके कारण जो गाँव कांग्रेस के पक्ष में दिख रहे थे, वे भाजपा के पक्ष में हो गए।

वोट प्रतिशत की बात की जाए तो रिपोर्ट कहती है कि लाड़ली बहना के कारण मध्यप्रदेश के हर ज़िले में एक प्रतिशत वोट भाजपा के पक्ष में बढ़ गए। हालाँकि इस रिपोर्ट में कहा गया है कि लाड़ली बहना ने एंटी इंकम्बेंसी को प्रो इंकम्बेंसी में बदल दिया है, लेकिन अब इसका ज़्यादा कोई मतलब नहीं रह गया है।

फ़िलहाल तो संसद में सांसदों के निलंबन का दौर चल रहा है। 18 दिसंबर को 78 सांसदों के निलंबन के एक दिन बाद 49 और विपक्षी सांसद निलंबित कर दिए गए। इस सत्र में अब तक 141 विपक्षी सांसद निलंबित किए जा चुके हैं। भारतीय संसदीय इतिहास में इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ।
