Mahua Moitra Bungalow; Trinamool Congress MP Cash for Query Case | संसद की हाउसिंग कमेटी की आवास मंत्रालय से मांग; कैश फॉर क्वेरी केस में गई थी सांसदी

नई दिल्ली2 घंटे पहले

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महुआ मोइत्रा को जल्द ही अपना सरकारी बंगला खाली करना पड़ सकता है।

लोकसभा से निष्कासित TMC नेता महुआ मोइत्रा को जल्द ही सरकारी बंगला खाली करना पड़ सकता है। संसद की हाउसिंग कमेटी ने केंद्रीय आवास मंत्रालय को मंगलवार पत्र लिखा है, जिसमें पूर्व सांसद महुआ को सरकारी बंगला खाली कराने का आदेश देने की मांग की गई है।

महुआ मोइत्रा की 8 दिसंबर 2023 को कैश फॉर क्वेरी केस में सांसदी चली गई थी। BJP सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया था कि उन्होंने लोकसभा में पैसे लेकर सवाल पूछे हैं। निशिकांत ने इसकी शिकायत लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से की थी। मामले की जांच के लिए एथिक्स कमेटी बनाई गई थी।

एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट में महुआ को दोषी माना गया था, जिसके बाद महुआ के निष्कासन का प्रस्ताव 8 दिसंबर 2023 को लोकसभा में पेश हुआ था। महुआ के निष्कासन पर लोकसभा में पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई थी। आखिर में प्रस्ताव पर वोटिंग हुई, जिसमें विपक्ष वॉकआउट किया था। वोटिंग में महुआ को लोकसभा से निष्कासित करने प्रस्ताव पास हो गया। बता दें कि लोकसभा से निष्कासन को महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

निष्कासन के बाद क्या बोली थी महुआ ?

  • कैश या गिफ्ट कोई सबूत ही नहीं मिला। एथिक्स कमेटी ने भी जड़ तक पहुंचे बिना मेरे खिलाफ रिपोर्ट बनाई और कंगारू कोर्ट ने बिना सबूत के मुझे सजा दी।
  • 17वीं लोकसभा वाकई ऐतिहासिक रही है। इस सदन ने वुमन रिजर्वेशन रीशेड्यूलिंग बिल पारित होते देखा। इसी सदन ने 78 महिला सांसदों में से एक के सबसे मजबूत विच-हंट को भी देखा है।
  • इसने एक संसदीय समिति का हथियारीकरण भी देखा विडंबना है कि एथिक्स कमेटी नैतिक दिशा-निर्देशक बनाया गया था, उसका इस्तेमाल वह करने के लिए किया जा रहा, जो उसे कभी नहीं करना था।

महुआ मोइत्रा ने निशिकांत दुबे पर किया था मानहानि केस
निशिकांत दुबे के आरोपों के खिलाफ महुआ मोइत्रा ने दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि का केस किया था। महुआ ने आरोप लगाया था कि निशिकांत दुबे और सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत दहाद्राई कैश फॉर क्वेरी केस के जरिए उनकी छवि धूमिल की है। महुआ ने मीडिया चैनलों के खिलाफ भी आरोप लगाए थे, लेकिन बाद में निशिकांत दुबे और देहाद्राई के खिलाफ ही केस चलाने की मांग रखी, जिसे कोर्ट ने मान लिया था। हाई कोर्ट में यह मामला फिलहाल लंबित है।

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लोकसभा से निष्कासन के बाद महुआ ने कहा कि लोकसभा की एथिक्स कमेटी ने मुझे झुकाने के लिए बनाई गई अपनी रिपोर्ट में हर नियम तोड़ दिया। महुआ बोलीं- ये आपके (बीजेपी) अंत की शुरुआत है। महुआ के पास आगे क्या विकल्प हैं, कैश फॉर क्वैरी मामला क्या है और एथिक्स कमेटी की जांच में क्या निकला; भास्कर एक्सप्लेनर में ऐसे तमाम सवालों के जवाब सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता ने दिए। पूरी खबर पढ़ें…

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