Dainik Bhaskar Prerna Utsav Vedanta Group Founder Anil Agrawal Talkshow | वेदांता समूह के संस्थापक बोले- सफलता तो तभी मिलेगी… जब सिर पर कफन बांध लेंगे

भोपाल39 मिनट पहले

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आप और मैं जिंदगी में सिर्फ चांस ले सकते हैं। जिसके पास कुछ नहीं है… वही तो चांस लेगा ना। अगर आप वाकई जिंदगी में आगे बढ़ना चाहते हैं तो अवसरों को कभी मत छोड़िए। जब तक सिर पर कफन नहीं बांधेंगे कि कुछ कर गुजरना है तब तक सफलता नहीं मिलेगी।

गीता में लिखा है- तुम कैसे आगे बढ़ सकते हो? उसका जवाब है- अभय। बिना डरे आगे बढ़ते जाइए… हमेशा फ्रंट फुट पर खेलिए। कार्यक्रम था- प्रेरणा उत्सव और श्रोताओं से रूबरू थे वेदांता समूह के संस्थापक और चेयरमैन अनिल अग्रवाल।

दैनिक भास्कर समूह के चेयरमैन स्व. रमेशचंद्र अग्रवाल की स्मृति में आयोजित प्रेरणा उत्सव के दूसरे दिन भोपाल में वेदांता समूह के संस्थापक-चेयरमैन अनिल अग्रवाल का टॉक शो हुआ। टॉक शो में भास्कर समूह के डायरेक्टर गिरिश अग्रवाल ने अनिल अग्रवाल से बातचीत की।

प्रेरणा उत्सव कार्यक्रम में दीप प्रज्वलित करते वेदांता समूह के संस्थापक-चेयरमैन अनिल अग्रवाल और भास्कर समूह के डायरेक्टर गिरिश अग्रवाल।

प्रेरणा उत्सव कार्यक्रम में दीप प्रज्वलित करते वेदांता समूह के संस्थापक-चेयरमैन अनिल अग्रवाल और भास्कर समूह के डायरेक्टर गिरिश अग्रवाल।

पढ़िए… अनिल अग्रवाल से जिंदगी की वो सीख… जो आपको आगे बढ़ा सकती है…

सवाल : बिहार से बम्बई पहुंचने की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। उसके बारे में बताइए।
जवाब :
मैं आपके जैसा ही हूं, कोई फर्क नहीं है आपमें और मुझमे। मैं बिहार में पला बढ़ा। मैं बॉलीवुड फिल्में देखा करता था। इच्छा रहती थी कि कभी डबल डेकर बस देखूं। कभी वहां की मल्टी स्टोरी बिल्डिंग्स देखूं। सोचा बम्बई जाऊंगा तो वो सब देखूंगा। बिजनेस तो करना था ही।

दरअसल जो इच्छाएं हमारे भीतर होती हैं… वही हमें आगे बढ़ाती हैं। मेरी मां का मैं बहुत ऋणी हूं। मैं जो कुछ भी हूं। मां की वजह से हूं। मेरी मां ने हम चार भाई-बहनों को खूब अच्छे से पाला। उन्हें घर चलाने के लिए सिर्फ चार सौ रुपए मिलते थे। इन्हीं में घर का भाड़ा देना और हम भाई-बहनों को पालना… बड़ी बात थी।

मुझे याद है मेरे पिताजी के पास लमरेटा स्कूटर था और मैं पीछे बैठा करता था। मेरी एक ही इच्छा थी कभी मैं स्कूटर चलाऊं और वो मेरे पीछे बैठें।

सवाल: मान लीजिए कि आपका नाती 15 साल की उम्र में बोले कि मैं पढ़ाई छोड़ना चाहता हूं तो…आप क्या कहेंगे?
जवाब:
एक बात तो पक्की है कि हम अपने बच्चों की तकदीर लिख नहीं सकते। हम उन्हें सिर्फ संस्कार दे सकते हैं। हमारा कंधा हमारे बच्चों के लिए हरदम तैयार है। वो कभी भी हमारे कंधे पर आकर सिर रख सकते हैं। तकदीर तो वो अपनी लिखवाकर लाए हैं, उसे हम नहीं बदल सकते। और जो लोग अपने बच्चों के प्यार में गलत करने लगते हैं… वो सबसे बड़े गुनहगार हैं।

कार्यक्रम में अनिल अग्रवाल ने अपनी जिंदगी के किस्से और सबक शेयर किए। उन्होंने कहा सिर्फ काम करते रहिए और ईश्वर का हथियार बनिए। हर रास्ता आपके लिए खुला रहेगा।

कार्यक्रम में अनिल अग्रवाल ने अपनी जिंदगी के किस्से और सबक शेयर किए। उन्होंने कहा सिर्फ काम करते रहिए और ईश्वर का हथियार बनिए। हर रास्ता आपके लिए खुला रहेगा।

सवाल: आपके पास वो कौन सी प्रेरणा थी, जिसने आपको पटना से बम्बई पहुंचा दिया?
जवाब:
हम सभी में कुछ तमन्नाएं होती हैं। कुछ इच्छाएं होती हैं। कुछ आग होती है। बस उस आग को हमें पकड़ना है। मेरा एक ही सपना था… मुझे उद्योगपति बनना ही है। मैं अखबारों में टाटा, बिरला… गोयनका के बारे में पढ़ा करता था। मुझे लगता था कि यह तो मैं भी बन सकता हूं। बस यही सोच बम्बई ले आए। शुरुआत में नौकरी की। उसके बाद स्क्रैप का काम किया। एक के बाद एक मेरे नौ बिजनेस फेल हो गए।

एक दिन मैं ओबेरॉय के सामने से गुजरा। सिर उठाया तो उठाया नहीं गया। इतनी ऊंची बिल्डिंग… जिंदगी में मैंने कभी देखी नहीं थी। मैंने पता किया… इसमें रहने का कितना पैसा लगता है तो किसी ने कहा- दो सौ रुपए लगते हैं। मैंने सोचा- दो सौ रुपए का जुगाड़ तो मैं कर लूंगा, लेकिन अंदर जाकर अंग्रेजी बोलकर चेक-इन कैसे करूंगा? अंग्रेजी बोलनी नहीं आती थी। और किसी दरबान ने रोक लिया तो मेरी क्या इज्जत रह जाएगी?

बहरहाल, कालिंदी में एक अशोक नाम का आदमी रहता था। अच्छी अंग्रेजी बोलता था। उसने मुझे चेक इन करवाया। अंदर जाकर… जो स्वाभिमान मुझे महसूस हुआ… उसे बता नहीं सकता। ओबेरॉय के 17वें माले पर मैं मानो यूं खड़ा था…जैसे मैंने कुछ अचीव कर लिया।

मेरी छोटी-छोटी इच्छाएं थीं। पहली इच्छा थी- देवानंद को देखूं… तो किसी ने बताया कि वो एक होटल में आते हैं। तो मैं रोज उस होटल के बाहर खड़ा हो जाता… सिर्फ देवानंद को देखने के लिए। किसी ने कहा… कचिन्स में अमिताभ बच्चन जैसे बड़े लोग कपड़े सिलवाते हैं। मेरी भी इच्छा हुई-वहां जाकर सफारी सूट सिलवाऊं। मैंने सिलवाया। कहना यही चाहता हूं कि जो भी करिए… जुनून के साथ करिए।

सवाल : आजकल के बच्चे रिस्क नहीं लेते। आप क्या सीख देंगे?
जवाब:
मैं आपसे असहमत हूं। आज के बच्चे हमारे समय से बहुत अलग हैं। हम तो हर छोटी बात पर झूठ बोल देते थे। आज के बच्चे झूठ नहीं बोलते। ये वो बच्चे हैं, जिनके पास साधन हैं….वे जानते हैं दुनिया में क्या हो रहा है। और यही बच्चे हिंदुस्तान को आगे बढ़ाएंगे।

अमेरिका और भारत में ज्यादा फर्क नहीं है। भारत की तरह अमेरिका भी अवसरों का देश है… वह भी आंत्रप्रेन्योरशिप की धरती है। वहां वेल्थ है… अमेरिका दुनिया पर राज करता है। लेकिन वहां संस्कार नहीं हैं। हमारे बच्चे… खासकर बच्चियां हमें बहुत आगे ले जाएंगी। हमें अपनी बेटियों- बहनों और बहुओं पर भरोसा करना पड़ेगा। वे डिफरेंट हैं… नया सोचती हैं। उनको सेफ्टी देनी पड़ेगी… सपोर्ट देना पड़ेगा। वे ही हमें सबसे आगे लेकर जाएंगी।

अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत की तरह अमेरिका भी अवसरों का देश है। वहां दौलत है, पर संस्कार नहीं हैं। हमारे देश की बच्चियां हमें बहुत आगे ले जाएंगीं।

अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत की तरह अमेरिका भी अवसरों का देश है। वहां दौलत है, पर संस्कार नहीं हैं। हमारे देश की बच्चियां हमें बहुत आगे ले जाएंगीं।

सवाल : आपका एक धीरू भाई वाला किस्सा बहुत दिलचस्प है…आप सुनाएंगे?
जवाब:
मैं बम्बई आया तो मुझे पता था कि मुझे बड़ा आदमी बनना है। तब धीरू भाई का नाम सबसे बड़ा था। मैंने पता लगाया कि वो कहां जाते हैं? कैसे उनसे मिला जा सकता है। पता चला वो सुबह साढ़े पांच बजे ओबेरॉय के हेल्थ क्लब में जाते हैं।

मैं किसी भी तरह हेल्थ क्लब पहुंच गया। वहां बड़े लोग आते थे। आदित्य बिरला, धीरूभाई। मैं पटाने में मास्टर था। मैं किसी भी तरह उन तक पहुंच गया। जब वहां पहुंचा तो वहां बातें हो रही थी। मैंने थोड़ी देर तक उन्हें सुना। फिर कहा- एक बिहारी जोक सुनाएं आपको? उन्होंने कहा- सुनाओ-सुनाओ। मेरा जोक सुनकर वे बोले तुम रोज आया करो।

अब मुझे वहां की एंट्री मिल गई। मैं रोज वहां आता। रोज जोक सुनाता। इस दौरान मेरा काम भी बढ़ गया था। मुझे कोई 25-30 लाख रुपए का लोन लेना था। मैंने सिंडिकेट बैंक में एप्लीकेशन डाल रखी थी। वहां एक रघुपति साहब थे। उनसे बात की। मैंने उन्हें कहा-आपके लिए एक कॉकेटल रखा है। उन्होंने कहा- नहीं-नहीं मैं पार्टियों में नहीं जाता। तो मैंने कह दिया…वहां धीरूभाई आने वाले हैं। यह सुनकर वे आने को तैयार हो गए।

इसके बाद मैं पहुंचा धीरू भाई के पास। मैंने उन्हें कहा- शाम को ताज में एक कॉकटेल रखा है। और वहां रघुपति जी भी आने वाले हैं। मैंने उन्हें कह दिया है कि आप भी आने वाले हैं। उन्होंने इतना ही कहा- तू तो बहुत बदमाश है। मैंने कहा- धीरूभाई गलती हो गई। आपको इतने जोक सुनाए हैं। इसी खातिर आ जाइए।

तो बात खत्म हो गई। मैं इनसिक्योर था। शाम को सब लोग आ गए। रघुपति भी आ गए। मुझे बस दस परसेन्ट उम्मीद थी कि शायद धीरूभाई आ जाए…लेकिन वो आ गए। आप सोच नहीं सकते…मेरा कद वहीं बढ़ गया। जाते वक्त पता चला…धीरूभाई बिल भी पे करके चले गए हैं। आप और हम तो चांस ही ले सकते हैं ना। और जिसके पास नहीं है…वही चांस लेगा ना। जिसके पास नोट हैं वो तो बस नोट गिनता रहेगा।

अनिल अग्रवाल ने कहा कि बिजनेस ग्रोथ तब होगी जब देश में सरकारी और निजी स्तर पर आंत्रप्रेन्योर्स के साथ भेदभाव बंद होगा। अगर भेदभाव रुक गया तो हम तेजी से आगे बढ़ेंगे।

अनिल अग्रवाल ने कहा कि बिजनेस ग्रोथ तब होगी जब देश में सरकारी और निजी स्तर पर आंत्रप्रेन्योर्स के साथ भेदभाव बंद होगा। अगर भेदभाव रुक गया तो हम तेजी से आगे बढ़ेंगे।

सवाल: आपने अमेरिका में भी चार साल बिताए हैं?
जवाब:
मेरी लड़की का जन्म वहीं हुआ। किसी ने मुझे कहा था कि अगर तुम्हारे बच्चों को जन्म अमेरिका में हो गया तो तुम पैसे वाले हो जाओगे। वहां जाने से पहले पांच सौ डॉलर मिले थे। उन्हें मां ने जेब के साथ स्टिच कर दिए थे। कहा था- जब मुश्किल में हो तभी निकालना।

हम फ्लाइट में ही थे। हमने सोचा न्यूयॉर्क में जाएंगे तो उतरेंगे कहां? तो देखा बगल में एक और परिवार बैठा था। तो मैंने उनसे इतनी बातें की…उनका मन लगाया। उनके बच्चे को खिलाया… उसके लिए डांस किया… सब किया। तो उन्हीं सज्जन ने ही पूछ लिया। न्यूयॉर्क में कहां रुकेंगे। मैंने तपाक से कह दिया-आप कहेंगे तो आपके यहां रुक जाएंगे।

दिसंबर का महीना था, उन्होंने अपना ओवरकोट भी हमें दिया और हम उन्हीं के साथ उन्हीं के घर में डेढ़ महीने रुके। इस डेढ़ महीने हमने उनका सारा काम किया। बच्चे को स्कूल छोड़ना। ड्राइव करना… यहां तक कि उनके मेहमानों को भी एंटरटेन करना।

मैं दो बातों में हमेशा बिलीव करता हूं: ड्रेस और एड्रेस… ये बेस्ट होने चाहिए
अनिल अग्रवाल ने कहा, मैंने आठ-नौ करोड़ में अपनी कंपनी को लिस्ट करवाया था। लेकिन वैल्यूएशन घट रही थी। मैं तब सीएनएन और ब्लूमबर्ग जरूर देखता था। अंग्रेजी नहीं आती थी, फिर भी देखता था। एक दिन पत्नी से कहा- चलो लंदन चलते हैं। पत्नी ने पूछा- अचानक क्या हो गया? बहरहाल, बच्चों को स्कूल से निकलवाया और हम लंदन पहुंच गए। मुझे याद है…पत्नी ने बच्चों के स्कूल में बताया था- इन्हें कोई मेंटल प्रॉबल्म है, इसलिए कुछ महीनों के लिए लंदन जा रहे हैं। जब लौटें तो प्लीज बच्चों को दोबारा एडमिशन दे दीजिएगा।

मैं दो चीजों में हमेशा बिलीव करता था। ड्रेस और एड्रेस….। ये दोनों बेस्ट होने चाहिए। मैं कपड़े अच्छे पहनता था। और अच्छी जगह पर घर लेकर रहता था। भले ही छोटा हो। मेरी पत्नी खाना अच्छा बनाती थी। मैं कभी लॉयर को घर बुलाता कभी अकांउटेंट को…। लोगों से मिलना मेरे लिए फायदेमंद रहा। मैंने यहां से अपनी कंपनी डी-लिस्ट करवाई और उसे 14 हजार करोड़ रुपए में लिस्ट करवाया।

अनिल अग्रवाल ने कहा कि आपको अंग्रेजी आती है या नहीं आती…कोई फर्क नहीं पड़ता। दुनिया में 60-70 फीसदी लोगों को अंग्रेजी नहीं आती। अगर आत्मविश्वास है तो आपके लिए दरवाजे खुलते जाते हैं।

अनिल अग्रवाल ने कहा कि आपको अंग्रेजी आती है या नहीं आती…कोई फर्क नहीं पड़ता। दुनिया में 60-70 फीसदी लोगों को अंग्रेजी नहीं आती। अगर आत्मविश्वास है तो आपके लिए दरवाजे खुलते जाते हैं।

मार खाना मेरी खुराक है…जितना मारोगे…मैं उतना मजबूत बन जाऊंगा
अनिल अग्रवाल बोले- दारा सिंह की कुश्ती देखी है। वो मार खाते रहते…और उसके बाद जब मारना शुरू करते तो मारते जाते। जिंदगी की मुश्किलें देखकर मुझे भी लगने लगा था कि मार खाना ही मेरी खुराक है। लेकिन आप जितना मारोगे मैं उतना मजबूत बन जाऊंगा।

हिंदुस्तान का वक्त आ रहा है…
आज हिंदुस्तान को पूरी दुनिया देख रही है। यहां 65 फीसदी लोग मिडिल क्लास से नीचे हैं। लेकिन यकीन मानिए अगले तीन-चार साल में वे मिडिल क्लास में होंगे। वो तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं है, जहां की सरकार को भारतीय ना चला रहे हों। अमेरिका के व्हाइट हाउस में जाइए…वहां हिंदुस्तानी ही मिलेंगे। आज दुनिया की सौ बड़ी कंपनियों में 80 में सीईओ या सीएफओ हिंदुस्तानी मिलेंगे। हमारा वक्त आ गया है। आज चीन- रूस की कहीं कोई बात नहीं कर रहा है।

ग्रोथ बढ़ाने के लिए सरकार को ये तीन बदलाव करने चाहिए…

  • आंत्रप्रेन्योर्स के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। सरकारी और निजी स्तर पर…। अगर भेदभाव रुक गया तो हम तेजी से आगे बढ़ेंगे।
  • लैंड रिफॉर्म बहुत जरूरी है। विदेशी निवेशक भारत आना चाहते हैं, लेकिन जमीन उनके लिए बड़ी समस्या है। इसमें सुधार लाना चाहिए।
  • आर्म्स और एम्युनेशन होना चाहिए। दुनिया को पता होना चाहिए कि भारत के पास तलवार है, भले ही हम इसे ना निकालें।

अनिल अग्रवाल के चार बड़े सबक : चांस लेते रहिए, जाने कब आपके रास्ते खुल जाएं

  • आलस्य कभी मत करिए। यह आपका सबसे बड़ा दुश्मन है।
  • हनुमान, राम के हथियार थे। अर्जुन…कृष्ण के। सिर्फ काम करते रहिए और ईश्वर का हथियार बनिए। आप लगे रहेंगे तो हर रास्ता आपके लिए खुला रहेगा।
  • कोई भी काम करें तो यह सोचकर करें कि स्टॉक मार्केट से जुड़ना है। नौकरी भी करें तो ऐसी ही जगह करिए। छोटी-छोटी बातों से आपको लगेगा कि इनकम बढ़ गई है।
  • चांस हमेशा लेते रहिए। अवसरों को कभी मत जाने दीजिए।

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