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नई दिल्ली8 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भी सुनवाई करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (16 अक्टूबर) को जांच एजेंसियों ED-CBI से पूछा कि दिल्ली शराब नीति केस में मनीष सिसोदिया पर आरोप कब तय होंगे। आप उन्हें अनिश्चितकाल के लिए हिरासत में नहीं रख सकते।जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
बेंच ने जांच एजेंसियों की तरफ से पेश एडीशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से पूछा- एक बार किसी केस में चार्जशीट दायर हो जाने के बाद, आरोपों पर बहस तुरंत शुरू होनी चाहिए। निचली अदालत में सिसोदिया के खिलाफ आरोपों पर बहस कब शुरू होगी।
कोर्ट ने कहा- बहस कब शुरू होगी, हमें मंगलवार तक बताएं
ASG राजू ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सिसोदिया के खिलाफ केस CrPC की धारा 207 (आरोपी को दस्तावेजों की आपूर्ति) के फेज में है। उसके बाद आरोप पर बहस शुरू होगी। इसपर जस्टिस खन्ना ने पूछा, “आरोप पर बहस अभी तक क्यों शुरू नहीं हुई है और वे कब शुरू होंगी? हमें 17 अक्टूबर (मंगलवार) तक बताएं।” सिसोदिया की जमानत पर सुनवाई आज फिर होगी।
आम आदमी पार्टी को बनाया जा सकता है आरोपी- ED-CBI
जांच एजेंसियों का पक्ष रख रहे ASG राजू ने कोर्ट में यह भी कहा कि एजेंसियां इस केस में आम आदमी पार्टी को भी आरोपी बनाने पर विचार कर रही हैं। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने ED से पूछा था कि जब शराब नीति का सीधे तौर पर फायदा आम आदमी पार्टी को मिला है, मनीष सिसौदिया को नहीं। ऐसे में एजेंसी ने पार्टी को आरोपी क्यों नहीं बनाया है?

ASG राजू ने आरोपी से सरकारी गवाह बने दिल्ली के कारोबारी दिनेश अरोड़ा के बयान का हवाला दिया और दावा किया कि उन्होंने जांच एजेंसियों को उस रिश्वत के बारे में भी बताया जो सिसोदिया ने ली थी। ASG ने कहा, ”उन्होंने (अरोड़ा) अपने बयान में कहा है कि उन्होंने पहले सिसोदिया के बारे में इसलिए नहीं बताया क्योंकि उन्हें डर था कि उन्हें नुकसान पहुंचाया जाएगा।”
बेंच ने यह भी पूछा कि क्या भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत सिसोदिया के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए परमिशन ली गई है, जिस पर राजू ने हां में जवाब दिया। यह धारा पुलिस अधिकारी के लिए किसी लोक सेवक के अपराध की जांच करने के लिए परमिशन लेने की अनिवार्यता बताती है।
ED ने मामले में चार चार्जशीट दाखिल कीं
करीब 10 महीने तक जांच-पड़ताल करने के बाद 1 जून को ED ने अपनी जांच पूरी की। एजेंसी ने इस मामले में चार चार्जशीट दाखिल कीं। ED ने कोर्ट को बताया कि उनके पास सिसोदिया के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। ED के मुताबिक, सिसोदिया ने सबूत छिपाने के लिए 14 फोन और 43 सिम कार्ड बदले, जिनमें से पांच सिम सिसोदिया के नाम पर ही थे।

सिसोदिया के केस में अबतक क्या हुआ
- दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर, 2021 को नीति लागू की लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच सितंबर 2022 के अंत में इसे रद्द कर दिया।
- मनीष सिसोदिया को 26 फरवरी को CBI ने गिरफ्तार किया था। तब से वह हिरासत में हैं। ED ने तिहाड़ जेल में पूछताछ के बाद 9 मार्च को CBI की FIR से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद 28 फरवरी को सिसोदिया ने दिल्ली कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 मई को CBI केस में सिसोदिया को जमानत देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि उपमुख्यमंत्री और उत्पाद शुल्क मंत्री होने के नाते, वह एक हाई-प्रोफाइल व्यक्ति हैं जो गवाहों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
- 3 जुलाई को, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति में अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि उनके खिलाफ आरोप बहुत गंभीर प्रकृति के हैं।
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228 दिन से जेल में हैं; पिछली तारीख पर कोर्ट ने ED से पूछा था- उनके खिलाफ सबूत कहां?

शराब घोटाला मामले में दिल्ली के पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टल गई। लाइव लॉ वेबसाइट के मुताबिक, इस केस के सुनवाई करने वाले जज जस्टिस संजीव खन्ना किसी और मामले की सुनवाई में बिजी थे। इससे पहले 5 अक्टूबर को कोर्ट ने जांच एजेंसी ED से पूछा था कि आखिर सिसोदिया के खिलाफ सबूत कहां हैं? पढ़ें पूरी खबर…
