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तेल अवीव8 घंटे पहले
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इजराइल की राजधानी तेल अवीव के बाहरी हिस्से में तैनात आयरन डोम।
7 अक्टूबर की सुबह हमास ने एक के बाद एक 5000 रॉकेट इजराइल पर दागे। इजराइल का आयरन डोम नाम का एयर डिफेंस सिस्टम इन हमलों को रोक नहीं पाया। ऐसा 5 महीने में दूसरी बार हुआ है जब आयरन डोम फेल हो गया।
10 मई 2023 को जब इजराइल के दक्षिणी इलाके में हमास ने मिसाइलें दागीं, तब भी ये नाकाम हुआ था। हवाई हमलों से बचने के लिए इजराइल ने 2011 में आयरन डोम तैयार किया था। तब इसे दुनिया का सबसे भरोसेमंद एयर डिफेंस सिस्टम बताया गया था। ये भी दावा किया गया था कि इसका सक्सेस रेट 94% है।
हमले के वक्त कई बार हार्डवेयर अपने सॉफ्टवेयर से कनेक्ट नहीं हुए
मई में हुए हमले के बाद जांच में पता चला था कि आयरन डोम के हार्डवेयर 2011 के बाद से अपडेट नहीं हुए, जबकि सॉफ्टवेयर में बार-बार अपडेट किए गए। यरुशलम पोस्ट ने भी एक आर्टिकल में दावा किया था कि मई के हमले में आयरन डोम का इंटरसेप्शन सक्सेस रेट सिर्फ 60% था।
आयरन डोम पर ब्रॉक यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर माइकल आर्मस्ट्रॉग बताते हैं कि कोई भी मिसाइल सिस्टम पूरी तरह भरोसेमंद नहीं होता। अब हमले का रूप बदल रहा है।

2006 में एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम बनाने की घोषणा हुई थी
इजराइली फर्म राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम और इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्री ने बनाया है। 2006 के इजराइल-लेबनान युद्ध के दौरान हिजबुल्लाह ने इजराइल पर हजारों रॉकेट दागे थे। इसके बाद इजराइल ने नया एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम बनाने की घोषणा की, जो उसके लोगों और शहरों की रक्षा करे। इसी के तहत इजराइल ने आयरन डोम को डेवलप किया। और 2011 में ये पहली बार सर्विस में आया।
इस सिस्टम को बनाने में अमेरिका ने इजराइल को तकनीकी और आर्थिक मदद दी है। इस शॉर्ट रेंज ग्राउंड-टू-एयर, एयर डिफेंस सिस्टम में रडार और तामिर इंटरसेप्टर मिसाइल है, जो किसी भी रॉकेट या मिसाइल को ट्रैक करके उसे रास्ते में ही तबाह कर देती है। जिस तरह अभी गाजा से दागे गए रॉकेट को इस सिस्टम ने नष्ट किया। मीडियम और लॉन्ग रेंज थ्रेट के लिए दो अलग सिस्टम काम करते हैं। इन्हें डेविड्स स्लिंग और ऐरो कहा जाता है। इससे रॉकेट, आर्टिलरी और मोर्टार के साथ-साथ विमान, हेलिकॉप्टर और मानव रहित हवाई वाहनों का मुकाबला किया जा सकता है।
इस सिस्टम को लगाने में खर्च कितना आता है?
इस सिस्टम के यूनिट की कीमत 50 मिलियन डॉलर (करीब 368 करोड़ रुपए) होती है। वहीं, एक इंटरसेप्टर तामिर मिसाइल की कीमत करीब 80 हजार डॉलर (59 लाख रुपए) होती है। वहीं, एक रॉकेट 1 हजार डॉलर (करीब 74 हजार रुपए) से भी कम का होता है। इस सिस्टम रॉकेट को इंटरसेप्ट करने के लिए दो तामिर मिसाइलें लगी होती हैं।
एक्सपर्ट्स इसे कम खर्चीला मानते हैं क्योंकि ये तभी चलाया जाता है जब किसी रॉकेट से इंसान की जिंदगी या किसी अहम इन्फ्रास्ट्रक्चर को खतरा होता है। इस वजह से कम इंटरसेप्टर की जरूरत पड़ती है। हालांकि इजराइल में ही सरकार के आलोचकों का कहना है कि सरकार इस सिस्टम पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गई है। उसे दूसरे डिफेंस सिस्टम पर भी काम करने की जरूरत है।
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