11:29 AM, 13-Mar-2025
होलिका दहन पर करें इन चीजों का दान
- काले तिल का दान – शनि दोष, राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए काले तिल का दान किया जाता है।
- नारियल का दान– नारियल को भगवान को अर्पित करके गरीबों में बांटना शुभ माना जाता है, जिससे समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है।
- पानी और चावल का दान – पानी और चावल का दान जीवन में समृद्धि और खुशहाली लाने के लिए किया जाता है।
- गेहूं और जौ का दान – गेहूं और जौ का दान करने से घर में अन्न की वृद्धि होती है और दरिद्रता दूर होती है।
- गुड़ और तिल का दान – यह दान विशेष रूप से बुरी नजर से बचने और मनुष्य के जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के लिए किया जाता है।
11:14 AM, 13-Mar-2025
होलिका दहन में क्या क्या डालना चाहिए?
- होलिका दहन की आग में सूखा नारियल डालना बहुत शुभ माना जाता है।
- होलिका दहन की अग्नि में अक्षत और ताजे फूल भी चढ़ाने चाहिए।
- होलिका दहन में साबुत मूंग की दाल, हल्दी और उपले डालने चाहिए।
- होलिका दहन में चांदी या तांबे के कलश से जल और गुलाल भी डालना चाहिए।
10:46 AM, 13-Mar-2025
होलिका दहन के दौरान करें इन मंत्रों का जाप (Mantra Jaap On Holika Dahan)
सुरक्षा और समृद्धि के लिए मंत्र
असृक्पाभय संतस्त्रैः कृताः त्वं होलि बालिशैः.
अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव..
10:02 AM, 13-Mar-2025
होलिका दहन के लिए संपूर्ण पूजन सामग्री (Holika Pujan Samagri)
- कच्चा सूती धागा
- नारियल
- गुलाल
- रोली
- अक्षत
- धूप
- फूल
- बताशे
- नया अनाज
- मूंग की साबुत दाल
- हल्दी का टुकड़ा
- एक कटोरी पानी
- हवन सामग्री
- गुड़
- चावल
- मिठाई
- फल
- गेहूं का आटा
- पुष्प माला
- गाय का घी
- सरसों का तेल
- मिट्टी का दीपक
- गाय के गोबर के उपले
- गंगाजल
- कपूर
- अगरबत्ती
09:33 AM, 13-Mar-2025
होलिका दहन की अग्नि में डालें ये चीजें
- होलिका दहन में विभिन्न सामग्रियों का अर्पण करना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
- नारियल अर्पित करने से समृद्धि और बाधाएं दूर होती हैं।
- गेहूं और जौ की बालियां डालने से घर में अन्न की वृद्धि होती है और सुख-शांति बनी रहती है।
- काले तिल डालने से शनि दोष और राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
- गूलर की लकड़ी डालने से आर्थिक तंगी दूर होती है और देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
- गोबर के उपले वातावरण को शुद्ध करते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
- लौंग और इलायची डालने से नकारात्मक शक्तियां समाप्त होती हैं।
- चंदन की लकड़ी रोगों से मुक्ति और मानसिक शांति देती है।
- कपूर, लौंग और पान का पत्ता स्वास्थ्य समस्याओं को कम करते हैं और नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करते हैं।
- हवन सामग्री वैवाहिक जीवन में सुख और समझ बढ़ाती है। इन उपायों से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
09:00 AM, 13-Mar-2025
बच्चों के सिर के ऊपर से होलिका की अग्नि सात बार क्यों घुमाई जाती है?
होलिका दहन के बाद उसकी अग्नि को बच्चों के सिर के ऊपर से सात बार घुमाने की परंपरा बुरी नजर, नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों से रक्षा के लिए की जाती है। यह परंपरा तंत्र-शास्त्र और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है, जिसमें होलिका की अग्नि को शुद्धिकरण और सुरक्षा का प्रतीक माना गया है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण देखें तो होलिका की अग्नि में हवन सामग्री, गोबर के उपले और गूलर की माला जलती है, जिससे वातावरण शुद्ध होता है। इसे सिर के ऊपर से घुमाने से बच्चे बीमारियों से बचे रहते हैं और उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
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08:32 AM, 13-Mar-2025
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को दी होलिका दहन की शुभकामनाएं (CM Yogi Adityanath wishes on the occasion of Holika Dahan)
असत्य, अत्याचार, अराजकता और अहंकार पर विजय के प्रतीक होलिका दहन की प्रदेश वासियों को बधाई।
आइए, आज के इस पावन पर्व पर हम सामाजिक बुराइयों का दहन कर जीवन में सौहार्द और समरसता के भाव को आत्मसात करने का संकल्प लें। pic.twitter.com/6wdSSRZZFB
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) March 13, 2025
08:25 AM, 13-Mar-2025
होलिका दहन से जुड़ी कथा (Pauranik Katha On Holika Dahan)
प्रह्लाद और होलिका की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, असुर राज हिरण्यकश्यप को भगवान विष्णु से घोर द्वेष था। उसने कठोर तपस्या कर अमरत्व का वरदान प्राप्त करना चाहा, लेकिन उसे यह आशीर्वाद मिला कि वह न दिन में मरेगा, न रात में, न धरती पर, न आकाश में, न किसी मनुष्य के हाथों और न ही किसी शस्त्र से। इस वरदान के कारण वह अहंकारी हो गया और स्वयं को ईश्वर मानने लगा।
लेकिन हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था। उसने अपने पिता की अधर्मयुक्त नीतियों को मानने से इनकार कर दिया। इससे क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए, लेकिन हर बार वह बच गया।
आखिर में, हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की सहायता ली, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। योजना के तहत होलिका, प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से होलिका स्वयं जलकर भस्म हो गई, जबकि प्रह्लाद सुरक्षित बच गया।
इस घटना के बाद से ही होलिका दहन की परंपरा शुरू हुई, जो यह संदेश देती है कि अधर्म और अहंकार का अंत निश्चित है, और सच्ची भक्ति एवं श्रद्धा की हमेशा विजय होती है।
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08:01 AM, 13-Mar-2025
गोबर के उपलों (गुलरी) की माला होलिका दहन में क्यों चढ़ाई जाती है? (Why is Gulri mala offer to Holika)
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07:43 AM, 13-Mar-2025
होलिका दहन का ज्योतिषीय महत्व (Holika Dahan Ka Jyotishiya Mahatv)
यह पर्व फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो ग्रह-नक्षत्रों को संतुलित करने के लिए शुभ मानी जाती है। इस दिन विशेष पूजा करने से शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। मान्यता है कि इस दिन अग्नि में आहुति देने से वास्तु दोष दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।