Delhi Dehradun IFS Officer Suicide Case Update | Chanakyapuri | दिल्ली में IFS अधिकारी ने बिल्डिंग से कूदकर जान दी: लंबे समय से डिप्रेशन से जूझ रहे थे; देहरादून के रहने वाले थे

नई दिल्ली10 मिनट पहले

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अधिकारी की पहचान जितेन्द्र रावत के रूप में हुई है।

दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS) के एक अधिकारी ने शुक्रवार को आत्महत्या कर ली। अधिकारी ने विदेश मंत्रालय की आवासीय सोसाइटी की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी।

पुलिस के मुताबिक, अधिकारी की पहचान जितेंद्र रावत के रूप में हुई है। वे पिछले कुछ समय से डिप्रेशन में थे। उनका इलाज भी चल रहा था। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। हालांकि किसी साजिश के सबूत भी नहीं मिले हैं।

जितेंद्र सोसाइटी की फर्स्ट फ्लोर पर अपनी मां के साथ रहते थे, जबकि उनकी पत्नी और दो बच्चे देहरादून में रहते हैं।

विदेश मंत्रालय की आवासीय सोसाइटी (MEA) सोसाइटी है, अधिकारी फोर्थ फ्लोर से कूद गए।

विदेश मंत्रालय की आवासीय सोसाइटी (MEA) सोसाइटी है, अधिकारी फोर्थ फ्लोर से कूद गए।

मंत्रालय ने गोपनीयता के चलते ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा- एक अधिकारी का 7 मार्च की सुबह नई दिल्ली में निधन हो गया। मंत्रालय परिवार को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है और दिल्ली पुलिस के संपर्क में है।

इस कठिन घड़ी में मंत्रालय परिवार के साथ खड़ा है। मंत्रालय ने कहा कि परिवार की गोपनीयता का सम्मान करते हुए मामले से संबंधित अधिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।

यह घटना एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर देती है।

देश के लिए मेंटल हेल्थ एक बड़ी समस्या

भारत के लिए मेंटल हेल्थ एक बहुत बड़ी समस्या है। काम, पढ़ाई या पारिवारिक कारणों से चलते तनाव, एंग्जाइटी या डिप्रेशन लोगों पर हावी हो रहा है। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में सात में से एक लोग हमेशा खुद को डिप्रेस फील करता है या उसे काम करने में बहुत कम रुचि होती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के आंकड़े बताते हैं कि भारत में प्रति लाख लोगों पर आत्महत्या की औसत दर 10.9 है। हैरत की बात यह है कि अपनी मेंटल हेल्थ के बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी ही नहीं है। जिसकी वजह से आए दिन लोग आत्महत्या कर रहे हैं।

एक्टिव नहीं रहने से बढ़ता डिप्रेशन

BMC मेडिसिन में साल 2010 में पब्लिश हुई एक स्टडी के मुताबिक, जो लोग किसी तरह के खेल या फिजिकल एक्टिविटीज में हिस्सा नहीं लेते हैं। उन्हें डिप्रेशन होने की ज्यादा आशंका होती है। इसमें यह भी पता चला कि रोज 1 घंटे एक्सरसाइज करने से या फिजिकल एक्टिविटीज करने से डिप्रेशन या एंग्जाइटी का जोखिम 95% तक कम हो जाता है।

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